गांव के मरीजों तक पहुंचेगा AI डॉक्टर! हेल्थटेक स्टार्टअप MediElaj बना रहा है स्मार्ट Health Kiosk नेटवर्क
हेल्थटेक स्टार्टअप MediElaj देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ा रहा है. कंपनी AI, डिजिटल हेल्थ और डायग्नोस्टिक्स को हेल्थ कियोस्क से जोड़ रही है. इसका फोकस छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों पर है. जानिए कंपनी का बिजनेस मॉडल, शुरुआती फंडिंग, यूजर्स और विस्तार की योजना.
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सिर्फ डॉक्टरों की उपलब्धता का सवाल नहीं है. यह दूरी, जांच सुविधाओं, विशेषज्ञों तक पहुंच और समय पर सही सलाह मिलने से भी जुड़ा है. खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में मरीजों को कई बार सामान्य जांच से लेकर डॉक्टरों से परामर्श तक के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है.
इसी अंतर को कम करने की कोशिश कर रहा है फरीदाबाद स्थित हेल्थटेक स्टार्टअप MediElaj. 2023 में शुरू हुई यह कंपनी AI, डिजिटल हेल्थकेयर, डायग्नोस्टिक्स और हेल्थ कियोस्क को एक मॉडल में जोड़ने पर काम कर रही है.
हालांकि, भारत में डिजिटल हेल्थ सेक्टर अब नया नहीं है. सरकार के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (AAMs) के माध्यम से eSanjeevani पर 42.66 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके थे.
ऐसे में MediElaj का सवाल यह है कि डिजिटल हेल्थ को सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित रखने के बजाय उसे कम्यूनिटी लेवल पर कैसे पहुंचाया जाए.
YourStory ने हाल ही में MediElaj के चेयरमैन और फाउंडर देबजीत पात्रा तथा को-फाउंडर और CEO उमेश खत्री से बात की. इस बातचीत में उन्होंने कंपनी के सफर, हेल्थ कियोस्क मॉडल, AI के इस्तेमाल और छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की अपनी योजना के बारे में विस्तार से बताया.
शुरुआत
MediElaj की शुरुआत देबजीत पात्रा और उमेश खत्री ने की. देबजीत ने फिजिक्स और फाइनेंस की पढ़ाई की है और तीन दशक से ज्यादा का कारोबारी अनुभव रखते हैं. उमेश इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक हैं और टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट और स्टार्टअप्स में काम कर चुके हैं.
दोनों का मानना है कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनके असमान वितरण की भी है.
यही वह अंतर है जिसे MediElaj टेक्नोलॉजी के जरिए कम करना चाहता है.
देबजीत कहते हैं, “हमारा उद्देश्य AI को डॉक्टर का विकल्प बनाना नहीं है. हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इस तरह करना चाहते हैं कि डॉक्टर और मौजूदा हेल्थकेयर सिस्टम ज्यादा लोगों तक पहुंच सकें.”

ऐप से कियोस्क तक
MediElaj का मॉडल एक मोबाइल ऐप से आगे जाता है. ऐप पर यूजर AI-समर्थित हेल्थ चेक-अप करा सकता है. इसमें कंपनी के अनुसार 30 सेकंड का फेस स्कैन और बॉडी वाइटल्स की जांच जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
लेकिन कंपनी का बड़ा दांव हेल्थ कियोस्क पर है. इन कियोस्क (Kiosk) में जरूरत के अनुसार डायग्नोस्टिक डिवाइस, वाइटल मॉनिटरिंग और डिजिटल कनेक्टिविटी जोड़ी जा सकती है. इसके बाद जरूरत पड़ने पर मरीज को डॉक्टर या स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ा जा सकता है.
यह मॉडल सरकार के डिजिटल हेल्थ प्रयासों से पूरी तरह अलग नहीं है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार eSanjeevani 2.0 में पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक डिवाइस को टेलीमेडिसिन के साथ जोड़ने की व्यवस्था भी विकसित की गई है.
उमेश के मुताबिक, “हेल्थकेयर में स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, वाइटल मॉनिटरिंग और सही समय पर डॉक्टर तक पहुंच, सभी जरूरी हैं. हेल्थ कियोस्क इन चीजों को एक जगह जोड़ने की कोशिश है.”
पहले वैलिडेशन, फिर विस्तार
दोनों फाउंडर्स ने अपनी निजी बचत से MediElaj की शुरुआत की थी. इसके बाद दोस्तों और परिवार से करीब 1 लाख डॉलर जुटाए गए. कंपनी के अनुसार, अब उसके प्लेटफॉर्म से 1 लाख से अधिक यूजर्स जुड़ चुके हैं.
MediElaj का दावा है कि उसके कियोस्क के जरिए 1,000 से ज्यादा ऑफलाइन हेल्थ असेसमेंट और डायग्नोसिस किए गए हैं, जबकि मोबाइल ऐप के जरिए 5,000 से अधिक डायग्नोसिस हुए हैं.
कंपनी ने ISO 13485 और ISO 14971 फ्रेमवर्क अपनाने और अपने मेडिकल सॉफ्टवेयर तथा डिवाइस इकोसिस्टम के लिए लागू SaMD और CDSCO जरूरतों पर काम करने की जानकारी दी है.
यहां कंपनी के लिए चुनौती केवल टेक्नोलॉजी को तैयार करना नहीं है. हेल्थकेयर में किसी भी डिजिटल प्रोडक्ट को क्लिनिकल वैलिडेशन, डेटा सुरक्षा, रेगुलेटरी अनुपालन और मरीज की सुरक्षा जैसे सवालों से गुजरना पड़ता है.
देबजीत कहते हैं, “हमने शुरुआत से ही बहुत तेज ग्रोथ के बजाय फाउंडेशन को मजबूत करने पर ध्यान दिया है. अगले 12 से 18 महीनों में हमारा फोकस टेक्नोलॉजी, AI, डायग्नोस्टिक इंटीग्रेशन और हेल्थ कियोस्क को मजबूत करने पर है.”

MediElaj की टीम
कमाई से पहले भरोसा
MediElaj ने अभी अपने रेवेन्यू के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं. कंपनी डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, हेल्थकेयर सर्विसेज, B2B पार्टनरशिप और हेल्थ कियोस्क की तैनाती को संभावित कमाई के स्रोत के रूप में देखती है.
फिलहाल कंपनी का जोर यूजर अपनाने, प्रोडक्ट वैलिडेशन और संस्थागत साझेदारियों पर है. इसके लिए वह सरकारी संस्थानों, अस्पतालों, NGOs, कॉरपोरेट्स और डायग्नोस्टिक संगठनों के साथ पायलट पर काम करना चाहती है.
यह रणनीति उस बड़े बदलाव के बीच है जिसमें भारत का हेल्थ सिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है. सरकार के Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM) का लक्ष्य भी अलग-अलग स्वास्थ्य प्रणालियों और संस्थानों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है.
आगे की राह
आने वाले समय में MediElaj का तत्काल लक्ष्य भारत में हेल्थ कियोस्क का विस्तार, AI और डायग्नोस्टिक्स का बेहतर इंटीग्रेशन और अस्पतालों तथा स्वास्थ्य संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाना है.
कंपनी पहले कुछ जिलों में अपने मॉडल को साबित करने और उसके बाद राज्य स्तर पर विस्तार की योजना बना रही है. लंबे समय में वह दूसरे उभरते बाजारों में भी इसी मॉडल की संभावनाएं देखती है.
लेकिन MediElaj के सामने असली सवाल कियोस्क की संख्या बढ़ाना नहीं है. सवाल यह है कि क्या ये कियोस्क उन लोगों के लिए वास्तव में उपयोगी और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा पाएंगे, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक जांच सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं.
भारत में डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है. अब अगली चुनौती इस डिजिटल क्षमता को जमीन पर मौजूद स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने की है. MediElaj इसी दिशा में अपना मॉडल परख रहा है. इसका अगला चरण यह बताएगा कि AI, डायग्नोस्टिक्स और कियोस्क का यह संयोजन छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कितनी व्यावहारिक और टिकाऊ जगह बना पाता है.



