प्रयागराज के डॉ. आशुतोष यादव ने कैसे बदली आंखों के इलाज की तस्वीर
प्रयागराज के नैनी में डॉ. आशुतोष यादव ने आंखों के उपचार के लिए क्लिनिक खोला. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्होंने जरूरी मशीनें खरीदीं, जिससे मोतियाबिंद और अन्य नेत्र जांच स्थानीय स्तर पर संभव हुई. आज उनका क्लिनिक मरीजों को बेहतर और सुलभ उपचार दे रहा है.
नैनी, प्रयागराज में एक आंखों की क्लिनिक है जहां रोज ऐसे मरीज आते हैं जिनकी आंखों में जलन होती है. किसी की आंख में धूल का कण चला जाता है. कोई तेज दर्द से परेशान होता है. कई बार मरीज आंखें खोल भी नहीं पाते. ऐसे समय में डॉ. आशुतोष यादव धैर्य के साथ जांच शुरू करते हैं. कुछ देर की सावधानी और सही इलाज के बाद वही मरीज सामान्य रूप से आंखें झपकाते हुए बाहर निकलता है.
डॉ. आशुतोष ने आंखों की जांच और इलाज को अपना पेशा बनाया है. वह नियमित नेत्र परीक्षण करते हैं. चश्मे का नंबर तय करते हैं. मोतियाबिंद जैसे रोगों की पहचान करते हैं. जरूरत पड़ने पर सर्जरी की योजना भी बनाते हैं. उनका कहना है कि आंखों की समस्या उम्र नहीं देखती. जन्म से भी हो सकती है और चोट के बाद भी.
डॉ. आशुतोष के मन में डॉक्टर बनने की इच्छा बचपन से थी. घर का माहौल प्रेरणा देता था. स्कूल के बाद उन्होंने ऑप्टोमेट्री की पढ़ाई शुरू की. फिर डिप्लोमा किया. उसके बाद स्नातक और फिर परास्नातक की पढ़ाई पूरी की. आज भी वह आगे की पढ़ाई जारी रखे हुए हैं.
उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि मरीज की राहत है. वह कहते हैं, “मरीज बंद आंखों के साथ आते हैं, और हम उन्हें खुली आंखों के साथ भेजते हैं.” आंखों का इलाज धैर्य मांगता है. कई बार मरीज डरते हैं. लेकिन सही जांच और समझाइश से भरोसा बनता है.
पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. आशुतोष ने दिल्ली में एक अस्पताल में काम किया. वहां अनुभव मिला. रोज अलग अलग केस देखने को मिले. लेकिन मन में था कि अपने शहर में अपना केंद्र शुरू किया जाए.
2018 में उन्होंने नैनी में अपनी क्लिनिक शुरू की. शुरुआत में सब कुछ खुद संभाला. धीरे धीरे मरीज बढ़े. आज क्लिनिक में पांच से सात कर्मचारी काम करते हैं. रोजाना जांच, फॉलोअप और सर्जरी की तैयारी का काम चलता है. जब जरूरत होती है तो सर्जन भी आते हैं.
समय के साथ एक समस्या सामने आई. जिन मरीजों को मोतियाबिंद सर्जरी की जरूरत होती थी, उन्हें बाहर भेजना पड़ता था. इससे समय और असुविधा दोनों बढ़ते थे. डॉ. आशुतोष चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा सुविधा स्थानीय स्तर पर मिले.
इसी सोच के साथ उन्होंने यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत लोन के लिए आवेदन किया. इस आर्थिक सहायता से उन्होंने जरूरी मशीनें खरीदीं जो सर्जरी से पहले जांच और प्रक्रियाओं के लिए जरूरी थीं.
वह बताते हैं कि बैंक और कागजी प्रक्रिया में समय लगा. लेकिन अधिकारियों ने मार्गदर्शन किया. अब कई जांचें और तैयारी क्लिनिक में ही हो जाती हैं. मरीजों को बार बार बाहर नहीं जाना पड़ता.
आज डॉ. आशुतोष की क्लिनिक में एक नियमित दिनचर्या है. मरीज आते हैं. जांच होती है. इलाज तय होता है. कर्मचारी काम संभालते हैं. यह बदलाव अचानक नहीं आया. यह कई छोटे फैसलों का परिणाम है.
डॉ. आशुतोष मानते हैं कि सफर अभी जारी है. लेकिन अब अनिश्चितता कम है. मरीज लौटकर आते हैं. भरोसा बढ़ता है. रोजगार भी बना है.
नैनी की इस क्लिनिक में हर दिन रोशनी लौटती है. यह कहानी दिखाती है कि अगर इरादा साफ हो और लगातार मेहनत की जाए, तो एक छोटे शहर में भी स्वास्थ्य सेवा का मजबूत आधार बनाया जा सकता है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
CM YUVA योजना की अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
Edited by Ravi Pareek



