खरीदने जा रहे हैं इलेक्ट्रिक कार ? तो इसे पढ़ना ना भूलें...

सरकार ने साल 2030 तक भारत में सौ प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारों का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने में सरकार को पहले कई बुनियादी समस्याओं से पार पाना होगा।

केंद्र सरकार भारत में 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के लिए अपने कदमों को आगे तो बढ़ा रही है, लेकिन कई बुनियादी समस्याएँ अभी काफी जटिलता से इस लक्ष्य के आगे खड़ी हुईं हैं। सरकार को अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए जल्द ही इनसे पार पाना होगा।

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भारत में बिजली से चलने वाले वाहनों यानी इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य क्या है? यह एक वो सवाल है, जो इन दिनों हर किसी के मन में उठ रहा है। सरकार के दावों और मौजूदा हालातों को देखते हुए एक असमंजस की स्थिति पैदा होती जा रही है। एक ओर जहां सरकार का दावा है कि साल 2030 तक भारत में बेंची जाने वाली सभी कारें इलेक्ट्रिक होंगे, वहीं मौजूदा समय में हुईं तमाम रिसर्च सरकार के इन दावों पर सवालिया निशान खड़े करती हैं।


तो आखिर कैसा होगा भारत में इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य? इसे समझने के लिए पहले आपको कुछ बुनियादी तथ्यों के बारे में जानकारी कर लेनी चाहिए। वर्तमान में भारत में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों का ही बोलबाला है, इससे यह समझना आसान है कि भारत फिलहाल इन कारों के लिए ही मुफीद है।


भारत आने वाले 10 सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुगम होगा या नहीं, ये कई बातों पर निर्भर करता है। सरकार का कहना है कि भारत में 2030 तक पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले वाहनों की बिक्री नहीं होनी चाहिए। देश में इन कारों के भविष्य को लेकर कुछ बड़ी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।

लिथियम आयन बैट्री में मुश्किल

इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम आयन बैट्री ही भारत में इन कारों के विकास का रोड़ा बनी हुई है। दरअसल लिथियम आयन बैट्री के निर्माण में जो धातुएँ इस्तेमाल होती हैं, उन्हे भारत को बड़े पैमाने पर आयात करना होगा।


इन बैटरियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली धातुएँ जैसे लिथियम, कोबाल्ट, मैगनीज़ और निकेल का भंडार कई अलग अलग देशों में है। विश्व का 60 प्रतिशत लिथियम भंडार बोलिविया और चिली में है, जबकि 60 प्रतिशत कोबाल्ट भंडार कांगो में है।


लिथियम आयन बैट्री में ये सभी धातु कुछ महत्वपूर्ण काम करते हैं, जैसे लिथियम बैट्री को चार्ज करता है, जबकि कोबाल्ट बैट्री को अधिक गर्म होने से बचाता है। इन खनिजों की कम उपलब्धता के चलते ही लिथियम आयन बैट्री की कीमतों पर भारी असर पड़ता है।


हालांकि चीन ने भविष्य को देखते हुए इन देशों में इन धातुओं की खदानों को खरीद लिया है, ऐसे में चीन को इन धातुओं के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना होगा, जबकि भारत को बड़े पैमाने पर इन्हे आयात करना होगा।

कीमत है बड़ा फैक्टर

भारत में बिकने वाले 55 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल-डीजल कारों की औसत कीमत 5.6 लाख रुपये है, जबकि हाइवे पर लंबी दूरी तय कर सकने वाली इलेक्ट्रिक कारों की कीमत इन पेट्रोल-डीजल कारों की औसत कीमत से कई गुना ज्यादा है, ऐसे में निकट भविष्य में लोग बड़ी तादाद में इलेक्ट्रिक कारों को चुनेंगे ऐसा कह पाना खासा मुश्किल है। सरकार को इन कारों को आम जनता के लिए सुलभ बनाने के लिए इनकी कीमतों को कम करने पर खासा ज़ोर देना होगा।

पहले देना होगा प्रशिक्षण

भारत में अभी कारों की मरम्मत करने वाले मकैनिक परंपरागत ईंधन से चलने वाले वाहनों के लिए प्रशिक्षित हैं, लेकिन अगर भारत अगले 10 सालों में इतने बड़े पैमाने पर देश में इलेक्ट्रिक कारों का संचालन करना चाहता है, तो उसे काफी बड़े स्तर पर इन मकैनिकों को इलेक्ट्रिक कारों के हिसाब से प्रशिक्षित करना होगा।


गौरतलब है कि परंपरागत ईंधन से चलने वाली वाली कारों के निर्माण में काफी बड़ी तादाद में छोटे और बड़े हजारों पुर्जों का इस्तेमाल होता है, जिनके निर्माण में जुटी छोटी-बड़ी इकाइयों में काफी बड़ी तादाद में लोग काम कर रहे हैं। यदि निकट भविष्य में भारत इलेक्ट्रिक कारों कि तरफ रुख करता है तो इन इकाइयों में काम कर रहे लोगों के लिए भी रोजगार का संकट पैदा होगा, ऐसे में सरकार को चाहिए कि पहले वो इन कामगारों को भविष्य की योजनाओं के लिए हिसाब से प्रशिक्षण उपलब्ध कराये।

बेसिक इनफ्रास्ट्रक्चर है अनुपलब्ध

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भारत में अभी पर्याप्त संख्या में इन कारों के लिए चार्जिंग स्टेशन की अनुपलब्धता है।

पिछले साल आए आंकड़ों के अनुसार 2018 तक भारत में इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करने के लिए 650 चार्जिंग स्टेशन की स्थापना की गई है, वहीं इसी समय चीन के पास करीब 4 लाख 56 हज़ार से भी अधिक चार्जिंग स्टेशन थे। मारुति सुज़ुकी की एक रिपोर्ट यह बताती हैं कि भारत में 60 प्रतिशत कार मालिकों के पास उनकी खुद की पार्किंग व्यवस्था नहीं है, ऐसे में इन सभी लोगों के लिए इन कारों के लिए चार्जिंग की व्यवस्था कर पाना खासा मुश्किल साबित होगा।

सरकार की कोशिश

देश में जहां आज प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है, ऐसे में सरकार इलेक्ट्रिक वाहन लाकर कुछ हद तक देश को प्रदूषण से मुक्ति दिलाना चाहती है। सरकार ने इलेक्ट्रिक कारों को प्रमोट करने के लिए कर में भारी छूट दी हुई है।


साल 2030 तक अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने अपने कदम को आगे बढ़ाते हुए इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाली जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर जहां 5 प्रतिशत कर दिया गया है, वहीं इलेक्ट्रिक कार को खरीदने के लिए लोन लेने वाले लोगों को भी सरकार की तरफ से इन्कम टैक्स में 1.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त छूट प्रदान की जा रही है।