ऑस्ट्रेलिया से भारत लौटकर शुरू किया TrucksUp, छोटे ट्रक मालिकों के लिए बना रहे डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म
TrucksUp छोटे ट्रक मालिकों और ड्राइवरों की लोड, ट्रैकिंग, फाइनेंस और अन्य जरूरतों को टेक्नोलॉजी के जरिए आसान बनाने की कोशिश कर रहा है. जानिए सार्थक एलवाधी और अविराज चड्ढा के इस स्टार्टअप की कहानी, बिजनेस मॉडल, AI रणनीति, फंडिंग और विस्तार की योजना.
भारत में माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा सड़कों के जरिए होता है. NITI Aayog की Fast Tracking Freight in India रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कुल फ्रेट ट्रैफिक में सड़क परिवहन की हिस्सेदारी करीब 71% है. 2025 में सड़क परिवहन की यही हिस्सेदारी सरकार ने भी दोहराई थी.
इतने बड़े बाजार के बावजूद ट्रकिंग कारोबार का एक हिस्सा अब भी बिखरा हुआ है. खासकर छोटे ट्रक मालिकों और ड्राइवरों के लिए लोड ढूंढना, भुगतान का प्रबंधन, वाहन की निगरानी और फाइनेंस जैसी जरूरतें चुनौती बनी रहती हैं.
गुरुग्राम स्थित TrucksUp इसी हिस्से को डिजिटल बनाने की कोशिश कर रहा है. 2024 में सार्थक एलवाधी और अविराज चड्ढा ने इसकी शुरुआत की. कंपनी का शुरुआती फोकस शिपर्स और ट्रांसपोर्टर्स के बीच लोड और ट्रक की उपलब्धता को डिजिटल तरीके से जोड़ने पर था.
ऑस्ट्रेलिया से भारत तक का सफर
सार्थक एलवाधी ने RMIT, Melbourne से कॉमर्स और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स की पढ़ाई की. ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने इन्वेंटरी मैनेजमेंट, लास्ट-माइल कोऑर्डिनेशन और फ्रेट फॉरवर्डिंग से जुड़े काम किए.
भारत लौटने के बाद उन्होंने पाया कि यहां ट्रकिंग का बड़ा हिस्सा अब भी फोन कॉल, व्यक्तिगत संपर्क और मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भर है.
YourStory से बात करते हुए TrucksUp के को-फाउंडर सार्थक एलवाधी बताते हैं, “ऑस्ट्रेलिया में लॉजिस्टिक्स के काम ने मुझे दिखाया कि टेक्नोलॉजी किस तरह रोजमर्रा के काम को आसान बना सकती है. भारत लौटने पर मैंने देखा कि हमारा ट्रकिंग सेक्टर बहुत बड़ा होने के बावजूद कई जगह अब भी मैनुअल तरीके से चल रहा है.”
उनके मुताबिक, इसी अनुभव से का आइडिया आया.

4.5 लाख से अधिक ट्रक सप्लायर्स का नेटवर्क
शुरुआत में TrucksUp ने डिजिटल फ्रेट एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म के तौर पर काम किया. शिपर्स लोड से जुड़ी जानकारी डाल सकते हैं, जबकि ट्रक मालिक अपनी जरूरत के मुताबिक उपलब्ध लोड तलाश सकते हैं.
लेकिन कंपनी ने जल्द ही महसूस किया कि ट्रांसपोर्टर की जरूरत सिर्फ लोड तक सीमित नहीं है. इसके बाद प्लेटफॉर्म में ट्रैकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, फ्यूल, FASTag और अन्य सेवाओं को जोड़ने की दिशा में काम शुरू हुआ.
कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर लोड मैचिंग, ऑनलाइन ट्रक बुकिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और फ्लीट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. कंपनी 4.5 लाख से अधिक ट्रक सप्लायर्स और 16,000 से अधिक FASTag से जुड़े होने का भी दावा करती है.
सार्थक कहते हैं, “हमने जल्दी समझ लिया कि सिर्फ लोड दिलाना काफी नहीं है. एक ट्रक मालिक के लिए उसका पूरा कारोबार एक साथ जुड़ा हुआ है. उसे लोड चाहिए, लेकिन साथ ही वाहन की ट्रैकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, फ्यूल और दस्तावेजों की भी जरूरत होती है.”
कंपनी के मुताबिक उसका बिजनेस मॉडल सब्सक्रिप्शन आधारित लोड बोर्ड, प्राथमिकता वाले लोड मैचिंग और फ्लीट एनालिटिक्स जैसी सेवाओं पर आधारित है. कुछ हाई-वैल्यू फ्रेट मैचिंग पर लेनदेन शुल्क भी लिया जाता है.
TrucksUp ने जुलाई 2026 में फिल्म अभिनेता अजय देवगन को ब्रांड एंबेसडर बनाया है.

(L-R) अजय देवगन (ब्रांड एंबेसडर) के साथ TrucksUp के को-फाउंडर सार्थक एलवाधी.
ड्राइवर से मालिक बनने की उम्मीद
TrucksUp अपने मॉडल को सिर्फ फ्रेट बुकिंग तक सीमित नहीं रखना चाहता. कंपनी का एक लक्ष्य ड्राइवरों और छोटे ट्रक मालिकों को वित्तीय सेवाओं और बेहतर फ्रेट उपलब्धता तक पहुंच देना है.
कंपनी ने Indian Oil Corporation Limited (IOCL) के साथ साझेदारी भी की है. इसके तहत ड्राइवरों और ट्रक मालिकों के बीच Apna Ghar IOCL योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
सार्थक कहते हैं, “हमारे लिए सफलता सिर्फ यह नहीं है कि प्लेटफॉर्म पर कितने ट्रिप पूरे हुए. असली सफलता तब होगी जब कोई ड्राइवर धीरे-धीरे अपनी आय को स्थिर कर पाए, वाहन खरीदने की स्थिति में आए और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बना सके.”
AI और डिजिटल भरोसे की चुनौती
ट्रकिंग में डिजिटल प्लेटफॉर्म के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भरोसा और अपनाने की दर है. छोटे ऑपरेटरों के लिए नए डिजिटल सिस्टम पर आना हमेशा आसान नहीं होता.
TrucksUp अब लोड मैचिंग, रूट ऑप्टिमाइजेशन और डेटा एनालिटिक्स में AI का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का Safety 360 फीचर वाहन, ड्राइवर और अनुपालन से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है. My Truck Is Here फीचर के जरिए वाहन की लाइव लोकेशन देखने की सुविधा दी जाती है.
सार्थक के मुताबिक, “AI हमारे लिए सिर्फ एक ट्रेंड नहीं है. इसका मतलब तभी है जब इससे ट्रक मालिक का समय बचे और उसकी कमाई बेहतर हो. हम डेटा के आधार पर लोड मैचिंग, रूट और वाहन की उपलब्धता को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं.”
प्रतिस्पर्धा और भविष्य की योजनाएं
डिजिटल ट्रकिंग का बाजार TrucksUp के आने से पहले ही प्रतिस्पर्धी है. BlackBuck, Porter और Rivigo जैसे खिलाड़ी अलग-अलग सेगमेंट में ट्रक बुकिंग, फ्रेट मार्केटप्लेस, ट्रैकिंग और फ्लीट सेवाएं देते हैं. प्रतिस्पर्धी सूची में TruckSuvidha जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं.
ऐसे बाजार में TrucksUp के लिए सिर्फ डिजिटल फीचर देना पर्याप्त नहीं होगा. उसे छोटे ऑपरेटरों को लगातार प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने, भरोसा कायम करने और पर्याप्त लोड-सप्लाई उपलब्ध कराने की चुनौती का सामना करना होगा.
कंपनी के मुताबिक, उसने अब तक करीब ₹20 करोड़ की शुरुआती फंडिंग जुटाई है और अगले चरण के लिए फंडिंग की तलाश में है. इस वित्त वर्ष के लिए कंपनी ने ₹35 करोड़ रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है और उसका दावा है कि पहली दो तिमाहियों के लक्ष्य हासिल हो चुके हैं. इन वित्तीय आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
आगे कंपनी देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में विस्तार, TrucksHub के जरिए ट्रक खरीद-बिक्री और फाइनेंस, इंश्योरेंस तथा फ्यूल जैसी सेवाओं को जोड़ने पर काम करना चाहती है.
सार्थक बताते हैं, “आने वाले वर्षों में हमारा लक्ष्य सिर्फ एक और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म बनना नहीं है. हम ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम बनाना चाहते हैं जहां एक छोटा ट्रक मालिक भी बड़े कारोबारी की तरह डेटा, वित्तीय सेवाओं और बेहतर बाजार तक पहुंच रख सके.”
भारत का सड़क से होने वाला माल ढुलाई कारोबार बहुत बड़ा है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां भी हैं. TrucksUp की असली चुनौती यह होगी कि वह अपनी टेक्नोलॉजी को छोटे ट्रक मालिकों के लिए कितना आसान और उपयोगी बना पाता है. साथ ही, उसे इस प्रतिस्पर्धी बाजार में लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखनी होगी.



