No Code और AI के जरिए टेक्नोलॉजी को आसान बना रहा है स्टार्टअप Appy Pie
Appy Pie की शुरुआत एक सरल सवाल से हुई कि क्या बिना कोड लिखे डिजिटल प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. जानिए कैसे फाउंडर अभिनव गिरधर ने No Code और AI के जरिए लाखों लोगों के लिए टेक्नोलॉजी को आसान बनाया.
आज के दौर में मोबाइल ऐप, वेबसाइट और ऑटोमेशन हर बिजनेस की जरूरत बन चुके हैं. लेकिन कुछ साल पहले तक यह दुनिया सिर्फ टेक्निकल लोगों तक सीमित थी. कोडिंग सीखना जरूरी था. बड़ी टीम और बड़ा बजट चाहिए होता था. ऐसे माहौल में 2016 में नोएडा से शुरू हुआ Appy Pie एक अलग सोच के साथ सामने आया. इसका मकसद साफ था. टेक्नोलॉजी को आसान बनाना. हर किसी के लिए सुलभ बनाना.
यह कहानी सिर्फ एक टेक प्लेटफॉर्म की नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जो मानती है कि अच्छे आइडिया सिर्फ इसलिए खत्म नहीं होने चाहिए क्योंकि किसी के पास टेक्निकल ज्ञान नहीं है. Appy Pie के फाउंडर और CEO अभिनव गिरधर (Abhinav Girdhar) ने इसी सोच को अपना मिशन बनाया. हाल ही में अभिनव ने YourStory हिंदी से बात की. इस बातचीत में उन्होंने स्टार्टअप के अब तक के सफर के बारे में बताया.
लंदन से की इंजीनियरिंग की पढ़ाई
अभिनव गिरधर का झुकाव बचपन से ही टेक्नोलॉजी की ओर था. उन्हें यह समझना अच्छा लगता था कि कैसे टेक्नोलॉजी जटिल समस्याओं को आसान बना सकती है. यही जिज्ञासा उन्हें पढ़ाई के लिए लंदन ले गई, जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से इंफॉर्मेशन सिस्टम्स इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की.
उस दौर को याद करते हुए अभिनव कहते हैं, “लंदन में पढ़ाई के दौरान मैंने देखा कि डिजिटल टूल्स किस तरह बिजनेस की शक्ल बदल रहे हैं.” यही अनुभव उनके मन में बैठ गया. टेक्नोलॉजी सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं होनी चाहिए. यह सोच धीरे धीरे उनकी ऑन्त्रप्रेन्योरशिप जर्नी की नींव बन गई.
करियर और Appy Pie की शुरुआत
Appy Pie शुरू करने से पहले अभिनव एक न्यू मीडिया फर्म चला रहे थे. उनकी कंपनी वेबसाइट डेवलपमेंट, SEO (Search Engine Optimization) और ऑनलाइन मार्केटिंग का काम करती थी. उसी दौरान कई क्लाइंट्स मोबाइल ऐप की मांग करने लगे. समस्या यह थी कि बजट बहुत सीमित होता था.
अभिनव बताते हैं, “हमने सोचा कि क्या मोबाइल ऐप के लिए भी वर्डप्रेस जैसा कोई आसान सिस्टम हो सकता है.” जब उन्होंने खोज की, तो ऐसा कोई प्लेटफॉर्म मौजूद नहीं था. यहीं से Appy Pie का आइडिया पैदा हुआ.
उन्हें यह भी महसूस हुआ कि कई लोग अच्छे आइडिया होने के बावजूद सिर्फ इसलिए आगे नहीं बढ़ पाते क्योंकि उनके पास टेक्निकल संसाधन नहीं होते. “मुझे लगा कि टेक्नोलॉजी कुछ गिने चुने लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए,” वे कहते हैं. यही सोच Appy Pie की आत्मा बन गई.
No Code और AI की दिशा में बढ़ता प्लेटफॉर्म
शुरुआत में Appy Pie एक नो कोड (No Code) ऐप बिल्डिंग प्लेटफॉर्म था. यानी बिना कोड लिखे कोई भी अपना मोबाइल ऐप बना सकता था. लेकिन समय के साथ प्लेटफॉर्म सिर्फ ऐप तक सीमित नहीं रहा.
धीरे धीरे इसमें वेबसाइट बिल्डर, चैटबॉट बिल्डर, लाइव चैट सॉफ्टवेयर, डिजाइन टूल्स और नॉलेज बेस सॉफ्टवेयर जुड़ते गए. अब यह एक पूरा इकोसिस्टम बन चुका है. हर प्रोडक्ट का मकसद एक ही है. चीजों को आसान और किफायती बनाना.
आज Appy Pie में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बड़ी भूमिका है. AI-समर्थित वर्कफ्लो ऑटोमेशन, नेचुरल लैंग्वेज से ऐप बनाना और स्मार्ट चैटबॉट्स जैसे फीचर्स प्लेटफॉर्म को आगे ले जा रहे हैं.
अभिनव कहते हैं, “हम चाहते हैं कि लोग बात करके भी टेक्नोलॉजी बना सकें.”
बूटस्ट्रैप्ड ग्रोथ और चुनौतियां
Appy Pie की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने कभी बाहरी फंडिंग नहीं ली. यह पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड है. शुरुआती निवेश अभिनव के पुराने बिजनेस से आए संसाधनों से हुआ. बाद में जो भी कमाई हुई, उसे दोबारा प्रोडक्ट और टीम में लगाया गया.
वे कहते हैं, “हमने शुरू से मुनाफे पर ध्यान दिया, ताकि किसी पर निर्भर न रहना पड़े.” यही वजह है कि कंपनी शुरुआत से ही सब्सक्रिप्शन आधारित SaaS (Software as a Service) मॉडल पर काम करती रही.
हालांकि सफर आसान नहीं था. सबसे बड़ी चुनौती थी लोगों को No Code का मतलब समझाना. उस समय यह कॉन्सेप्ट नया था. कई बिजनेस इसे गंभीरता से नहीं लेते थे. इसके लिए Appy Pie ने एजुकेशनल कंटेंट, सोशल मीडिया कैंपेन और यहां तक कि टीवी विज्ञापनों का सहारा लिया.
आज कंपनी का दावा है कि वह हर साल करीब 100 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. पिछले छह महीनों में पेड (paid) सब्सक्रिप्शन में पांच गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है.
भविष्य की योजनाएं
आज Appy Pie दुनिया भर में लाखों यूजर्स को सेवा दे रहा है. इसके यूजर्स में छोटे कारोबारी, एजुकेटर्स, स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं. भारत और अमेरिका इसके बड़े बाजार हैं.
अभिनव मानते हैं कि आने वाले सालों में No Code और AI एक साथ और करीब आएंगे. “भविष्य में डेवलपमेंट मिनटों में होगा, दिनों में नहीं,” वे कहते हैं. उनका मानना है कि इससे एक नई पीढ़ी के सिटीजन डेवलपर्स उभरेंगे.
आगे की योजना AI को और मजबूत करने की है. खासतौर पर एंटरप्राइज लेवल पर सुरक्षित और स्केलेबल सॉल्यूशंस बनाने पर काम हो रहा है.
अपने सफर को लेकर अभिनव कहते हैं, “अच्छी टेक्नोलॉजी वही है जो असली समस्या हल करे.” युवा उद्यमियों को उनकी सलाह भी सीधी है. छोटे स्तर से शुरू करें. यूजर को समझें. और धैर्य रखें.
Appy Pie की कहानी यह दिखाती है कि जब सोच सही हो और मकसद साफ हो, तो बिना बड़े निवेश के भी वैश्विक प्लेटफॉर्म खड़ा किया जा सकता है.



