किसान के बेटे ने लगाई मशीन रिपेयर यूनिट, CM YUVA Yojana का मिला सहारा
बिजनौर के धनिश कुमार ने नौकरी छोड़कर तकनीकी अनुभव के दम पर अपना मशीन रिपेयर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू किया. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana की सहायता से उन्होंने कारोबार को औपचारिक रूप दिया और धीरे धीरे एक स्थिर व्यवसाय खड़ा किया.
बिजनौर जिले की धामपुर तहसील के रहने वाले धनिश कुमार एक किसान परिवार से आते हैं. उनके घर में खेती ही मुख्य काम रहा है. व्यापार या उद्योग का माहौल उन्होंने बचपन में नहीं देखा. पढ़ाई उन्होंने अपने इलाके से ही पूरी की.
स्कूल के बाद रोज़गार की तलाश उन्हें गाजियाबाद ले गई. वहां उन्होंने करीब दस साल तक नौकरी की. शुरुआती दिन फैक्ट्रियों में बीते. मशीनें, औजार और लंबी शिफ्टें उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गईं. इसी दौरान उन्होंने इंडस्ट्रियल मशीनों को करीब से समझा.
समय के साथ उनका काम मशीनों की सर्विसिंग और मेंटेनेंस की ओर बढ़ा. रोलिंग मिल, ट्यूब मिल और भारी उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की मरम्मत, नियमित जांच और स्पेयर पार्ट्स से जुड़ा काम उन्होंने संभाला. इस अनुभव ने उन्हें तकनीकी रूप से मजबूत बनाया. लेकिन अपना काम शुरू करने का विचार लंबे समय तक दूर ही रहा. वजह साफ थी. सीमित पैसा और परिवार की जिम्मेदारी.
धनिश ने आईटीआई की ट्रेनिंग ली. इसके बाद पॉलिटेक्निक कोर्स किया. गाजियाबाद की कई कंपनियों में अप्रेंटिसशिप और वर्कशॉप का अनुभव भी मिला. साल 2023 तक वह एक दशक से ज्यादा नौकरी कर चुके थे. तब उन्हें लगा कि अब बदलाव जरूरी है.
नौकरी छोड़ने का फैसला अचानक नहीं था. उन्होंने घर के खर्च का हिसाब लगाया. कुछ पैसे अलग रखे ताकि अगर काम जमने में समय लगे तो परिवार पर असर न पड़े. इसके बाद उन्होंने एक मशीन खरीदी और अपने सर्विसिंग काम के साथ उसे चलाना शुरू किया.
धीरे धीरे काम बढ़ने लगा. ऑर्डर आने लगे. उन्होंने दूसरी मशीन भी जोड़ ली. अब वह सिर्फ मशीनों की सर्विस नहीं करते थे, बल्कि स्पेयर पार्ट्स का निर्माण भी करने लगे. आज उनका यूनिट बड़ी कमर्शियल मशीनों की मरम्मत, पार्ट्स बनाने और साइट पर जाकर मेंटेनेंस का काम करता है.
धनिश कहते हैं कि बिजनेस में भी दबाव होता है. लेकिन यह दबाव अलग होता है. यहां जोखिम पता होता है. अपनी क्षमता का अंदाजा होता है.
यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत मिली सहायता ने उनके काम को औपचारिक रूप दिया. कागजी प्रक्रिया आसान नहीं थी. बैंक स्टेटमेंट, दस्तावेज और अनुमान तैयार करना उनके लिए नया अनुभव था. लेकिन वह मानते हैं कि यह सब संभालने लायक था.
इस योजना के तहत मिले लोन ने उन्हें शुरुआती समय में राहत दी. किस्तें बाद में शुरू हुईं. इससे उन्हें अपना काम स्थिर करने का समय मिला. धनिश इसे सीएम युवा योजना का ऐसा ढांचा मानते हैं, जो छोटे उद्यमियों को शुरुआत में सांस लेने की जगह देता है.
आज करीब दो साल बाद फर्क साफ दिखता है. एक मशीन से शुरू हुआ काम अब दो मशीनों तक पहुंच गया है. काम पहले से ज्यादा नियमित हो गया है. वर्कशॉप में दो लोग काम करते हैं. बाहर साइट पर सर्विस के लिए एक और व्यक्ति साथ रहता है.
धनिश का मानना है कि नए लोगों को काम सिखाना मुश्किल नहीं है. अनुभव के साथ बिना ट्रेनिंग वाले लोग भी कुछ महीनों में सर्विस और मेंटेनेंस का काम सीख सकते हैं.
काम में उतार चढ़ाव अब भी हैं. कभी काम धीमा होता है. कभी भुगतान देर से मिलता है. कभी बने हुए पार्ट्स बिकने में समय लेते हैं और पैसा अटक जाता है. लेकिन वह इन्हें नुकसान नहीं मानते. उनके लिए यह कारोबार का हिस्सा है, जिसके लिए वह पहले से तैयार थे.
आगे की योजना साफ है. अगले दो साल में मौजूदा लोन पूरा करना. हालात अनुकूल रहे तो एक और मशीन जोड़ना.
पीछे मुड़कर देखने पर धनिश को लगता है कि यह सफर एक झटके में नहीं बदला. यह धीरे धीरे बदला. फैक्ट्री की मशीनों से सीखते हुए अपने छोटे लेकिन स्थिर यूनिट तक पहुंचा. शुरुआती अनिश्चितता अब नियंत्रण और संतुलन में बदल चुकी है. मेहनत से कमाई गई स्थिरता उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा देती है.
Edited by रविकांत पारीक



