दिल्ली का ये स्टार्टअप बना रहा है हर AC को सस्ता एयर प्यूरिफायर
दिल्ली के वैज्ञानिक रवि कौशिक का स्टार्टअप Airth अब हर AC को बना रहा है सस्ता एयर प्यूरिफायर. FiltRIX टेक्नोलॉजी से आपका AC देगा ठंडी और साफ हवा. जानिए कैसे यह भारतीय इनोवेशन महंगे एयर प्यूरिफायर का सस्ता विकल्प बन रहा है और लाखों घरों की हवा बदल रहा है.
भारत के शहरों में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है. लेकिन हर कोई महंगा एयर प्यूरिफायर खरीद नहीं सकता. सोचिए अगर वही AC जो हमारे कमरे को ठंडा करता है, वही हवा को भी साफ कर दे, तो? इसी सोच से दिल्ली के वैज्ञानिक रवि कौशिक (Ravi Kaushik) ने शुरू किया , एक ऐसा स्टार्टअप जो आम AC को सस्ता एयर प्यूरिफायर बना देता है.
रवि कौशिक एक एयरोसोल वैज्ञानिक हैं. उन्होंने IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, IISc बेंगलुरु और कई नेशनल लैब्स के विशेषज्ञों के साथ काम किया है.
वे कहते हैं, “मैंने लगभग हर एयर प्यूरिफिकेशन तकनीक पर काम किया है, यहां तक कि जो अभी डेवलपमेंट में हैं. मेरा लक्ष्य है कि साफ हवा हर किसी के लिए सुलभ और सस्ती बने.”
2020 में शुरू हुआ सफर
Airth की शुरुआत 2020 में हुई. उस समय रवि Social Alpha नाम के इनक्यूबेटर में Entrepreneur-in-Residence थे. उन्होंने सस्ती एयर प्यूरिफिकेशन तकनीक पर काम शुरू किया.
पहला प्रोडक्ट था एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरिफायर, जो कोविड-19 वायरस पर टेस्ट किया गया. यह टेस्ट CSIR-IMTech जैसे बायोसेफ्टी लैब्स में हुआ.
लेकिन जल्द ही रवि ने देखा कि आम एयर प्यूरिफायर बहुत महंगे, भारी और असुविधाजनक होते हैं.
वे कहते हैं, “लोग 20,000 रुपये खर्च करते हैं, लेकिन प्यूरिफायर बस कोने में रखा रहता है.”
तभी उन्होंने सोचा—क्यों न AC में ही प्यूरिफिकेशन को जोड़ा जाए, क्योंकि AC तो हर दिन इस्तेमाल होता है.
AC से साफ हवा तक: FiltRIX टेक्नोलॉजी
2023 में Airth ने अपना प्रोडक्ट FiltRIX लॉन्च किया. यह एक साधारण अटैचमेंट है जो किसी भी AC—स्प्लिट, विंडो या कमर्शियल—को हाई-इफिशिएंसी एयर प्यूरिफायर में बदल देता है.
FiltRIX में तीन परतों वाली फिल्टर टेक्नोलॉजी है. इसका “पार्शियल कवरेज” डिजाइन AC में आने वाली “प्रेशर ड्रॉप” समस्या को भी दूर करता है. जब फिल्टर ज्यादा घना होता है, तो हवा का बहाव कम हो जाता है, जिससे कूलिंग और प्यूरिफिकेशन दोनों की क्षमता घटती है.
रवि बताते हैं, “हमारे 3D फिल्टर इंसानी फेफड़ों से प्रेरित हैं. इनमें बड़ी सतह होती है जो ज्यादा धूल पकड़ती है और सिर्फ 1-2 घंटे में 90% तक शुद्ध हवा देती है.”
इन फिल्टर्स को IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT कानपुर और Bureau of Energy Efficiency जैसी लैब्स ने टेस्ट और सर्टिफाई किया है.
रवि कहते हैं, “तीन महीने बाद आप खुद देखेंगे कि AC की हवा और बेहतर हो जाती है और बिजली की खपत भी 1% कम होती है.” इसे यूज़र खुद इंस्टॉल कर सकते हैं, किसी तकनीशियन की जरूरत नहीं होती.
कीमत, सर्विस और इंस्टॉलेशन?
Airth का बिज़नेस मॉडल B2B और B2C दोनों है. इसके पहले ग्राहक थे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया. आज Airth के लगभग 100 B2B क्लाइंट हैं जिनमें The Beacon School, Matrix Partners, Dell, DLF Camellias जैसे नाम शामिल हैं.
इसके अलावा 60,000 से ज़्यादा रिटेल यूज़र्स पूरे भारत में इसके प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं.
कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को वेबसाइट के अलावा Amazon, Tata 1mg, Flipkart जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचती है. जल्द ही PharmEasy पर भी लॉन्च होगा.
एक AC प्यूरिफायर की कीमत लगभग ₹2,500 है. इसके रिप्लेसमेंट फिल्टर (8-12 महीने बाद बदलना होता है) की कीमत ₹1,200 है.
कंपनी का दूसरा प्रोडक्ट लाइन है एयर क्वालिटी मॉनिटर, जिसकी कीमत ₹500 से ₹5,000 तक है.
रवि कहते हैं, “हमने सब कुछ सस्ता और आसान रखा है. किसी सर्विस की जरूरत नहीं, यूज़र खुद इंस्टॉल और रिप्लेस कर सकता है.”
मेक इन इंडिया मॉडल
Airth की 15 लोगों की टीम दिल्ली में काम करती है. कंपनी का असेंबली यूनिट और वेयरहाउस भी वहीं है. एयर प्यूरिफायर इन-हाउस बनाए जाते हैं, जबकि एयर क्वालिटी मॉनिटर स्पेशलाइज्ड वेंडर्स से मंगाए जाते हैं. कोटिंग और फाइनल फिटिंग Airth खुद करता है.
अब तक कंपनी ने ₹3.3 करोड़ जुटाए हैं. इसमें दोस्तों, परिवार, Whiteboard Capital, SIRMA और कुछ एंजल निवेशकों का योगदान है.
वित्त वर्ष 24 में कंपनी ने ₹6 करोड़ का रेवेन्यू कमाया और वित्त वर्ष 26 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए Airth एक और फंडिंग जुटाने की तैयारी में है ताकि ग्लोबल मार्केट में भी कदम रख सके.
बड़ी कंपनियों से मुकाबला
रवि मानते हैं कि एयर प्यूरिफायर मार्केट में Dyson, Sharp, Xiaomi जैसे बड़े नाम पहले से मौजूद हैं.
वह कहते हैं, “वे बड़े और महंगे मशीन बेचते हैं. हम कोई और डिवाइस नहीं बेच रहे, बल्कि लोगों की सोच बदल रहे हैं.”
Airth को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
रवि कहते हैं, “हवा का प्रदूषण दिखता नहीं है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. फंड भी सीमित थे और हमें सेल्स का अनुभव नहीं था. लोगों को समझाना मुश्किल था कि उन्हें इस प्रोडक्ट की जरूरत है. लोग दवा पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन बचाव पर नहीं.”
वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, “लेकिन अब जब हमारे 50,000 ग्राहक हैं, तो हमें पता है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं.”
आगे की राह
अब Airth स्मार्ट और ऑटोमैटिक एयर क्वालिटी सिस्टम पर काम कर रहा है. कंपनी एक AI-समर्थित एयर क्वालिटी मॉनिटर बना रही है जो प्रदूषण के स्तर के हिसाब से AC की फैन स्पीड को अपने आप एडजस्ट करेगा. इससे बिजली की बचत और हवा दोनों बेहतर होगी. यह प्रोडक्ट अगले महीने लॉन्च होगा.
Airth अब मिडिल ईस्ट और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में विस्तार की योजना बना रहा है. रवि हाल ही में GITEX Dubai में भारतीय स्टार्टअप डेलिगेशन के साथ शामिल हुए.
वे कहते हैं, “हमने सालों रिसर्च में लगाए हैं, अब दुनिया इसके लिए तैयार है.”
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का एयर प्यूरिफायर मार्केट 2034 तक ₹3,520 करोड़ तक पहुंच सकता है और हर साल लगभग 5 लाख यूनिट्स बिकेंगी.
रवि कहते हैं, “हमारा लक्ष्य प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि मार्केट को बढ़ाना है ताकि हर किसी को सस्ती और साफ हवा मिल सके.”
Edited by रविकांत पारीक



