FUEL: एक आइडिया, लाखों सपने, और बदलती हुई भारत की तस्वीर
महाराष्ट्र के एक छोटे से कस्बे लातूर से निकला एक सपना आज लाखों युवाओं की जिंदगी बदल रहा है. डॉ केतन देशपांडे की अगुवाई में FUEL ने शिक्षा को रोजगार से जोड़कर उन बच्चों को रास्ता दिया, जिन्हें कभी मौका ही नहीं मिला था.
भारत के हजारों गांवों और छोटे कस्बों में हर दिन लाखों सपने जन्म लेते हैं. लेकिन इन सपनों की सबसे बड़ी मुश्किल यह होती है कि उन्हें सही दिशा नहीं मिलती. कई बार हालात ऐसे होते हैं कि हुनर होते हुए भी बच्चे आगे नहीं बढ़ पाते. न सही मार्गदर्शन मिलता है और न ही सही अवसर.
महाराष्ट्र के लातूर में जन्मे डॉ केतन देशपांडे (Dr Ketan Deshpande) ने इस हकीकत को बहुत करीब से महसूस किया. उन्होंने देखा कि उनके आसपास के कई बच्चे बेहद होशियार थे. उनमें कुछ कर गुजरने की चाह थी. लेकिन उनके पास न जानकारी थी, न दिशा, और न ही कोई ऐसा व्यक्ति जो उन्हें रास्ता दिखा सके.
यही अनुभव उनके अंदर एक बेचैनी पैदा करता रहा. उन्होंने Sociology (समाज शास्त्र) में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद Symbiosis International University से MBA किया. फिर CSR (corporate social responsibility) में PhD की. Cambridge University में Visiting Fellow बनने का मौका भी मिला. लेकिन इन सब उपलब्धियों के पीछे एक ही सवाल हमेशा उनके मन में रहा कि आखिर गांव के बच्चे पीछे क्यों रह जाते हैं.
YourStory हिंदी से बात करते हुए FUEL के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. केतन देशपांडे बताते हैं, “मैंने बचपन से एक बात बहुत साफ देखी. टैलेंट किसी एक जगह तक सीमित नहीं होता. गांव के बच्चे भी उतने ही काबिल होते हैं जितने शहरों के. फर्क सिर्फ इतना होता है कि शहरों को मौके मिलते हैं और गांवों को नहीं. यही फर्क जिंदगी बदल देता है. मैंने तय किया कि इस फर्क को खत्म करना है.”
यही सोच आगे चलकर एक बड़े आंदोलन की नींव बनी.
19 साल की उम्र में FUEL का आग़ाज़
जब ज्यादातर युवा अपने करियर के बारे में सोच रहे होते हैं, तब डॉ. केतन देशपांडे ने 19 साल की उम्र में एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने FUEL (Friends Union for Energising Lives) की शुरुआत की.
यह सिर्फ एक NGO नहीं था. यह एक मिशन था. एक ऐसी कोशिश जो हजारों नहीं बल्कि लाखों युवाओं की जिंदगी बदल सकती थी.
उनके जीवन में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का गहरा प्रभाव रहा. उनकी सोच ने केतन देशपांडे के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया.
डॉ देशपांडे बताते हैं, “डॉ कलाम की एक बात ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया. उन्होंने कहा कि अपने लिए सफल होना आसान है, लेकिन असली काम है दूसरों को आगे बढ़ाना. अगर आप ऐसे काम करें जिससे और लोगों के लिए रास्ते खुलें, तभी आपका जीवन सार्थक है. उसी दिन मैंने तय किया कि मुझे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए काम करना है.”
शुरुआत आसान नहीं थी. लोग उन पर भरोसा नहीं करते थे. संसाधन नहीं थे. फंडिंग नहीं थी.
वह आगे बताते हैं, “जब आप बहुत छोटे होते हैं और बड़ा सपना देखते हैं, तो लोग आपको गंभीरता से नहीं लेते. हमें हर दिन खुद को साबित करना पड़ा. कई बार निराशा भी हुई. लेकिन हर बार यही लगा कि अगर हम नहीं करेंगे, तो कौन करेगा.”
धीरे-धीरे उनके काम ने असर दिखाना शुरू किया.

FUEL ने NSE के Social Stock Exchange पर लिस्ट होकर शिक्षा और स्किलिंग के क्षेत्र में नया कदम उठाया है.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
FUEL का शुरुआती दौर संघर्षों से भरा था. सबसे बड़ी चुनौती थी विश्वास बनाना. कंपनियों और संस्थानों को समझाना आसान नहीं था कि एक युवा की पहल पर भरोसा किया जाए.
फंडिंग जुटाना भी बहुत मुश्किल था. उस समय CSR इतना प्रचलित नहीं था.
गांवों और दूरदराज के इलाकों में काम करना एक अलग चुनौती थी. इंटरनेट की कमी थी. जागरूकता कम थी. कई परिवार शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते थे.
डॉ देशपांडे कहते हैं, “सबसे बड़ी लड़ाई संसाधनों की नहीं थी, सोच की थी. हमें लोगों को यह समझाना था कि शिक्षा सिर्फ पढ़ाई नहीं है, बल्कि भविष्य बनाने का रास्ता है. छात्रों में आत्मविश्वास जगाना सबसे जरूरी था. जब तक वह खुद पर विश्वास नहीं करेंगे, तब तक कोई बदलाव संभव नहीं है.”
इन चुनौतियों के बावजूद FUEL ने हार नहीं मानी. धीरे धीरे एक मजबूत मॉडल तैयार हुआ.
आज FUEL ने 10 लाख से ज्यादा युवाओं तक पहुंच बनाई है. लगभग 3 लाख छात्रों को स्किल ट्रेनिंग दी है. हजारों छात्रों को स्कॉलरशिप मिली है.
कई बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी हुई है.
डॉ देशपांडे बताते हैं, “हमने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि हमारा काम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे. हर कार्यक्रम का असर जमीन पर दिखे. हमारा फोकस हमेशा परिणाम पर रहा है.”
FUEL का असर और नई सोच
FUEL की सबसे बड़ी खासियत इसका एंड-टू-एंड मॉडल है. यह सिर्फ छात्रों को गाइड नहीं करता, बल्कि उन्हें रोजगार तक पहुंचाता है.
AI, Data Analytics, BFSI (Banking, Financial Services, and Insurance,) और IT जैसे क्षेत्रों में छात्रों को ट्रेन किया जाता है. इससे वे सीधे नौकरी के लिए तैयार होते हैं.
डॉ केतन देशपांडे कहते हैं, “हम शिक्षा को नौकरी से जोड़ते हैं. अगर छात्र पढ़ाई के बाद रोजगार नहीं पा रहा, तो वह सिस्टम अधूरा है. हमारा लक्ष्य है कि हर छात्र आत्मनिर्भर बने और अपने परिवार को आगे बढ़ाए.”
इसी सोच से “10 People 1 Degree” पहल शुरू हुई. इसमें 10 लोग मिलकर एक छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं. यह पहल समाज को जोड़ती है और जिम्मेदारी का एहसास कराती है.
Social Stock Exchange से नई उड़ान
FUEL का NSE Social Stock Exchange पर लिस्ट होना एक ऐतिहासिक कदम है. यह न सिर्फ संगठन के लिए बल्कि पूरे सामाजिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है.
अब समाज सेवा को एक संरचित और जवाबदेह स्वरूप मिल गया है.
डॉ देशपांडे कहते हैं, “Social Stock Exchange एक नया अध्याय है. अब लोग सीधे सामाजिक बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं. यह सिर्फ दान नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी के साथ किया गया निवेश है, जिसका असर साफ दिखाई देता है.”
इससे फंडिंग के नए रास्ते खुलेंगे. ज्यादा छात्रों तक पहुंच बन सकेगी. खासतौर पर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए यह एक बड़ा मौका है.

महिलाओं और गांव के युवाओं पर खास ध्यान
FUEL का एक महत्वपूर्ण फोकस महिलाओं पर है. लड़कियों को शिक्षा, स्किल और रोजगार के अवसर दिए जाते हैं.
डॉ केतन देशपांडे कहते हैं, “जब एक लड़की आगे बढ़ती है, तो सिर्फ उसकी जिंदगी नहीं बदलती. पूरा परिवार और समाज बदलता है. इसलिए महिलाओं को सशक्त बनाना हमारे काम का केंद्र है.”
उन्हें डिजिटल स्किल सिखाई जाती है. उद्यमिता के लिए तैयार किया जाता है.
भविष्य की राह
आने वाले समय में FUEL का लक्ष्य और बड़ा है. FUEL SkillTech University की योजना पर काम चल रहा है. इसमें अलग अलग स्कूल होंगे जो उद्योग से जुड़े होंगे. यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक सीख पर विशेष जोर दिया जाएगा.
डॉ केतन देशपांडे बताते हैं, “हम एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं जहां छात्र सिर्फ डिग्री लेकर न निकले, बल्कि पूरी तरह तैयार होकर निकले. उसे पता हो कि उसे क्या करना है और कैसे करना है.”
उनका लक्ष्य है एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना जो छात्र को शुरुआत से लेकर रोजगार और उद्यमिता तक साथ ले जाए.
अंत में डॉ. केतन देशपांडे कहते हैं, “सफलता का असली मतलब यह नहीं है कि आप कितनी ऊंचाई तक पहुंचे. असली सफलता यह है कि आप कितने लोगों को साथ लेकर आगे बढ़े. अगर आपके काम से किसी और की जिंदगी बेहतर होती है, तो वही सबसे बड़ी उपलब्धि है.”
यही सोच FUEL को खास बनाती है. और यही सोच भारत के भविष्य को नई दिशा देती है.



