40 साल, 68 देश: सूरत के साड़ी ब्रांड Parnika India की कहानी
सूरत की गलियों से 68 देशों तक — 40 साल की मेहनत, 1.5 लाख ग्राहकों का भरोसा और अब 100 करोड़ रेवेन्यू का सपना! जानिए कैसे विशाल पचेरीवाल ने Parnika India को बनाया भारतीय फैशन का ग्लोबल ब्रांड.
साल था 1984. सूरत की गलियों में एक छोटे-से परिवार ने एक सपना देखा. सपना था भारतीय परंपरा को दुनिया तक पहुँचाने का. एक-एक धागे में बसी कहानियों को, एक-एक बुनाई में छिपी कला को दुनिया को दिखाने का. इसी सपने ने जन्म दिया Parnika India (पर्णिका इंडिया) को. शुरुआत छोटी थी—कुछ साड़ियाँ, कुछ कारीगर और बहुत सारा जुनून. लेकिन यही जुनून धीरे-धीरे 40 सालों में एक विरासत बन गया.
आज Parnika India केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि भारतीय फैशन और परंपरा का पर्याय बन चुका है.
YourStory हिंदी से बात करते हुए Parnika India के डायरेक्टर विशाल पचेरीवाल (Vishal Pacheriwal) बताते हैं कि उनकी शुरुआत केवल साड़ियों से हुई थी. लेकिन वक्त के साथ फैशन बदला और कंपनी ने भी अपने रूप को बदला. अब यह ब्रांड सिर्फ पारंपरिक परिधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि फ्यूज़न वियर और आधुनिक डिज़ाइनों के साथ नई पीढ़ी की पसंद भी बन चुका है.
यही कारण है कि आज यह ब्रांड 68 से ज्यादा देशों में अपनी खास पहचान बना चुका है और 1.5 लाख से अधिक वफादार ग्राहक इस ब्रांड का हिस्सा हैं.
सूरत की फैक्ट्री से दुनिया तक
सूरत हमेशा से कपड़ों का शहर माना जाता है और यहीं स्थित है Parnika India का मजबूत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट. यहाँ हर साल 36 लाख मीटर से ज्यादा बुना हुआ कपड़ा और 9 लाख मीटर से अधिक एम्ब्रॉयडरी वाला फैब्रिक तैयार होता है. हर कपड़े की निगरानी 25 से ज्यादा कुशल विशेषज्ञ करते हैं. कच्चे धागे से लेकर आखिरी फिनिशिंग तक हर चरण पर बारीकी से नज़र रखी जाती है. यही वजह है कि चाहे छोटे शहर का रिटेलर हो या किसी बड़े शो-रूम का ऑर्डर, हर ग्राहक को भरोसा रहता है कि Parnika से आया कपड़ा सबसे बेहतर होगा.
विशाल पचेरीवाल बताते हैं, “हमने शुरुआत सिर्फ साड़ियों से की थी. लेकिन वक्त के साथ फैशन बदला और हमने भी अपने डिज़ाइन बदले. अब हम पारंपरिक परिधान के साथ-साथ फ्यूज़न वियर भी लाते हैं, ताकि हर पीढ़ी जुड़ी रहे.”
विशाल आगे कहते हैं, “हमारे पास 25 से ज्यादा क्वालिटी एक्सपर्ट्स हैं, जो हर स्टेज पर निगरानी करते हैं. धागे से लेकर फाइनल फिनिशिंग तक हम कोई समझौता नहीं करते. यही भरोसा हमें छोटे शहरों से लेकर बड़े शो-रूम्स तक सबके लिए खास बनाता है.”
परंपरा और ट्रेंड का संगम
फैशन की दुनिया हर दिन बदलती है. लेकिन Parnika India ने हमेशा परंपरा और ट्रेंड्स का खूबसूरत मेल तैयार किया.
विशाल बताते हैं, “हम पारंपरिक तकनीक जैसे ब्लॉक प्रिंट को लेकर उसे मॉडर्न को-ऑर्ड सेट में बदल देते हैं. बनारसी बुनाई को नए कट्स के साथ पेश करते हैं. हमारा लक्ष्य है कि दादी भी मुस्कुराएँ और पोती भी इम्प्रेस हो जाए.”
Parnika India केवल फैशन तक सीमित नहीं है, यह समाज की धड़कनों से भी जुड़ा है. कोविड के समय शुरू हुआ साप्ताहिक भोजन वितरण अभियान आज भी जारी है और हर हफ्ते 300 से अधिक लोगों को भोजन मिलता है.
इसके अलावा, कंपनी महिलाओं के लिए menstrual hygiene किट बाँटने और जागरूकता फैलाने का काम भी करती है.
विशाल कहते हैं, “ये पहल हमारे लिए मार्केटिंग नहीं बल्कि जिम्मेदारी है. कामयाबी का मतलब तभी है जब समाज भी उससे जुड़ सके.”
100 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य
अब Parnika India का अगला लक्ष्य है—वित्तीय वर्ष 2025-26 तक 100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना. इसके लिए कंपनी कई नए कदम उठा रही है.
विशाल पचेरीवाल बताते हैं, “हम पुरुषों और बच्चों के कपड़े लॉन्च कर रहे हैं. कॉरपोरेट यूनिफॉर्म की शुरुआत हो चुकी है. साथ ही, फ्यूज़न वियर और सस्टेनेबल फैब्रिक पर भी ध्यान दे रहे हैं. आने वाला समय और भी रोमांचक होगा.”
कंपनी अब अमेरिका, कनाडा और दक्षिण-पूर्व एशिया में कारोबार विस्तार की तैयारी कर रही है. हर क्षेत्र की पसंद और मौसम को ध्यान में रखकर कलेक्शन तैयार किए जा रहे हैं.
विशाल कहते हैं, “हम इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भाग लेकर नए पार्टनर बना रहे हैं. डिजिटल मार्केटिंग और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए हम वैश्विक बाजार में और गहराई से उतरना चाहते हैं.”
Parnika India का विज़न केवल कारोबार तक सीमित नहीं है. यह ब्रांड चाहता है कि भारतीय परिधान हर घर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बने.
विशाल पचेरीवाल कहते हैं, “हम चाहते हैं कि हमारी ड्रेस पहनकर लोग अपनी पहचान और गर्व महसूस करें. हमारे लिए फैशन केवल कपड़े नहीं, बल्कि परंपरा, आधुनिकता और संस्कृति का संगम है.”
Parnika India की कहानी केवल एक कंपनी की नहीं बल्कि मेहनत और सपनों की कहानी है. एक छोटे-से परिवार से शुरू होकर यह ब्रांड आज दुनिया भर में भारतीय फैशन का झंडा गाड़ चुका है. यह हमें सिखाता है कि जब जुनून परंपरा से मिले और मेहनत सपनों से, तो कोई भी सफर नामुमकिन नहीं होता.



