गिरनार फूड एंड बेवरेजेस को खरीदने की रेस में Tata Consumer और HUL भी; हजारों करोड़ का है सौदा

गिरनार फूड एंड बेवरेजेस को खरीदने वाले को वेस्टर्न इंडियन मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी.

गिरनार फूड एंड बेवरेजेस को खरीदने की रेस में Tata Consumer और HUL भी; हजारों करोड़ का है सौदा

Friday December 16, 2022,

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गुजरात स्थि​त चाय कंपनी गिरनार फूड एंड बेवरेजेस (Girnar Food & Beverages) बिक रही है. कहा जा रहा है कि इसे खरीदने की रेस में शामिल कंपनियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) और टाटा कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स (Tata Consumer Products) भी हैं. सौदा 1,000-1,500 करोड़ रुपये के बीच का रह सकता है. यह बात बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में कही गई है.

हालांकि बातचीत अभी शुरुआती दौर में ही है. गिरनार फूड एंड बेवरेजेस को खरीदने वाले को वेस्टर्न इंडियन मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी.

1987 में हुई थी शुरू

गिरनार फूड एंड बेवरेजेस की शुरुआत 1987 में हुई थी. इसके प्रमोटर शाह और भंसाली परिवार हैं. दोनों परिवारों की कंपनी में बराबर हिस्सेदारी है. Tracxn के मुताबिक, गिरनार फूड एंड बेवरेजेस का रेवेन्यु वित्त वर्ष 2021-21 में 380.8 करोड़ रुपये और मुनाफा 22.8 करोड़ रुपये रहा था. वहीं वित्त वर्ष 2029-20 में रेवेन्यु 325.2 करोड़ रुपये और मुनाफा 13.52 करोड़ रुपये रहा था.

रेवेन्यु में घरेलू बिक्री का योगदान लगभग 40-45%

ICRA के मुताबिक, कंपनी की महाराष्ट्र में विशेषकर मुंबई में अच्छी उपस्थिति है. कंपनी की गुजरात, दिल्ली, कर्नाटक, जम्मू व कश्मीर, तेलंगाना और राजस्थान समेत कई जगहों पर सीमित मौजूदगी है. कंपनी के कुल रेवेन्यु में घरेलू बिक्री का योगदान लगभग 40-45 प्रतिशत है. कंपनी एक्सपोर्ट भी करती है और कुल एक्सपोर्ट सेल्स का 80-90 प्रतिशत रूस से आता है.

Bisleri भी तलाश रही खरीदार

भारत की सबसे बड़ी पैकेज्ड वॉटर कंपनी बिसलेरी इंटरनेशनल (Bisleri International) भी बिकने जा रही है. कंपनी के चेयरमैन रमेश चौहान (Ramesh Chauhan) का कहना है कि वह अपने बोतलबंद पानी के कारोबार ‘बिसलेरी इंटरनेशनल’ को बेचने के लिए खरीदार तलाश रहे हैं. इसके लिए टाटा कंज्यूमर समेत कई कंपनियों से बातचीत चल रही है. कयास हैं कि इस सौदे की रेस में सबसे आगे टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (TCPL) हो सकती है. हालांकि 82 वर्षीय चौहान ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि बिसलेरी का सौदा TCPL के साथ 7,000 करोड़ रुपये में हो चुका है. चौहान ने स्पष्ट किया है कि समूह की कई संभावित खरीदारों से अभी बात चल रही है.

Bisleri International के किसी अन्य कंपनी के पास जाने के बाद चौहान कंपनी में माइनॉरिटी स्टेक भी नहीं रखना चाहते हैं. बोतलबंद पानी के कारोबार से बाहर निकलने के बाद, चौहान का इरादा पर्यावरण और धर्मार्थ कारणों जैसे जल संचयन, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और गरीबों को चिकित्सा उपचार प्राप्त करने में मदद करने पर फिर से ध्यान केंद्रित करना और निवेश करना है. बिसलेरी की शुरुआत से लेकर अब तक की कहानी जानने के लिए पढ़ें...


Edited by Ritika Singh