दिल्ली से 122 देशों तक: एडटेक स्टार्टअप KC GlobEd ने बदली 15,000 छात्रों की ज़िंदगी
KC GlobEd ने सिर्फ़ 4 साल में 122 देशों के 15,000+ छात्रों को सफलता का स्वाद चखाया है. कमल छाबड़ा द्वारा शुरू किया गया यह प्लेटफ़ॉर्म US CPA, US CMA, ACCA जैसे ग्लोबल सर्टिफिकेशन कोर्सेज के लिए सस्ती और प्रभावी तैयारी कराता है. जानिए इसकी सफलता और विज़न की प्रेरणादायक कहानी.
दिल्ली के एक साधारण से घर में जन्मे और पले-बढ़े कमल छाबड़ा (Kamal Chhabra) ने अपनी ज़िंदगी में शिक्षा को सबसे बड़ी ताक़त माना. उनके माता-पिता खुद उच्च शिक्षा नहीं ले पाए, लेकिन उन्हें हमेशा यक़ीन था कि पढ़ाई ही वह हथियार है जो उनके बच्चों की तक़दीर बदल सकता है. यही सोच आज KC GlobEd जैसे ग्लोबल एजुकेशन प्लेटफ़ॉर्म का आधार बनी.
साल 2020 में शुरू हुई यह कंपनी आज 122 देशों के 15,000 से अधिक छात्रों का भविष्य संवार चुकी है. दिल्ली से निकली यह पहल अब ग्लोबल फाइनेंस शिक्षा की दुनिया में एक नई इबारत लिख रही है. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक छोटे से सपने ने इतना बड़ा रूप ले लिया.
शुरुआत
कमल छाबड़ा ने भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने के बाद भी अपनी पढ़ाई को नहीं रोका. उन्होंने अमेरिका का US CPA कोर्स पूरा किया और फिर PwC, EY और Indorama जैसी कंपनियों में भारत, अमेरिका, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में दो दशक से ज़्यादा समय तक काम किया. इन अनुभवों ने उन्हें सिखाया कि दुनिया भर में कारोबार कैसे चलता है और ग्लोबल सर्टिफिकेशन क्यों ज़रूरी हैं.
इसी दौरान उन्होंने देखा कि भारतीय छात्र, ख़ासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के, US CPA, US CMA और US EA जैसी परीक्षाओं की तैयारी में सही मार्गदर्शन से वंचित रहते हैं. कहीं सही प्लेटफ़ॉर्म नहीं था, कहीं फीस इतनी ऊंची कि आम छात्र सोच भी नहीं पाते. यही गैप उन्हें खटकने लगा.
साल 2020 में जब वह भारत लौटे, तो ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया. कुछ ही समय में उन्होंने महसूस किया कि छात्र सस्ती और क्वालिटी शिक्षा के लिए कितने उत्सुक हैं. यहीं से KC GlobEd की शुरुआत हुई.
क्या करता है KC GlobEd?
एडटेक दुनिया में आज कई प्लेटफ़ॉर्म हैं, लेकिन ज़्यादातर या तो महंगे हैं या अधूरे. कहीं सिर्फ़ कोर्स मिलते हैं, लेकिन गाइडेंस नहीं. कहीं सामग्री है, लेकिन करियर सपोर्ट नहीं. KC GlobEd इस कमी को पूरा करता है. यह केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र को शुरुआत से लेकर नौकरी तक साथ देता है. यहां छात्र को कोर्स चुनने, रणनीति बनाने, लेक्चर अटेंड करने, प्रैक्टिस करने और प्लेसमेंट पाने तक हर कदम पर मदद मिलती है. कंपनी का ध्यान खासकर US CPA, US CMA, US EA और UK ACCA जैसी इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन पर है, जिनकी मांग आज भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) में तेज़ी से बढ़ रही है.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, कमल छाबड़ा कहते हैं, “शिक्षा का असली मक़सद रोज़गार और आत्मनिर्भरता है. यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है.”

बिज़नेस मॉडल
KC GlobEd का मॉडल चार स्तंभों पर टिका है: कंटेंट, टेक्नोलॉजी, मेंटरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट. छात्रों को यहां पूरा पैकेज मिलता है. उन्हें लाइव और रिकॉर्डेड क्लासेज़, स्ट्रक्चर्ड नोट्स, मॉक टेस्ट और हज़ारों प्रैक्टिस क्वेश्चन मिलते हैं. साथ ही रिज़्यूमे और इंटरव्यू गाइडेंस भी उपलब्ध है. प्लेटफ़ॉर्म की सबसे बड़ी ताक़त है — T.E.E.E. (Tailored Education for Enhanced Efficiency) टेक्नोलॉजी. यह AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर हर छात्र की पढ़ाई के पैटर्न, आदतों और कमज़ोरियों को समझती है और उसके हिसाब से प्लान बनाती है.
आज के दौर में कई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म ग्लोबल सर्टिफिकेशन की तैयारी करवाते हैं. लेकिन KC GlobEd की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि एक ही सब्सक्रिप्शन में सभी कोर्स मिल जाते हैं. इससे छात्र का समय और पैसा दोनों बचते हैं. AI समर्थित T.E.E.E. टेक्नोलॉजी पढ़ाई को 70% तक तेज़ और असरदार बना देती है. साथ ही, यहां सिर्फ़ परीक्षा पास कराने पर ज़ोर नहीं है, बल्कि छात्रों को दुनिया भर में नौकरी के काबिल बनाने पर ध्यान है.
सिर्फ़ चार साल में KC GlobEd ने कई अहम मील के पत्थर हासिल किए हैं. कंपनी ने 122 देशों के 15,000 से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाई है. भारत के छोटे-बड़े शहरों में 80 से ज़्यादा फ्रैंचाइज़ पार्टनर हैं. 50 से अधिक कॉलेज और यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी की गई है. 10 से अधिक सरकारी स्किल प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं. 280 से अधिक अनुभवी मेंटर्स ऑनबोर्ड किए गए हैं. कंपनी ने अब तक 25,000 से अधिक प्रैक्टिस क्वेश्चन तैयार किए हैं. कमल छाबड़ा की लिखी किताबें लगातार बेस्टसेलर की लिस्ट में शामिल होती रही हैं.
फंडिंग और रेवेन्यू
साल 2023 में कंपनी ने कुछ रणनीतिक निवेशकों से सीड फंडिंग जुटाई. यह निवेश एजुकेशन और फाइनेंस सेक्टर से जुड़े अनुभवी लोगों ने किया. इस फंडिंग से कंपनी ने अपने टेक प्लेटफ़ॉर्म को अपग्रेड किया, मल्टीलिंगुअल फीचर्स जोड़े, नई किताबें और कंटेंट तैयार किया, टीम का विस्तार किया और हायरिंग व ट्रेनिंग के लिए पार्टनरशिप की. आज KC GlobEd पूरी तरह से सेल्फ-सस्टेनेबल है और मुनाफ़े को फिर से बिज़नेस में लगाकर आगे बढ़ रहा है.
KC GlobEd का रेवेन्यू मॉडल भी काफ़ी दिलचस्प है. कंपनी का मुख्य स्रोत है वार्षिक सब्सक्रिप्शन, जिसमें सिर्फ़ ₹40,000 में सभी कोर्स की सुविधा दी जाती है. इसके अलावा 80 से ज़्यादा फ़्रैंचाइज़ पार्टनर का नेटवर्क, खुद की लिखी और प्रकाशित किताबों की बिक्री, कॉर्पोरेट ट्रेनिंग प्रोग्राम और कंपनियों के साथ प्लेसमेंट पार्टनरशिप से भी आय होती है. कमल छाबड़ा का कहना है कि उनकी कोशिश शिक्षा को सस्ती, असरदार और स्केलेबल बनाना है.
चुनौतियां
हर सफ़र आसान नहीं होता. कमल छाबड़ा बताते हैं कि सबसे कठिन काम था भरोसा जीतना. इस क्षेत्र में कई खिलाड़ी हैं और छात्र समझदारी से पैसा खर्च करते हैं. ऐसे में भरोसा बनाना आसान नहीं था. दूसरी चुनौती थी कंटेंट डेवलपमेंट. उन्होंने हर किताब और हर प्रैक्टिस क्वेश्चन खुद बनाया, ताकि यह ग्लोबल एग्ज़ाम ब्लूप्रिंट के अनुरूप रहे. तीसरी चुनौती थी सस्ती शिक्षा.
कमल और उनकी टीम ने कम दाम में बेहतर सुविधा देने का वादा किया और उसे निभाया.

KC GlobEd की टीम
भविष्य की योजनाएं
आज KC GlobEd के छात्र भारत ही नहीं, बल्कि UAE, क़तर, ओमान, नाइजीरिया, केन्या, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से भी हैं. भारत उनका सबसे बड़ा बाज़ार है. खासकर छोटे शहरों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने फ़्रैंचाइज़ नेटवर्क खड़ा किया है. अब कंपनी की नज़र है साउथईस्ट एशिया और ईस्ट अफ्रीका पर. साथ ही, वे अलग-अलग भारतीय भाषाओं में भी कंटेंट लाने की तैयारी कर रहे हैं.
कमल छाबड़ा का सपना सिर्फ़ एक कोचिंग प्लेटफ़ॉर्म बनाने का नहीं है. वे इसे KC GlobEd Digital University तक ले जाना चाहते हैं. कंपनी नए-नए सर्टिफिकेशन कोर्स लाने पर काम कर रही है. किताबों की नई सीरीज़ प्रकाशित करने और AI-बेस्ड ट्रैकिंग को और मज़बूत करने की तैयारी है. सबसे अहम पहल है प्लेसमेंट नेटवर्क को मज़बूत करना, ताकि भारत, खाड़ी देशों और नॉर्थ अमेरिका के छात्र बेहतर करियर बना सकें.
कमल कहते हैं, “हमारा मिशन है कि हर छात्र, चाहे वह किसी भी शहर या भाषा से हो, ग्लोबल फाइनेंस करियर का हक़दार बने.”



