पिता को खोया तो जिंदगी के मायने तलाशने लगीं, आज लोगों को उम्मीद दे रही हैं डॉ. प्रिया कौल
पिता के निधन के बाद जिंदगी, मृत्यु और अस्तित्व के सवालों ने डॉ. प्रिया कौल को आध्यात्मिकता की राह दिखाई. जानिए कैसे कंप्यूटर साइंस से Spiritual Life Coach बनने तक का उनका सफर शुरू हुआ और कैसे उन्होंने holistic healing को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया.
कभी-कभी जिंदगी में कोई ऐसा हादसा होता है, जो सिर्फ हमें दुखी नहीं करता, बल्कि हमें जिंदगी को नए सिरे से समझने के लिए मजबूर कर देता है. किसी अपने की मौत भी ऐसा ही एक मोड़ हो सकती है. रिश्ते की कमी के साथ कई ऐसे सवाल पीछे रह जाते हैं, जिनका जवाब आसान नहीं होता. जीवन क्या है? मृत्यु के बाद क्या बचता है? और क्या किसी करीबी को खोने के बाद उसके साथ हमारा रिश्ता किसी और रूप में जारी रह सकता है?
डॉ. प्रिया कौल की कहानी भी ऐसे ही सवालों से शुरू होती है. 2011 में पिता के निधन के बाद कंप्यूटर साइंस और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर चुकीं प्रिया का ध्यान जीवन के उन पहलुओं की ओर गया, जिनके बारे में उन्होंने पहले शायद कभी इस तरह नहीं सोचा था. जवाब तलाशने की इसी कोशिश ने उन्हें आध्यात्मिकता, Mediumship, रेकी और दूसरी healing practices के अध्ययन तक पहुंचाया.
आज डॉ. प्रिया Spiritual Life Coach और Hope Creator के तौर पर लोगों के साथ काम करती हैं. हालांकि, उनकी कहानी को केवल आध्यात्मिकता की ओर मुड़ने की कहानी कहना अधूरा होगा. यह उस निजी संघर्ष और आत्म-खोज की कहानी भी है, जिसमें एक बेटी ने पिता को खोने के बाद अपने भीतर उठे सवालों का सामना किया और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी की नई दिशा तलाशने की कोशिश की.
यह सफर 2011 से शुरू हुआ, लेकिन इसके जवाब आज भी उनके लिए एक जारी तलाश हैं.
पिता के निधन के बाद शुरू हुई तलाश
पिता के गुजर जाने के बाद प्रिया के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि मृत्यु के बाद क्या होता है. क्या किसी प्रिय व्यक्ति से दोबारा जुड़ना संभव है?
इसी तलाश के दौरान उन्होंने Mediumship सीखी. अपने मेंटर के मार्गदर्शन में उन्होंने स्पिरिट कम्युनिकेशन का अनुभव किया. डॉ. प्रिया के मुताबिक, एक ऐसे अनुभव में उनकी मां को मिले कुछ जवाब उनके लिए अर्थपूर्ण थे. हालांकि, इस तरह के अनुभवों को वैज्ञानिक तथ्य के बजाय उनके निजी आध्यात्मिक अनुभव और विश्वास के रूप में देखना जरूरी है.
डॉ. प्रिया कहती हैं कि लोगों की भावनाओं और अंतर्ज्ञान को समझने में उनकी बचपन से दिलचस्पी रही है. बाद में उन्होंने इसी रुचि को अपनी आध्यात्मिक यात्रा से जोड़कर देखा.
YourStory से बात करते हुए डॉ. प्रिया कौल कहती हैं, “मैंने कभी तय नहीं किया था कि आध्यात्मिकता को अपना करियर बनाना है. मुझे लगता है कि आध्यात्मिकता ने मुझे चुना. पिता के जाने के बाद मेरे भीतर जो सवाल पैदा हुए, उन्होंने मुझे इस रास्ते पर आगे बढ़ाया.”

Spiritual Life Coach और Hope Creator डॉ. प्रिया कौल
संघर्ष से बदली ज़िंदगी
2011 से 2015 के बीच प्रिया ने अपने जीवन के कई पहलुओं पर काम किया. परिवार आर्थिक और भावनात्मक मुश्किलों से गुजर रहा था और कर्ज तथा भविष्य की अनिश्चितता भी उनके सामने थी.
उन्होंने आध्यात्मिक अभ्यास और अलग-अलग हीलिंग तकनीकों के जरिए खुद पर काम करना शुरू किया. जब उन्हें अपने जीवन में बदलाव महसूस हुआ, तो उन्होंने कुछ करीबी दोस्तों की मदद करनी शुरू की. दोस्तों के अनुभवों और रेफरल से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और धीरे-धीरे यही काम उनके पेशेवर सफर का हिस्सा बन गया.
डॉ. प्रिया बताती हैं, “मेरी पहली बड़ी सफलता किसी दूसरे व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि मेरी अपनी जिंदगी थी. मुश्किल दौर में मैंने खुद को संभालना सीखा. जब बदलाव दिखने लगा, तो दोस्तों की मदद करनी शुरू की. तब मुझे लगा कि अपने अनुभवों के जरिए दूसरे लोगों को भी रास्ता दिखाने की कोशिश की जा सकती है.”
सोशल मीडिया बना लोगों से जुड़ने का माध्यम
डॉ. प्रिया ने Empowerment of Holistic Energy की शुरुआत आध्यात्मिक ज्ञान और holistic well-being से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की. 2016 में उन्होंने Facebook Live सत्र शुरू किए, जिनमें वह आध्यात्मिक मार्गदर्शन और हीलिंग से जुड़े विषयों पर बात करती थीं.
धीरे-धीरे इन सत्रों के जरिए लोगों का एक समुदाय बना और वर्ड ऑफ माउथ से उनका काम भारत के बाहर भी लोगों तक पहुंचने लगा.
डॉ. प्रिया के अनुसार, उनका उद्देश्य लोगों को अपने ऊपर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें अपने अनुभवों और भावनाओं को समझने के लिए जागरूक करना है.
यह बात आज के मानसिक स्वास्थ्य परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का बोझ काफी बड़ा है. WHO के भारत संबंधी आंकड़ों में मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान का अनुमान 2012 से 2030 के बीच करीब 1.03 ट्रिलियन डॉलर लगाया गया है.
युवाओं के संदर्भ में भी तस्वीर चुनौतीपूर्ण है. UNICEF India के अनुसार, 18 से 29 वर्ष के 7.3% युवा overall mental morbidity का सामना करते हैं। UNICEF के मुताबिक, भारत में करीब 10.6% आबादी किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का अनुभव करती है. UNICEF India की इस रिपोर्ट में NCERT के 2022 के सर्वे का भी उल्लेख किया गया है. इसके अनुसार, 11% छात्रों ने चिंता (Anxiety) और 14% छात्रों ने अत्यधिक भावनात्मक तनाव (Extreme Emotions) महसूस करने की बात कही थी.
संगठन यह भी रेखांकित करता है कि आर्थिक कठिनाइयां, कलंक और मदद लेने में झिझक मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंच को प्रभावित करते हैं.

पैसा, रिश्ते और मन की शांति
डॉ. प्रिया के पास आने वाले लोगों की चिंताओं में आर्थिक तनाव, रिश्तों की उलझन, करियर और मानसिक शांति जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. उनके मुताबिक, अधिक कमाने वाले लोगों के बीच भी पैसे, परिवार और भविष्य को लेकर चिंता बनी रह सकती है.
उनका मानना है कि आध्यात्मिकता को केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए. ध्यान, माइंडफुलनेस और आत्मचिंतन जैसे अभ्यासों के जरिए लोग अपने विचारों और भावनाओं को समझने की कोशिश कर सकते हैं.
हालांकि, आध्यात्मिक या alternative healing practices को मानसिक स्वास्थ्य उपचार का विकल्प मानना उचित नहीं है. गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना जरूरी है. WHO भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण देखभाल की जरूरत पर लगातार जोर देता है.
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. WHO की 2025 की World Mental Health Today रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 1 अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के साथ जी रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती.
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों, प्रशिक्षित कार्यबल और गुणवत्तापूर्ण देखभाल की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है.
युवाओं के लिए संदेश
डॉ. प्रिया के मुताबिक, आज की युवा पीढ़ी सफलता को केवल नौकरी, पैसा या पद के नजरिए से नहीं देख रही. मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और जीवन के उद्देश्य जैसे सवाल भी उनके लिए महत्वपूर्ण हो रहे हैं.
आगे वह प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वर्कशॉप और ऑनलाइन लर्निंग के जरिए अपने काम को विस्तार देना चाहती हैं. उनका लक्ष्य ऐसे लोगों का समुदाय तैयार करना है, जो इस क्षेत्र में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करें.
डॉ. प्रिया कहती हैं, “डर को अपनी जिंदगी का फैसला मत करने दीजिए. जरूरी नहीं कि सफलता तुरंत मिले. जरूरी यह है कि आपका उद्देश्य साफ हो और आप सीखते हुए आगे बढ़ते रहें.”
डॉ. प्रिया कौल की कहानी एक निजी नुकसान से शुरू हुई उस तलाश की कहानी है, जिसमें उन्होंने जीवन, मृत्यु और अपने अस्तित्व को समझने की कोशिश की. पिता के देहांत ने उनके सामने कई सवाल खड़े किए. उन सवालों के जवाब तलाशते हुए उन्होंने आध्यात्मिकता को अपना रास्ता बनाया और बाद में अपने अनुभवों के जरिए दूसरे लोगों के साथ काम करना शुरू किया.
उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद यही है कि एक निजी त्रासदी ने उन्हें अपनी जिंदगी को नए सिरे से देखने के लिए मजबूर किया. आगे उस तलाश ने उन्हें क्या दिया, यह हर व्यक्ति अपने नजरिए से देख सकता है. लेकिन डॉ. प्रिया के लिए यह सफर आज भी खुद को समझने और दूसरों को उम्मीद देने की कोशिश बना हुआ है.



