58 की उम्र में सीखी स्विमिंग, 82 साल की बकुलाबेन ने 16 देशों में जीते 554 मेडल
बकुलाबेन पटेल ने 58 साल की उम्र में स्विमिंग शुरू की और आज 82 साल में 16 देशों में 554 मेडल जीत चुकी हैं. उनकी कहानी साबित करती है कि उम्र, अकेलापन या मुश्किलें कभी भी सपनों को रोक नहीं सकतीं.
ज़िंदगी कभी-कभी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ हम खुद को खो देने की कगार पर होते हैं. ऐसा ही एक दौर था बकुलाबेन पटेल (Bakula Ben Patel) के जीवन में. पति के निधन के बाद वह अकेली रह गई थीं. दुख, तन्हाई और जिम्मेदारियों के बीच उनकी दुनिया जैसे थम सी गई थी.
लेकिन इस अकेलेपन ने उन्हें तोड़ने की बजाय अंदर की ताकत जगाई. 58 साल की उम्र में, जब बहुत लोग अपने सपनों को भूल चुके होते हैं, बकुलाबेन ने अपने जीवन को नई दिशा देने का साहस किया. उन्होंने स्विमिंग सीखना शुरू किया. आज 82 साल की उम्र में वह 16 देशों में 554 मेडल जीत चुकी हैं, देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुकी हैं.
बचपन में माता-पिता को खोया, 13 की उम्र में शादी
गुजरात के सूरत की रहने वालीं बकुलाबेन का जीवन आसान नहीं था. छोटी उम्र में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया. उनकी पढ़ाई रुक गई. महज 13 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी. पति के निधन के बाद वह काफी समय तक अकेली और दुखी रही. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने जीवन को फिर से संवारने का निर्णय किया.
Vogue India की एक रिपोर्ट के अनुसार, बकुलाबेन ने कहा, “मैं बचपन से ही खेल-कूद और एथलेटिक्स में रुचि रखती थी. लेकिन मैंने अपने माता-पिता को जल्दी खो दिया. 13 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई. मेरे बच्चे अभी छोटे ही थे कि मैं विधवा हो गई. तब मुझे बहुत अकेलापन महसूस हुआ.”
58 साल की उम्र में सीखी स्विमिंग
कुछ साल बाद जब उनके बच्चे उनके घर से अलग हो गए, तो उन्हें नहीं पता था कि क्या करें. उन्होंने कहा, “तब मैंने सोचा कि खुद को किसी खेल में व्यस्त कर लूँ. मैं अपने दर्द को भूलने और डर पर काबू पाने के लिए स्विमिंग शुरू करने लगी.”
लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी. एक महीने बाद वह लगभग डूब ही गईं.
इस अनुभव ने उन्हें डराया और उन्होंने तैरना छोड़ दिया. उन्होंने अपने आप से वादा किया कि अब कभी स्विमिंग नहीं करेंगी. लेकिन यह वादा ज्यादा दिन टिक नहीं पाया.
कुछ महीने बाद, 58 साल की उम्र में, उन्होंने फिर से पानी में कदम रखा. उन्होंने इसे अपने जीवन का “सबसे सुनहरा समय” कहा.
शुरुआत में मुश्किलें आईं. एक बार तैरते हुए वह लगभग डूब ही गईं, लेकिन किसी तरह बच गईं. यह अनुभव डरावना था, लेकिन हार मानने की बजाय उन्होंने थोड़े समय बाद फिर से स्विमिंग शुरू की.
स्विमिंग में सफलता और मेडल्स की झड़ी
आज बकुलाबेन सिर्फ स्विमिंग नहीं करतीं, बल्कि 400 लोगों को तैरना भी सिखा चुकी हैं. उनकी मेहनत, समर्पण और जज्बे ने उन्हें देश और विदेश की प्रतियोगिताओं में सफलता दिलाई.
स्विमिंग के अलावा वह एथलेटिक्स में भी सक्रिय हैं. उनके अब तक कुल 554 मेडल हैं. उनका घर, उनके जज्बे और उनकी मेहनत की गवाही देता है.
द बेटर इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बकुलाबेन ने अटलांटिक और प्रशांत महासागर में स्विमिंग की है. बंगाल उपसागर में वे 19 किलोमीटर तैर चुकी हैं.
बकुलाबेन की दिनचर्या भी प्रेरक है. वह सुबह 4 बजे से पहले उठती हैं, योग, व्यायाम और अभ्यास में समय बिताती हैं. इसके अलावा, बकुलाबेन क्लासिकल डांस में भी माहिर हैं. वह भरतनाट्यम में MA कर रही हैं और 75 साल की उम्र में ढाई घंटे स्टेज पर परफॉर्म करके लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं. उनके जीवन का यही अनुशासन उन्हें निरंतर ऊँचाइयों तक ले गया है.
‘देर’ महज एक बहाना है — बकुलाबेन
बकुलाबेन का जीवन यह साबित करता है कि कभी भी देर नहीं होती, और अगर व्यक्ति ठान ले तो कोई भी चीज़ असंभव नहीं है.
उनका संदेश खासकर महिलाओं के लिए प्रेरक है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक बाधाओं में खुद को पीछे महसूस करती हैं.
वह कहतीं हैं, “अगर आपके पास जुनून और मेहनत है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. ‘देर’ महज एक बहाना है.”
बकुलाबेन पटेल की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में हार मानना कभी विकल्प नहीं होना चाहिए. कठिनाइयों को अवसरों में बदलकर उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदल दी.
आज 82 साल की उम्र में भी वह अपने सपनों को जी रही हैं और सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
उनकी कहानी सिर्फ स्विमिंग या एथलेटिक्स की नहीं है. यह धैर्य, जुनून और मेहनत के साथ अपने सपनों को जीने की कहानी है. बकुलाबेन ने साबित किया कि जीवन में असंभव कुछ भी नहीं है. उनकी कहानी यह सिखाती है कि अकेलेपन और कठिनाइयों में भी इंसान चमत्कार कर सकता है.
(feature image: Ahmedabad Mirror)



