परिवार से सीखा बिजनेस, फिर बिना फंडिंग खड़ा किया कॉस्मेटिक्स ब्रांड, आज 17,000 स्टोर्स तक फैला कारोबार — Hilary Rhoda की ग्रोथ स्टोरी
कॉस्मेटिक्स ब्रांड Hilary Rhoda ने बिना बाहरी फंडिंग के बाजार में अपना कारोबार बढ़ाया है. करीब 90% बिजनेस जनरल ट्रेड से आता है और ब्रांड 17,000 रिटेल आउटलेट्स तक पहुंच चुका है. अब कंपनी छोटे शहरों पर फोकस करते हुए नेटवर्क को 40,000 से अधिक आउटलेट्स तक ले जाने की तैयारी में है.
भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार तेजी से बदल रहा है. सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, क्विक-कॉमर्स और नए घरेलू ब्रांड्स ने ग्राहकों के लिए विकल्प बढ़ाए हैं. हालांकि डिजिटल चैनलों के विस्तार के बीच ऑफलाइन रिटेल अब भी अहम है, खासकर छोटे शहरों में, जहां उपलब्धता और कीमत खरीद के फैसले में बड़ी भूमिका निभाती हैं.
Redseer Strategy Consultants के मुताबिक, भारत का ब्यूटी एंड पर्सनल केयर (BPC) बाजार वित्त वर्ष 25 में करीब 23 अरब डॉलर का था और 12% की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है. 2030 तक इसके 40 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा BPC बाजार बन सकता है.
इसी प्रतिस्पर्धी बाजार में गुरुग्राम स्थित कॉस्मेटिक्स ब्रांड Hilary Rhoda ने ऑफलाइन डिस्ट्रीब्यूशन को अपनी रणनीति का अहम जरिया बनाया है. 2008 में शुरू हुई कंपनी के मुताबिक, आज उसके प्रोडक्ट करीब 17,000 रिटेल आउटलेट्स तक पहुंचते हैं और लगभग 90% कारोबार जनरल ट्रेड से आता है. कंपनी अगले तीन से पांच साल में इस नेटवर्क को 40,000 से अधिक आउटलेट्स तक ले जाने की योजना बना रही है.
परिवार से मिली बिजनेस की समझ
Hilary Rhoda के को-फाउंडर और CMO वत्सल अग्रवाल ऐसे परिवार में बड़े हुए, जहां कारोबार रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा था. परिवार को बिजनेस बनाते और संभालते देखकर उन्होंने अनुशासन, भरोसे और लंबे समय की सोच की अहमियत समझी. बाद में NMIMS से एमबीए और डिस्ट्रीब्यूटर्स, रिटेलर्स तथा चैनल पार्टनर्स के साथ काम करने के अनुभव ने उन्हें भारतीय बाजार की जमीनी समझ दी.
YourStory से बातचीत में अग्रवाल कहते हैं, “परिवार को बिजनेस करते और आगे बढ़ाते देखकर मैंने सीखा कि सिर्फ आंकड़े जरूरी नहीं होते. ग्राहकों, कर्मचारियों और बिजनेस पार्टनर्स के साथ रिश्ते भी उतने ही अहम हैं. यही सीख आगे चलकर Hilary Rhoda को बनाने और ग्राहकों की जरूरत समझने में मजबूत आधार बनी.”
किफायती कॉस्मेटिक्स बाजार में जगह बनाने की कोशिश
Hilary Rhoda की शुरुआत 2008 में हुई. कंपनी का दावा है कि उसने किफायती कीमत पर रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले मेकअप प्रोडक्ट उपलब्ध कराने और भारतीय स्किन टोन के अनुरूप शेड्स तथा फॉर्मुलेशन पर ध्यान दिया.
यह वह सेगमेंट है जहां मुकाबला लगातार बढ़ा है. Hilary Rhoda को Swiss Beauty, MARS Cosmetics और Insight Cosmetics जैसे किफायती मेकअप ब्रांड्स के साथ बाजार साझा करना पड़ता है. इसके अलावा Lakmé और Maybelline जैसे स्थापित ब्रांड्स तथा SUGAR Cosmetics और Nykaa Cosmetics जैसे नए दौर के ब्रांड भी अलग-अलग प्राइस सेगमेंट में ग्राहक के लिए विकल्प बढ़ाते हैं.
ऐसे में सिर्फ कीमत किसी ब्रांड के लिए लंबे समय तक बढ़त की गारंटी नहीं है. प्रोडक्ट क्वालिटी, नए प्रोडक्ट्स की रफ्तार, रिटेल उपलब्धता और डिजिटल डिस्कवरी भी प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं.
NIQ की 2025 की ‘The New Face of Indian Beauty’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ग्राहक अब इंग्रीडिएंट्स, प्रभाव, कीमत में पारदर्शिता और स्किन टोन के अनुरूप प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. रेटिंग, रिव्यू और सोशल मीडिया भी ऑनलाइन ब्यूटी खरीद के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं.

Hilary Rhoda की टीम
बिना VC फंडिंग खड़ा किया बिजनेस
D2C (डायरेक्ट टू कंज्यूमर) कंपनियों के बीच इन्वेस्टर्स से फंडिंग जुटाकर तेजी से विस्तार करना आम रणनीति रही है, लेकिन Hilary Rhoda ने अलग रास्ता चुना. कंपनी के मुताबिक, उसने अब तक मुख्य रूप से प्रमोटर फंड और कारोबार से होने वाली कमाई के जरिए विस्तार किया है. कमाई को प्रोडक्ट डेवलपमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन और ऑपरेशंस में दोबारा लगाया गया.
कंपनी B2B (बिजनेस टू बिजनेस) और B2C (बिजनेस टू कंज्यूमर) दोनों चैनलों पर काम करती है. हालांकि करीब 90% कारोबार अब भी जनरल ट्रेड से आता है. ऑनलाइन कारोबार मुख्य रूप से मार्केटप्लेस के जरिए होता है. ब्रांड फेस, लिप, आई और पर्सनल केयर जैसी कैटेगरी में प्रोडक्ट बेचता है.
कंपनी ने अपने ताजा रेवेन्यू, मुनाफे या ग्रोथ रेट के आंकड़े साझा नहीं किए हैं. ऐसे में उसके कारोबार के पैमाने और वित्तीय प्रदर्शन का स्वतंत्र आकलन करना मुश्किल है.
छोटे शहर क्यों हैं अहम?
Hilary Rhoda के लिए टियर 2 और टियर 3 शहर विस्तार का प्रमुख आधार रहे हैं. कंपनी का कहना है कि उसने इन बाजारों में डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्थानीय रिटेलर्स के जरिए पहुंच बढ़ाई है.
यह रणनीति ऐसे समय में है जब डिजिटल चैनल भी छोटे शहरों तक तेजी से पहुंच रहे हैं. Redseer के अनुसार, भारत का ऑनलाइन BPC बाजार CY22 के करीब 21,000 करोड़ रुपये से बढ़कर CY25 में लगभग 52,000 करोड़ रुपये हो गया. इसी दौरान ऑनलाइन BPC में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी करीब 2% से बढ़कर लगभग 16% हो गई.
इस बदलाव का मतलब है कि ऑफलाइन नेटवर्क पर मजबूत पकड़ रखने वाले ब्रांड्स को भी ईकॉमर्स और क्विक कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव के साथ अपनी रणनीति बदलनी होगी.
17,000 से 40,000 आउटलेट्स तक पहुंचने का लक्ष्य
Hilary Rhoda अब ऑफलाइन विस्तार के साथ डिजिटल कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी का लक्ष्य अगले तीन से पांच साल में अपने रिटेल नेटवर्क को करीब 17,000 से बढ़ाकर 40,000 से अधिक आउटलेट्स तक ले जाना है. टियर 3 और टियर 4 बाजार इसके केंद्र में रहेंगे.
साथ ही कंपनी मार्केटप्लेस और D2C चैनल मजबूत करने, डिजिटल कंटेंट और परफॉर्मेंस मार्केटिंग बढ़ाने तथा नैनो और माइक्रो क्रिएटर्स के साथ काम करने की योजना बना रही है. स्किनकेयर और हेयरकेयर जैसी कैटेगरी में उतरने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं.
अग्रवाल कहते हैं, “हम अपने रिटेल नेटवर्क को 17,000 से बढ़ाकर 40,000 से अधिक आउटलेट्स तक ले जाना चाहते हैं. इसके साथ टियर 3 और टियर 4 बाजारों में मौजूदगी बढ़ाएंगे. डिजिटल कॉमर्स और D2C चैनल पर भी फोकस रहेगा.”
करीब 18 साल बाद Hilary Rhoda के लिए अगली चुनौती सिर्फ ज्यादा दुकानों तक पहुंचना नहीं है. भारतीय ब्यूटी बाजार तेजी से डिजिटल हो रहा है और किफायती मेकअप सेगमेंट में घरेलू तथा वैश्विक कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ रहा है. ऐसे में 40,000 आउटलेट्स का लक्ष्य तभी कारोबारी बढ़त में बदलेगा, जब कंपनी ऑफलाइन डिस्ट्रीब्यूशन के साथ डिजिटल पहुंच, प्रोडक्ट इनोवेशन और ग्राहक के भरोसे को भी मजबूत कर पाए.



