मेडिकल एजुकेशन को नया मुकाम दे रहीं हैं डॉ. वैशाली भारंबे
डॉ. वैशाली भारंबे, एनाटॉमी की दिग्गज, छात्रों के डिजिटल सीखने की दुनिया में क्रांति ला रही हैं. यूट्यूब चैनल VB Anatomy Academy से वह मेडिकल शिक्षा को सरल, प्रेरक और आसान बना रही हैं. जानिए उनके जीवन, संघर्ष और अंग दान के योगदान की कहानी.
डॉ. वैशाली भारंबे (Dr Vaishaly Bharambe) का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ अनुशासन और समर्पण गहराई तक रचा-बसा था. उनके पिता भारतीय वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर थे. उनका बचपन लगातार बदलावों के बीच बीता. हर कुछ साल में घर बदलना, नए शहर में जाना, नए स्कूल और दोस्त बनाना उनकी जिंदगी का हिस्सा था.
इस अनिश्चितता के बीच भी उनके माता-पिता ने उन्हें स्थिरता और सच्चाई की अहमियत सिखाई. उनकी मां संगीतकार थीं. रोज सुबह जल्दी उठकर रियाज़ करना, अपनी कड़ी मेहनत से हर प्रस्तुति की तैयारी करना और हर कॉन्सर्ट में पिताजी के अलावा किसी को भी तनपुरा न उठाने देना—ये छोटी-छोटी बातें वैशाली के व्यक्तित्व में अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता का बीज बन गईं.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, डॉ. वैशाली बताती हैं कि उनके माता-पिता ने उन्हें समानता, परवाह और व्यक्तिगत उत्कृष्टता की शिक्षा दी. उनके लिए परिवार और शिक्षा सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन को खूबसूरत बनाने का तरीका था. यही बचपन की कहानियाँ उन्हें आज भी प्रेरित करती हैं.
मेडिकल एजुकेशन का सफर और एनाटॉमी की राह
वैशाली का झुकाव बचपन से ही चिकित्सा की ओर था. लेकिन उनके लिए हीलिंग केवल दवा देना नहीं था. किसी के दुख को सुनना, सही सलाह देना और कठिन समय में उनके साथ खड़ा होना भी उनके लिए हीलिंग का हिस्सा था. यही गुण उन्हें मेडिसिन की दुनिया में खींच लाया.
जब उनके बच्चे छोटे थे और वे पुणे में बस गई थीं, तब उन्होंने एनाटॉमी (anatomy) पढ़ाने का काम लिया. छात्रों को विषय सरल और स्पष्ट तरीके से समझाने के लिए उन्होंने लंबे घंटे पढ़ाई की. जल्दी ही उन्होंने महसूस किया कि उन्हें एनाटॉमी पढ़ाने में असाधारण क्षमता है और छात्रों को यह पसंद आ रहा है. इसी क्षण उन्होंने तय किया कि एनाटॉमी ही उनका पेशा और जीवन का मिशन होगा.
वैशाली अपने शिक्षकों की बहुत आभारी हैं. उनके पहले एनाटॉमी विभाग प्रमुख, डॉ. अरुणा मुखर्जी, छोटे कद की लेकिन बड़े हृदय वाली थीं. वे विषय में निपुण थीं और छात्रों तथा जूनियर फैकल्टी के लिए सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करती थीं.
इसके बाद डॉ. वात्सलास्वामी, डॉ. वसंती अरोले और डॉ. दुबशी जैसे शिक्षक आए, जिन्होंने उन्हें विशेषज्ञता, सरलता और संक्षिप्तता का महत्व सिखाया. उनकी पीएचडी गाइड, डॉ. पुरुषोत्तम मंविकार ने उन्हें डेटा को संक्षेप में प्रस्तुत करने और सार्थक निष्कर्ष निकालने की कला सिखाई. इन गुरुओं ने वैशाली को शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया.
VB Anatomy Academy की शुरुआत
आज के मेडिकल छात्र स्मार्टफोन और डिजिटल दुनिया की मौजूदगी में पढ़ाई कर रहे हैं. यह वातावरण उनके ध्यान को बांधता है. डिजिटल संसाधनों ने शिक्षा को आसान बनाया है, लेकिन वहीं यह छात्रों के लिए चुनौती भी बन गया है.
वैशाली ने देखा कि छात्रों के मन पर फोन और डिजिटल दुनिया का प्रभुत्व बढ़ रहा है. इसका हल उन्होंने खुद खोजा.
2023 में उन्होंने VB Anatomy Academy यूट्यूब चैनल लॉन्च किया. उनका उद्देश्य है कि छात्र डिजिटल माध्यम में भी उत्कृष्टता के साथ सीख सकें. वे कहती हैं कि छात्रों के लिए डिजिटल माध्यम ही प्राथमिक सीखने का स्थान है. अब छात्र लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर बिताते हैं, और वही जगह उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करती है.
उनका मंत्र है “जहाँ छात्र है, मैं वहीं हूँ.” अब छात्र जहां भी डिजिटल माध्यम में हों, वैशाली उनके साथ वहां मौजूद हैं.
कॉलेजों में पढ़ाई के दौरान फोन के उपयोग को सीमित करना भी एक उपाय हो सकता है. इससे छात्रों को ध्यान केंद्रित करने और सहपाठियों के साथ जुड़ने का मौका मिलता है.

डॉ. वैशाली भारंबे ने 2023 में VB Anatomy Academy यूट्यूब चैनल लॉन्च किया.
55 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित
डॉ. भारंबे ने 55 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं. उनके दो शोध कार्य विशेष महत्व रखते हैं.
पहला, अंग दान पर उनका काम, जो भारत में लोगों के सकारात्मक दृष्टिकोण और जागरूकता की कमी को उजागर करता है. उन्होंने दिखाया कि अधिकतर लोग अंग दान को सकारात्मक मानते हैं, पर प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं रखते.
दूसरा, मानव हाथ की संरचना और उसकी कार्यात्मक भूमिका पर उनका अध्ययन, जिसने एनाटॉमी और मानवविज्ञान के बीच एक पुल बनाया. यह शोध यह याद दिलाता है कि भविष्य को समझने के लिए हमें अपने विकास और मूल इतिहास को समझना होगा.
टेक्नोलॉजी और फ्यूचर ऑफ एजुकेशन
डॉ. भारंबे DeftXR नामक हेल्थ-टेक स्टार्टअप से भी जुड़ी हैं. उन्होंने 3D मानव मॉडल बनाने में परामर्श दिया. उनका मानना है कि मेडिकल शिक्षा का भविष्य तकनीक पर निर्भर करेगा. वीडियो, वर्चुअल सीनारियो और डिजिटल साधनों का उपयोग छात्रों के सीखने के अनुभव को और बेहतर बनाएगा.
साथ ही, उन्होंने कहा कि अब छात्रों को अपने अध्ययन का जिम्मा खुद उठाना होगा. यह स्वतंत्रता उन्हें रचनात्मक और जिम्मेदार बनाएगी. लेकिन चुनौती यह है कि मूल पाठ्यक्रम का समुचित अध्ययन हो.
अंग और शरीर दान का संदेश
अंग और शरीर दान की दिशा में उनकी प्रेरणा व्यक्तिगत कहानियों से आई. कई बार मरीजों की मौत हो जाती थी, जबकि अंग दान उन्हें जीवन दे सकता था. डॉ. भारंबे ने इसे बदलने की ठानी और अपने शोध के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई.
वे कहती हैं कि अंग दान से आप 8 जीवन बचा सकते हैं और 50 से अधिक व्यक्तियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं. शरीर दान से कई डॉक्टर प्रशिक्षित हो सकते हैं, जो बाद में अनगिनत प्रक्रियाएं और सर्जरी कर सकते हैं.
डॉ. भारंबे के लिए सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा की बदलती दुनिया थी. डिजिटल युग ने छात्रों के ध्यान को अलग दिशा में मोड़ दिया. उन्होंने खुद को डिजिटल माध्यम में प्रशिक्षित किया और वहां जाकर शिक्षा देने की पहल की.
साथ ही, उन्होंने कामकाजी महिलाओं की मुश्किलों को भी स्वीकार किया. उनका मानना है कि कोई महिला सुपरवुमन नहीं बन सकती. सबसे जरूरी है कि महिला खुश, स्वस्थ और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाली हो.
डॉ. भारंबे का छात्रों के लिए संदेश सरल है. हर छात्र में कोई न कोई विशेष योग्यता है. उसे पहचानें, विकसित करें और पूरे जुनून के साथ आगे बढ़ें. प्रतिबद्धता, उत्कृष्टता और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी हैं. वे मानती हैं कि भारतीय मेडिकल शिक्षा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. डिजिटल दुनिया छात्रों तक आसानी से पहुंचने का माध्यम बन रही है. उनका लक्ष्य है कि छात्रों को उच्चतम मानक की एनाटॉमी शिक्षा दी जाए.
डॉ. भारंबे डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का उदाहरण बनकर छात्रों के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं. उनका उद्देश्य है कि भारतीय डॉक्टरों की विश्वसनीयता और उत्कृष्टता को पुनः स्थापित किया जाए.



