पहला बिजनेस बंद हुआ तो गांव लौटे नागमणि रॉय, अब बिहार की 1700 महिलाओं के हुनर को दे रहे बाजार
बिहार के नागमणि रॉय ने 42 स्टोर वाला फैशन ब्रांड खड़ा किया. फिर कोविड में जब बिजनेस बंद हुआ तो उन्होंने गांव का रुख किया. यहां उन्होंने महिलाओं के हुनर को बाजार से जोड़ने की पहल शुरू की. वे Earthomadic और Project Anuswaar के जरिए अब तक 1,700 महिलाओं को ट्रेनिंग दे चुके हैं, जिससे उनकी आजीविका सुधरी.
बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), हैदराबाद तक पहुंचना और फिर देशभर में 42 स्टोर वाला फैशन ब्रांड खड़ा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. लेकिन नागमणि रॉय के सफर की असली दिशा तब बदली, जब कोविड-19 महामारी के दौरान उनका रिटेल कारोबार बंद हुआ और वह अपने पुश्तैनी गांव वैशाली (बिहार) लौटे.
गांव में उन्होंने देखा कि कई महिलाओं के पास पारंपरिक हुनर तो है, लेकिन बाजार, डिजाइन और नियमित कमाई के अवसर सीमित हैं. यहीं से Earthomadic Foundation और Project Anuswaar की शुरुआत हुई. इन पहलों का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ना और ग्रामीण महिलाओं के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर तैयार करना है.
YourStory ने हाल ही में Earthomadic Foundation के फाउंडर नागमणि रॉय (Nagmani Roy) से बात की. उन्होंने अपने सफर, फैशन रिटेल से ग्रामीण उद्यमिता की ओर बदलाव और पारंपरिक कारीगरों को बाजार से जोड़ने के अपने अनुभव साझा किए.
गांव से NIFT तक का सफर
नागमणि का बचपन बिहार के एक लोअर मिडिल क्लास परिवार में बीता. लंबे समय तक परिवार की आमदनी का प्रमुख सहारा उनके दादा थे, जो सरकारी मिडिल स्कूल में हेडमास्टर थे. नागमणि ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सरकारी स्कूलों से की. बाद में उनके पिता ने कारोबार शुरू किया और परिवार की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हुई.
इसके बाद उन्होंने NIFT हैदराबाद से फैशन डिजाइन की पढ़ाई की और 2009 में ग्रेजुएशन पूरा किया. डिजाइन की पढ़ाई ने उन्हें कपड़ों और फैशन के साथ-साथ कस्टमर, मार्केट, प्रोडक्शन और बिजनेस को समझने का नजरिया दिया.
नागमणि रॉय बताते हैं, “मेरी शुरुआती जिंदगी ने मुझे सिखाया कि सीमित संसाधन हमेशा कमजोरी नहीं होते. वे इंसान को मेहनत करना, उपलब्ध चीजों का बेहतर इस्तेमाल करना और अवसरों को पहचानना सिखाते हैं. NIFT ने इस सोच को एक नया आकार दिया.”
बंद हुआ फैशन ब्रांड तो गांव लौटे
2009 में पढ़ाई पूरी करने के बाद नागमणि ने जॉब करने के बजाय ऑन्त्रप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) की राह चुनी. 2010 में उन्होंने महिलाओं के कपड़ों का रिटेल ब्रांड Kazari शुरू किया. करीब 11 साल में यह कारोबार 42 स्टोर तक पहुंचा.
इस दौरान उन्होंने प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग, टीम मैनेजमेंट, मार्केटिंग और फाइनेंस मैनेजमेंट जैसे बिजनेस के कई पहलुओं को करीब से समझा.
फिर कोविड आया. रिटेल कारोबार पर असर पड़ा और अंततः उसे बंद करना पड़ा. नागमणि वैशाली (बिहार) लौटे. यहीं उन्हें ग्रामीण महिलाओं के हुनर और उनकी आर्थिक संभावनाओं को नए नजरिए से देखने का मौका मिला.
नागमणि बताते हैं, “मैंने देखा कि कई महिलाओं के पास हुनर, समय और काम करने की इच्छा है, लेकिन आर्थिक अवसर बहुत कम हैं. शुरुआत में हमने अलग-अलग क्राफ्ट की ट्रेनिंग देना शुरू किया. धीरे-धीरे समझ आया कि केवल ट्रेनिंग से बदलाव नहीं आएगा. डिजाइन, प्रोडक्ट, क्वालिटी और मार्केट की समझ भी उतने ही जरूरी हैं.”

Earthomadic के जरिए अब तक करीब 1,700 ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. आज ये महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं बल्कि अच्छी आजीविका कमा रही हैं.
हुनर को बाजार से जोड़ने की कोशिश
बांस से शुरू हुआ काम आगे चलकर सिक्की, सुजनी, टेराकोटा, एप्लिक, लेदर, क्रोशिया, जूट और वॉटर हाइसिंथ जैसे शिल्प तक पहुंचा. इसी सोच के साथ Earthomadic की नींव पड़ी.
मॉडल का फोकस केवल ट्रेनिंग देने पर नहीं है. किसी समुदाय के साथ काम शुरू करने से पहले उसकी मौजूदा क्षमता, कच्चे माल और जरूरतों को समझा जाता है. इसके बाद स्किल डेवलपमेंट, डिजाइन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, क्वालिटी, प्रोडक्शन और मार्केट तक पहुंच पर काम किया जाता है.
Project Anuswaar इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. लक्ष्य एक प्रशिक्षित व्यक्ति तैयार करना भर नहीं, बल्कि उसे ऐसा कारीगर बनाना है जो अपने हुनर से लगातार कमाई कर सके.
नागमणि कहते हैं, “हम एक कारीगर को हुनर से प्रोडक्ट और प्रोडक्ट से मार्केट तक ले जाना चाहते हैं. अगर किसी महिला ने कोई शिल्प सीख लिया, लेकिन उसके बनाए प्रोडक्ट की बिक्री नहीं होती, तो प्रशिक्षण का असर अधूरा रह जाता है. हमारे लिए असली बदलाव तब है, जब हुनर लगातार आय के अवसर में बदलता है.”
वॉटर हाइसिंथ से आजीविका
वॉटर हाइसिंथ (Water Hyacinth) इसका एक उदाहरण है. यह तेजी से फैलने वाला जलीय पौधा कई जलाशयों के लिए समस्या बन सकता है. लेकिन इसे कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल कर उपयोगी प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं.
बिहार में भी वॉटर हाइसिंथ आधारित आजीविका मॉडल को बढ़ावा मिल रहा है. केंद्र सरकार के RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) प्रोग्राम के तहत बिहार के लिए तैयार योजना में वॉटर हाइसिंथ और केले के रेशे से जुड़े क्लस्टर को बढ़ाने की संभावनाएं बताई गई हैं.
अप्रैल 2025 में बेगूसराय के लखनपुर में वॉटर हाइसिंथ क्राफ्ट पर स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी शुरू किया गया था. इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर पर्यावरणीय समस्या को आजीविका के अवसर में बदलना था.
नागमणि के लिए यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें स्थानीय संसाधन, पारंपरिक हुनर और बाजार तीनों को जोड़ा जा सकता है.

Earthomadic ने पिछले चार वर्षों में प्रोडक्ट्स की बिक्री और ट्रेनिंग सेवाओं से करीब ₹1.5 करोड़ का कारोबार किया है.
1700 महिलाओं को दी ट्रेनिंग
Earthomadic के जरिए अब तक करीब 1,700 ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इनमें करीब 300 कारीगर फिलहाल अलग-अलग क्लस्टर और समूहों के जरिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.
वैशाली के सतपुरा क्लस्टर में करीब 130 वॉटर हाइसिंथ कारीगर हैं. राजापाकर में लगभग 30 सिक्की कारीगर और बेलसर में करीब 30 लेदर कारीगर काम कर रहे हैं. किशनगंज में क्रोशिया और जूट के क्लस्टर भी विकसित किए गए हैं.
नागमणि कहते हैं, “हमारे लिए प्रभाव का मतलब सिर्फ यह बताना नहीं है कि कितने लोगों को ट्रेनिंग मिली. असली सवाल यह है कि उनमें से कितने लोग लगातार काम कर रहे हैं, कितनों को आय का अवसर मिला है और कितने बाजार से जुड़े हैं. हमारा लक्ष्य प्रशिक्षण लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि कमाने वाले कारीगरों की संख्या बढ़ाना है.”

कारोबार से आगे बढ़ी सफलता की परिभाषा
Earthomadic Foundation की शुरुआत पारंपरिक फॉर-प्रॉफिट स्टार्टअप की तरह नहीं हुई. शुरुआती काम नागमणि के अपने कारोबारी संसाधनों, प्रोजेक्ट आधारित अवसरों, साझेदारियों और महिला समूहों से जुड़े कारोबार के जरिए आगे बढ़ा.
पिछले चार वर्षों में Venu Shilpkala Kendra और Meiosis Impex जैसी महिला नेतृत्व वाली इकाइयों के जरिए प्रोडक्ट की बिक्री और ट्रेनिंग सेवाओं से करीब 1.5 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है.
अब Earthomadic लेबल के तहत इन प्रोडक्ट्स को एक पहचान देने की कोशिश हो रही है. उद्देश्य केवल बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा मॉडल बनाना है जिसमें कारोबार से पैदा होने वाला मूल्य फिर कारीगरों, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केट तक पहुंच में लगाया जा सके.
नागमणि रॉय के सामने अब अगला लक्ष्य इस मॉडल को बड़े स्तर पर ले जाने का है. अगले तीन से पांच वर्षों में वह वॉटर हाइसिंथ और केले के रेशे जैसे प्राकृतिक और वैकल्पिक फाइबर पर काम बढ़ाना चाहते हैं. इसके साथ होम प्रोडक्ट्स, फैशन एक्सेसरीज, फर्नीचर और लाइटिंग जैसी श्रेणियों में पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक डिजाइन से जोड़ने की योजना है.
नागमणि कहते हैं, “पहले मैं सफलता को स्टोर की संख्या, बिक्री और कारोबार की ग्रोथ से देखता था. आज मेरी नजर में सफलता का अर्थ अलग है. अगर किसी महिला के पास पहले आर्थिक अवसर नहीं था और अब वह अपने हुनर से कमाती है, तो यह सफलता है. अगर कोई पारंपरिक शिल्प नए बाजार में अपनी जगह बनाए रखता है, तो यह भी सफलता है.”
फैशन रिटेल से ग्रामीण आजीविका तक नागमणि रॉय का सफर इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इसमें ऑन्त्रप्रेन्योरशिप के दो अलग रूप दिखाई देते हैं. पहले वह ग्राहकों के लिए प्रोडक्ट बना रहे थे. अब वह उन लोगों के लिए बाजार तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके पास प्रोडक्ट बनाने का हुनर पहले से मौजूद है.
Earthomadic की राह अभी लंबी है. ग्रामीण क्लस्टरों को टिकाऊ बनाना, गुणवत्ता कायम रखना और बड़े बाजार तक पहुंच बनाना आसान नहीं होगा. लेकिन नागमणि की कहानी यह दिखाती है कि ऑन्त्रप्रेन्योरशिप सिर्फ कंपनी खड़ी करने का नाम नहीं है. कभी-कभी इसका मतलब ऐसे सिस्टम तैयार करना भी होता है, जिसमें किसी दूसरे व्यक्ति के हुनर को उसके लिए कमाई का रास्ता मिल सके.




