Incuspaze Success Story: कैसे बदला भारत का वर्कस्पेस कल्चर? जानिए को-फाउंडर Sanjay Chatrath से
Incuspaze ने 2016 से भारत के वर्कस्पेस कल्चर को नया रूप दिया है. 18+ शहरों में 50+ लोकेशन के साथ यह स्टार्टअप स्टार्टअप्स, SMEs और बड़ी कंपनियों को लचीले, आधुनिक और टेक-इंटीग्रेटेड ऑफिस सॉल्यूशंस देता है.
भारत में काम करने का तरीका तेज़ी से बदल रहा है. कभी लोग लंबे-लंबे लीज़ कॉन्ट्रैक्ट और भारी-भरकम ऑफिस सेटअप में बंधे रहते थे. आज कंपनियाँ ऐसे वर्कस्पेस चाहती हैं जो तेज़, लचीले और आधुनिक हों. अब वो सिर्फ़ एक कुर्सी-टेबल और चार दीवारों तक सीमित नहीं रहा. वर्कस्पेस आज आइडियाज़, तकनीक, डिज़ाइन और लचीलापन (Flexibility) का संगम बन चुका है. इसी बदलाव की तस्वीर है , जिसने 2016 में शुरुआत की और देखते ही देखते 18+ शहरों में 50 से ज़्यादा लोकेशंस तक पहुँच गया.
इस सफ़र के पीछे हैं इसके को-फ़ाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर संजय चट्राथ (Sanjay Chatrath), जिन्होंने भारत के बदलते ऑफिस कल्चर को बारीकी से समझा और एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म खड़ा किया, जिसने स्टार्टअप्स से लेकर बड़ी कंपनियों तक को लचीला और आधुनिक वर्कस्पेस दिया.
हाल ही में संजय ने YourStory हिंदी से बात करते हुए अपनी यात्रा, रणनीतियाँ और भविष्य की योजनाएँ साझा कीं.
YourStory [YS]: Incuspaze ने 18 से ज़्यादा शहरों में 50 लोकेशंस तक कैसे विस्तार किया? इस ग्रोथ के पीछे क्या वजह रही?
संजय चट्राथ [संजय]: हमने 2016 में शुरुआत की थी. शुरुआत के दिनों में हमारे पास तीन लोकेशन थे. आज हमारे पास पूरे भारत में 50 से ज़्यादा लोकेशंस और करीब 4 मिलियन स्क्वायर फ़ीट का पोर्टफ़ोलियो है.
हमारी ग्रोथ तीन बातों पर टिकी रही. पहला, हर बिज़नेस की ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज़्ड सॉल्यूशंस देना. दूसरा, सिर्फ़ मेट्रो ही नहीं बल्कि टियर-2 शहरों को भी टारगेट करना. और तीसरा, हमारी मज़बूत डिज़ाइन-बिल्ड और ऑन-ग्राउंड टीम जिसने हमें तेज़ी से और लगातार स्केल करने में मदद की.
YS: आपने पिछले साल $8 मिलियन की फंडिंग हासिल की और अब $25 मिलियन जुटाने की योजना है. ये फंडिंग कहाँ इस्तेमाल होगी?
संजय: हम इस फंडिंग का इस्तेमाल तीन बड़े क्षेत्रों में करेंगे. पहला, पोर्टफोलियो विस्तार. दूसरा, टेक्नोलॉजी के अनुभव को बेहतर बनाना. और तीसरा, बाज़ार में अपनी मौजूदगी को और गहराई तक ले जाना.
हम भारत के तेज़ी से बढ़ते बिज़नेस कॉरिडोर में ग्रेड-ए प्रॉपर्टीज़ लीज़ कर रहे हैं. साथ ही हम अपने प्रॉप्राइटरी वर्कस्पेस मैनेजमेंट प्लेटफ़ॉर्म्स, ERP (Enterprise resource planning) सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट बुकिंग इंज़िन और इन-हाउस ऐप्स में निवेश कर रहे हैं.
हाल ही में हमने GCC (Global Capability Centres) वर्टिकल शुरू किया है, जो वैश्विक कंपनियों को भविष्य-तैयार और टेक-इंटीग्रेटेड ऑफिस दिलाने पर फोकस करेगा.
YS: आपने हाल ही में पुणे स्थित TRIOS का अधिग्रहण किया. इसके पीछे क्या सोच थी?
संजय: का अधिग्रहण हमारी रणनीतिक चाल थी. पुणे भारत के सबसे डायनामिक ऑफिस मार्केट्स में से एक है. TRIOS के पास पहले से ऑपरेशनल सेंटर्स और एक मज़बूत क्लाइंट बेस था.
इस अधिग्रहण से हमें पुणे में मज़बूत पकड़ मिली और हमारी एंटरप्राइज ऑफ़रिंग्स भी बढ़ीं. हमने TRIOS के फाउंडर्स को भी अपनी टीम में शामिल किया क्योंकि उनके पास लोकल मार्केट का गहरा अनुभव है.
YS: FlexLeaze क्या है और ये आपकी अन्य सेवाओं को कैसे पूरा करता है?
संजय: FlexLeaze हमारी एक खास पहल है. ये एक एसेट लीज़िंग प्लेटफ़ॉर्म है, जहाँ कंपनियों को लंबी अवधि का ऑफिस सेटअप बिना एसेट ओनरशिप या भारी कैपेक्स खर्च किए मिलता है.
इसमें हमारा "Fitout-as-a-Service" मॉडल है. यानी कंपनियाँ बिना एसेट खरीदे शानदार ऑफिस सेटअप ले सकती हैं. इससे कैश फ्लो बेहतर होता है और कंपनियाँ अपने कैपिटल को ग्रोथ में इस्तेमाल कर सकती हैं.
हम डिज़ाइन-बिल्ड से लेकर टेक्नोलॉजी एसेट्स, वेयरहाउस और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट तक हर चीज़ के लिए लीज़िंग सॉल्यूशन देते हैं. इसमें वेट लीज़, ड्राई लीज़, सेल-एंड-लीज़बैक और रेजिडुअल वैल्यू स्ट्रैटेजीज़ शामिल हैं.
YS: छोटे शहरों में डिमांड कैसी है और Incuspaze खुद को दूसरे वर्कस्पेस प्रोवाइडर्स से कैसे अलग करता है?
संजय: टियर-2, टियर-3 शहरों में डिमांड बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. हाइब्रिड वर्क, टैलेंट की रीवर्स माइग्रेशन और IT-BFSI (Banking, Financial Services, and Insurance) सेक्टर की मौजूदगी ने छोटे शहरों में वर्कस्पेस की डिमांड बढ़ाई है.
कंपनियाँ आज टैलेंट के नज़दीक रहना चाहती हैं. टियर-2 शहरों में वर्कस्पेस सिर्फ़ सस्ता नहीं बल्कि जल्दी सेटअप भी हो जाता है. हमने लखनऊ, कोयंबटूर, कोच्चि, जयपुर और भुवनेश्वर जैसे शहरों में पहले से ही अपनी मौजूदगी बना ली है.
हम एक फुल-स्टैक वर्कस्पेस प्रोवाइडर हैं. हमारे पास डिज़ाइन-बिल्ड से लेकर फाइनेंसिंग और ऑपरेशंस तक सब कुछ है.
हमारा FlexLeaze एसेट लीज़िंग देता है. हमारा GCC वर्टिकल ग्लोबल कंपनियों की ज़रूरतें पूरी करता है. और हमने एक खास C-Suite नेटवर्किंग स्पेस भी लॉन्च किया है — The Bélier.
यानी हम सिर्फ़ वर्कस्पेस नहीं बल्कि पूरे बिज़नेस सफ़र के स्ट्रैटेजिक पार्टनर बनते हैं.
YS: आपको क्यों लगता है कि फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस भविष्य है? टेक्नोलॉजी और डिज़ाइन आपके लिए कितने अहम हैं?
संजय: आज हर कंपनी को लचीलापन चाहिए. चाहे स्टार्टअप हो, SME (Small and medium-sized enterprise) हो या बड़ी कंपनी. सबको ऐसा वर्कस्पेस चाहिए जो एसेट-लाइट हो, जल्दी सेटअप हो और खर्चे कम करे.
फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस यही देता है. हम 60–90 दिनों में रेडी ऑफिस दे सकते हैं. कंपनियाँ अपने बिज़नेस पर ध्यान देती हैं और ऑफिस मैनेजमेंट का झंझट हमारे ऊपर छोड़ देती हैं.
टेक्नोलॉजी और डिज़ाइन — दोनों हमारे लिए कोर हैं. टेक्नोलॉजी से स्पेस स्मार्ट और आसान बनता है — जैसे ऑटोमेटेड एक्सेस, रीयल-टाइम सीट बुकिंग, एनर्जी एफिशिएंसी.
डिज़ाइन में हम प्रोडक्टिविटी, वेलनेस और कोलैबोरेशन पर ध्यान देते हैं. हमारी टीम हर शहर की लोकल कल्चर को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन करती है.
YS: अगले 2–3 साल में Incuspaze के लक्ष्य क्या हैं? क्या भारत से बाहर विस्तार का प्लान है?
संजय: अगले 2–3 साल में हम भारत के टॉप 25 शहरों में मज़बूत मौजूदगी बनाएंगे और 100 से ज़्यादा सेंटर्स तक पहुँचेंगे.
हम मज़बूत टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म और स्केलेबल डिलीवरी मॉडल बना रहे हैं ताकि हर जगह एक जैसा शानदार अनुभव मिल सके.
Incuspaze सिर्फ़ ऑफिस स्पेस नहीं देता, बल्कि एक नई सोच देता है. ये सोच है लचीलेपन, डिज़ाइन, तकनीक और विश्वास की. संजय चट्राथ और उनकी टीम ने दिखा दिया है कि भारत का वर्कस्पेस सिर्फ़ दीवारों और फर्नीचर का नहीं बल्कि इनोवेशन और ड्रीम्स का भी नाम है.



