Ghantewala से Haldiram तक — ये ब्रांड बना रहे हैं फिटनेस-फ्रेंडली मिठाइयाँ
भारतीय मिठाइयाँ अब हेल्दी अवतार में! मशहूर ब्रांड्स बना रहे हैं Zero-Sugar रसगुल्ला, मिलेट लड्डू और ग्लूटेन-फ्री बर्फी. अब मिठाई का मज़ा guilt-free, बिना डायबिटीज और बिना वजन बढ़ाए. जानिए कौन से ब्रांड बदल रहे हैं मिठाई की दुनिया.
पीढ़ियों से भारतीय मिठाइयाँ खुशियों, त्योहारों और यादों का हिस्सा रही हैं. लेकिन इनके साथ हमेशा एक बोझ जुड़ा रहा है — ज्यादा चीनी, घी और खाली कैलोरी. आज के समय में जब स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ रही है और डायबिटीज जैसी बीमारियाँ आम हो गई हैं, तो मिठाई उद्योग में चुपचाप एक क्रांति हो रही है.
अब परंपरागत मिठाइयों को नए और हेल्दी रूप में पेश किया जा रहा है. इसमें चीनी की जगह गुड़, खजूर, स्टीविया जैसे नेचुरल स्वीटनर इस्तेमाल हो रहे हैं. साथ ही मिलेट्स (रागी, ज्वार), मेवे और न्यूट्रिशन से भरपूर सामग्री का इस्तेमाल बढ़ रहा है. नतीजा है — बिना अपराधबोध के मिठाई खाने का मज़ा. आज बाजार में जीरो-शुगर रसगुल्ला, मिलेट लड्डू, ग्लूटेन-फ्री बर्फी जैसी इनोवेटिव मिठाइयाँ मिल रही हैं. इनमें स्वाद और सेहत का संतुलन है.
कई कंपनियाँ पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक फूड साइंस, इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन और ग्लोबल पैकेजिंग स्टैंडर्ड्स के साथ जोड़ रही हैं. इस तरह वे साबित कर रही हैं कि हेल्थ और इंडल्जेंस (मज़ा) साथ-साथ चल सकते हैं.
Anand Sweets
आनंद स्वीट्स की शुरुआत 1988 में बेंगलुरु में आनंद दयाल दादू ने की थी. यह एक पारिवारिक ब्रांड है जो मिठाइयों और नमकीन के लिए जाना जाता है. कंपनी पारंपरिक मिठाई, ड्राई फ्रूट गिफ्ट बॉक्स, शुगर-फ्री और खजूर से बनी वैरायटी, बकलावा और नमकीन स्नैक्स भी बनाती है.
बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए, आनंद स्वीट्स ने नेचुरल स्वीटनर, ड्राई फ्रूट और रागी व ज्वार जैसे मिलेट्स से बनी मिठाइयाँ लॉन्च की हैं. इसके 15 से ज्यादा रिटेल स्टोर, क्लाउड किचन, रेस्टोरेंट और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म हैं. साथ ही एयरपोर्ट आउटलेट भी हैं. इनके प्रोडक्ट इंटरनेशनल हाइजीन और क्वालिटी स्टैंडर्ड वाले सर्टिफाइड प्लांट्स में बनते हैं.
Haldiram
हल्दीराम की नींव 1937 में बीकानेर में गंगा भीषण अग्रवाल ने रखी थी. आज यह एक मल्टीनेशनल FMCG (Fast-Moving Consumer Goods) और रेस्टोरेंट ब्रांड बन चुका है. इसका "हेल्दी रेंज" खासतौर पर हेल्थ कॉन्शियस ग्राहकों के लिए तैयार किया गया है.
इस रेंज में उड़द दाल से बना मेदू वड़ा, पूरे गेहूँ का आलू-गोभी पराठा, बाजरे की रोटी और प्रोटीन-केल्शियम से भरपूर मटर पनीर जैसे आइटम शामिल हैं. इसमें साबुत अनाज, प्रोटीन-फाइबर वाले इंग्रेडिएंट्स और ऐसे मसाले इस्तेमाल होते हैं जिनमें डाइजेशन और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं. इसमें आर्टिफिशियल प्रिज़र्वेटिव्स बहुत कम होते हैं. साथ ही रेडी-टू-ईट और इंस्टेंट ऑप्शन भी मिलते हैं.

सांकेतिक चित्र (AI generated)
Kanti Sweets
कांती स्वीट्स की शुरुआत 1957 में पंडित ज्योति स्वरूप शर्मा ने बेंगलुरु में की थी. यह एक छोटे स्टॉल से शुरू होकर आज बेंगलुरु और मैसूर में 120 से ज्यादा आउटलेट वाला बड़ा पारिवारिक ब्रांड बन गया है. इसका नाम उनके भाई श्री कांती स्वरूप शर्मा के नाम पर रखा गया. बाद में उनके बेटे राजेंद्र प्रसाद ने इसे आगे बढ़ाया और 2005 में इसे पार्टनरशिप में बदला.
कांती स्वीट्स के पास 350 से ज्यादा वैरायटी की मिठाइयाँ, नमकीन, बेकरी आइटम और स्नैक्स हैं. हाल के वर्षों में इसने हेल्थ-फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाए हैं, जैसे जीरो-शुगर मिठाइयाँ, गुड़ वाली वैरायटी, ग्लूटेन-फ्री और वीगन ऑप्शन. इसके अलावा स्पिरुलिना नुट्रा-चिक्की और नट्स वाले लड्डू भी लॉन्च किए हैं.
यह ब्रांड CFTRI, मैसूर जैसे संस्थानों के साथ मिलकर इनोवेशन करता है और इसके पास NABL-एक्रेडिटेड इन-हाउस लैब भी है.
Healthy Mithai Co.
हेल्दी मिठाई कंपनी की शुरुआत 2021 में मुंबई में प्रभिंदर सिंह और दीपक जैन ने की थी. यह कंपनी खासतौर पर हेल्थ-कॉन्शियस लोगों के लिए भारतीय मिठाइयाँ बनाती है. इसमें चीनी की जगह स्टीविया (ज़ीरो-कैलोरी स्वीटनर) का इस्तेमाल होता है.
इसके प्रोडक्ट कम कैलोरी और लो-ग्लाइसेमिक होते हैं, लेकिन स्वाद और टेक्सचर पारंपरिक मिठाइयों जैसा ही रहता है. सभी प्रोडक्ट प्रिज़र्वेटिव-फ्री होते हैं और सर्टिफाइड यूनिट्स में बनते हैं. कुछ वैरायटी में हाई प्रोटीन और प्रीबायोटिक फाइबर भी होता है. इनके पास जीरो-शुगर रसगुल्ला, गुलाब जामुन, मिल्क-बेस्ड मिठाई, कीटो ड्राई फ्रूट मिठाई, लड्डू और वीगन नारियल बर्फी जैसे ऑप्शन हैं.
Ghantewala Halwai
घंटेवाला हलवाई की शुरुआत 1790 में चांदनी चौक, दिल्ली में लाला सुख लाल जैन ने की थी. यह भारत की सबसे पुरानी मिठाई की दुकानों में से एक है. यह कभी मुग़ल शासकों और बड़े राजनीतिक नेताओं को मिठाई सप्लाई करती थी.
यह दुकान सोहन हलवा के लिए मशहूर हुई. इसके अलावा कराची हलवा, हब्शी हलवा और दालमोठ जैसी मिठाइयाँ भी लोकप्रिय थीं. दुकान में सीजनल और त्योहारों पर 40—50 किस्म की मिठाइयाँ बनती थीं. सब कुछ देसी घी और पारंपरिक तरीकों से तैयार होता था.
2015 में बिक्री घटने और रेगुलेटरी समस्याओं के कारण यह दुकान बंद हो गई. लेकिन 2024 में इसके वंशज सुशांत और आर्यन जैन ने इसे दोबारा शुरू किया. इस बार सेटअप छोटा और मॉडर्न है. अब यह शुगर-फ्री और लो-शुगर मिठाइयाँ, ग्लूटेन-फ्री रागी लड्डू और ड्राई फ्रूट बेस्ड मिठाइयाँ भी पेश कर रही है. ऑनलाइन बिक्री भी शुरू की गई है.
Sukhadia
सुखाड़िया की शुरुआत 1880 में कंबाय (खंभात), गुजरात में हुई थी. यह परिवार-आधारित मिठाई और स्नैक्स का बिज़नेस है, जो अब अमेरिका तक फैल चुका है. इसके आउटलेट न्यू जर्सी, शिकागो और लॉस एंजेलिस में भी हैं.
यह बिज़नेस छह पीढ़ियों से चलता आ रहा है. 1980 और 1990 के दशक में जयंती और पीयूष सुखाड़िया ने इसे अमेरिका में काफी आगे बढ़ाया. यह पारिवारिक रेसिपीज़ को विदेश ले गए.
सुखाड़िया की खासियत है — प्रिज़र्वेटिव-फ्री मिठाइयाँ. बदलते समय को देखते हुए इसने शुगर-फ्री और लो-कैलोरी वैरायटी लॉन्च की हैं. इसमें नेचुरल स्वीटनर जैसे गुड़ का इस्तेमाल होता है. साथ ही मेवे, ओट्स और न्यूट्रिशन से भरपूर सामग्री मिलाई जाती है ताकि हेल्दी और स्वादिष्ट मिठाई बनाई जा सके.
(Translated by: रविकांत पारीक)



