कोविड में उपजा आइडिया! CA की पढ़ाई करते खड़ा किया मसालों का बिज़नेस
CA आर्टिकलशिप के दौरान अंकित शर्मा ने शुद्ध मसालों के बिज़नेस का सपना देखा. कोविड के समय उपजे इस आइडिया को उन्होंने यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिले लोन से हकीकत में बदला और गाजियाबाद में Puurak Spices की शुरुआत की.
अंकित शर्मा जब CA (Chartered Accountant) की आर्टिकलशिप कर रहे थे, तब उनके मन में अपना कुछ शुरू करने का विचार धीरे धीरे आकार ले रहा था. यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. यह सोच समय के साथ पक्की होती गई. उस दौर में देश कोविड महामारी से गुजर रहा था. अंकित का काम बड़ी कंपनियों के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स देखना था. वे रोज़ यह समझने की कोशिश करते थे कि कौन सा बिज़नेस मुश्किल समय में भी टिकता है और कौन सा जल्दी बिखर जाता है.
इसी दौरान उन्होंने एक बात नोटिस की. कुछ प्रोडक्ट्स ऐसे होते हैं जिनकी मांग हालात चाहे जैसे हों, खत्म नहीं होती. मसाले उन्हीं में से एक थे. मसाले कोई लग्ज़री चीज़ नहीं हैं जिन्हें लोग आसानी से छोड़ दें. हर घर में उनकी जरूरत होती है. दूसरी ओर बाज़ार में मिलावट को लेकर लगातार बातें हो रही थीं. खासतौर पर कच्चे माल में मिलावट एक गंभीर समस्या बन चुकी थी. यह बात अंकित के लिए सिर्फ खबर नहीं थी. उनके अपने घर में भी इसका असर महसूस किया गया था.
यहीं से उनके मन में एक साफ विचार बना. अगर वे इस क्षेत्र में आएंगे तो किसी भी तरह का शॉर्टकट नहीं अपनाएंगे. शुरुआत से ही उन्होंने दो बातों को आधार बनाया. गुणवत्ता और निरंतरता. अंकित साफ शब्दों में कहते हैं कि हमने पहले दिन ही तय कर लिया था कि मिलावट नहीं करेंगे और सिर्फ शुद्ध उत्पाद ही देंगे.
अंकित के परिवार में कोई भी बिज़नेस बैकग्राउंड से नहीं था. उनके पिता किसान हैं और परिवार के बाकी सदस्य सरकारी और प्राइवेट नौकरियों से जुड़े रहे हैं. ऐसे में उनके पास कोई तैयार मॉडल नहीं था जिसे देखकर वे आगे बढ़ सकें. उन्हें खुद सीखना था. उन्होंने पीछे से पूरी तैयारी शुरू की. बाज़ार को समझा. बड़े ब्रांड कैसे काम करते हैं, कौन सी मशीनें इस्तेमाल होती हैं, मसालों को कैसे सुरक्षित रखा जाता है और स्वाद को कैसे एक जैसा बनाए रखा जाता है.
उन्होंने खुद जाकर कच्चे माल के बाज़ार देखे. खासतौर पर खारी बावली जाकर उन्होंने यह समझा कि क्वालिटी और कीमत में कितना फर्क होता है और क्या वे इस मुकाबले में टिक पाएंगे या नहीं. साल 2021 में उन्होंने काम शुरू कर दिया था, लेकिन शुरुआत में इसे बहुत सीमित रखा. अपने परिवार को भी उन्होंने साल 2025 में तब बताया जब वे पूरी तरह से इस फैसले के लिए तैयार हो चुके थे.
पैसों की योजना सबसे अहम थी, क्योंकि उसी पर आगे की पूरी दिशा निर्भर थी. इसी दौरान उन्हें सोशल मीडिया रील्स के ज़रिए एक सरकारी लोन योजना के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने बिना देर किए पूरी प्रक्रिया समझी और ज़रूरी दस्तावेज़ तैयार कर जिला उद्योग केंद्र पहुंचे. उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से आवेदन किया और लोन मंजूर हो गया.
लोन मिलने के बाद उन्होंने गाजियाबाद में अपना यूनिट सेटअप किया. मशीनें खरीदीं. कच्चा माल और पैकेजिंग की व्यवस्था की. ट्रेडमार्क से जुड़े काम निपटाए. उन्होंने एक फूड कंसल्टेंट की मदद से रेसिपी को स्टैंडर्ड किया ताकि हर बार स्वाद एक जैसा रहे. उनका ब्रांड पूरक स्पाइसेज आज पैकेज्ड मसालों के रूप में बाज़ार में मौजूद है. वे सीधे ग्राहकों को भी बेचते हैं और रिटेलर्स व कैटरर्स को भी सप्लाई करते हैं. सीधे ग्राहक से मिलने वाला फीडबैक उन्हें सबसे ज़्यादा मदद करता है.
अंकित की टीम में पांच महिलाएं काम करती हैं. वे सफाई से लेकर छंटाई, पीसने और पैकिंग तक की जिम्मेदारी संभालती हैं. अंकित खुद बिक्री और सप्लाई चेन देखते हैं. जब वे अपने काम की बात करते हैं, तो बड़े बड़े दावों से ज्यादा रोज़मर्रा की प्रक्रिया पर जोर देते हैं. नियमित जांच, स्वाद की निरंतरता और अनुशासन उनके काम की पहचान है.
अंकित के लिए यह सफर किसी रातों रात मिली सफलता की कहानी नहीं है. यह धीरे धीरे बने भरोसे और रोज़ निभाई जाने वाली आदतों का नतीजा है. लॉकडाउन के समय उपजा एक विचार आज एक स्थिर बिज़नेस का रूप ले चुका है. उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब उनका रोज़ का काम कागज़ों पर बने आंकड़ों से मेल खाने लगा है और यही आत्मविश्वास उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है.
Edited by रविकांत पारीक



