बैन की खबर से लोन देने वाले ऐप्स के बीच अफरातफरी, मामले पर बात के लिए सरकार के पास पहुंच रहे फाउंडर

सोमवार को इकनॉमिक टाइम्स ने खबर दी कि इन नामों में PayU’ का LazyPay और किस्त जैसे ऐप को बैन किया गया है. PayU’s का मालिकाना हक साउथ अफ्रीका की इंटरनेट कंपनी नैस्पर्स के पास है. वहीं, मुंबई में किस्त के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी में किसी भी चाइनीज इनवेस्टर का पैसा नहीं लगा है.

Pratik Bhakta

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बैन की खबर से लोन देने वाले ऐप्स के बीच अफरातफरी, मामले पर बात के लिए सरकार के पास पहुंच रहे फाउंडर

Tuesday February 07, 2023,

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सरकार ने रविवार को चीन या अन्य देशों के साथ लिंक वाले लेंडिंग ऐप्स समेत बेटिंग, गैम्बलिंग ऐप्स को बैन करने का काम शुरू कर दिया है. इस खबर के बाद से फिनटेक लेंडिंग इंडस्ट्री में घबराहट का माहौल है.

एक अर्ली-स्टेज इनवेस्टर ने चिंता जताते हुए कहा कि इस कदम से स्टार्टअप ईकोसिस्टम को धक्का लग सकता है और फाउंडर्स का कॉन्फिडेंस भी कमजोर पड़ सकता है.

खबर है कि इन ऐप्स में कई बड़े ऐप्स का भी नाम शामिल है. इस खबर के बाद से कई बड़े फिनटेक ऐप्स के फाउंडर्स मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के अधिकारियों से मिलने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं.

आपको बता दें कि मंत्रालय ने जिन ऐप्स को बैन करने का काम शुरू करने का आदेश दिया है उनमें से 138 बेटिंग ऐप हैं और 94 लेंडिंग ऐप हैं.

सोमवार को इकनॉमिक टाइम्स ने खबर दी कि इन नामों में PayU’ का LazyPay और किश्त जैसे ऐप को बैन किया गया है. PayU’s का मालिकाना हक साउथ अफ्रीका की इंटरनेट कंपनी नैस्पर्स के पास है. वहीं, मुंबई में किस्त के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी में किसी भी चाइनीज इनवेस्टर का पैसा नहीं लगा है.  

प्रवक्ता ने बताया, ''हमें पता चला है कि गूगल को कई कंपनियों को प्ले स्टोर से हटाने को कहा गया है. इनमें हमारा ऐप भी शामिल है लेकिन हमें आखिर ऐसा किस वजह से किया गया है इसकी वजह अभी तक नहीं पता चल पाई है.

हम इस बारे में मंगलवार को अधिकारियों से मिलकर स्पष्टीकरण लेंगे क्योंकि किस्त में कोई भी स्टेकहोल्डर चाइनीज नहीं है.”

इधर लेडिंग और बेटिंग ऐप्स के सेगमेंट में किन ऐप्स को बैन किया गया है इसके बारे में अभी तक कोई नाम सामने नहीं आए हैं लेकिन इन्हें बैन करने की भी कई वजहें सामने आ रही हैं.

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक गृह मंत्रालय को पिछले पांच सालों में ऑनलाइन गैम्बलिंग या बेटिंग के खिलाफ हर पांच घंटे में एक शिकायत मिली है. 2018 से लेकर 2022 तक सरकार को लगभग 8,000 शिकायतें मिलीं.

इन शिकायतों के बाद सरकार ने जांच शुरू की जिसमें कई दिलचस्प जानकारियां सामने निकलकर आईं. सरकार ने पाया कि इनमें से ऑफशोर यानी बाहरी देशों से चलने वाले बेटिंग/गैम्बलिंग ऐप्स डिजिटल मीडिया पर खुद का प्रचार करने के लिए न्यूज वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इन न्यूज वेबसाइट के लोगो भी बेटिंग प्लैटफॉर्म्स के लोगो से मिलते जुलते हैं. सबसे बड़ी बात ना ही इन बेटिंग प्लैटफॉर्म्स ने और ना ही इन न्यूज वेबसाइट्स ने सरकार के पार रजिस्ट्रेशन कराया है. ये डिजिटल प्लैटफॉर्म न्यूज के रूप में अपने ही ऐप का प्रमोशन कर रहे हैं.

इनमें से ज्यादातर ऐप्स बैंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई के हैं. कुछ तो अमेरिका और नाइजीरिया के हैं. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने चार पैरामीटर्स के आधार पर इनका आंकलन किया हैः ट्रैफिक, कम्यूनिकेशन नेटवर्क एनालिसिस, कंटेंट एनालिसिस और OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) डेटा.

इतना ही नहीं इन ऐप्स को ज्यादातर विदेशी लोगों ने रिव्यू दिया था जो फर्जी पाए गए. ऐप्स के पास कस्टमर्स के कई जरूरी डेटा की परमिशन भी थी, जिनका गलत इस्तेमाल किए जाने की संभावना थी. बेटिंग और गैम्बलिंग ऐप्स को बैन करने के पीछे इन जानकारियों को भी वजह माना गया है.


Edited by Upasana