AI, IoT और Make in India से कैसे बदल रहा है कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर
भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रहा है. AI, IoT, स्मार्ट अप्लायंसेज, सस्टेनेबिलिटी, Make in India और PLI जैसी पहलें इस इंडस्ट्री का भविष्य तय कर रही हैं. जानिए Vision 2030, बाजार की ग्रोथ और कंपनियों के सामने मौजूद नए अवसर.
देश की कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडस्ट्री इस समय बदलाव के एक बहुत ही खास मोड़ पर है. आने वाले टाइम में तेजी से बढ़ता डिजिटलाइजेशन, कंज्यूमर की बदलती जरूरतें और डोमेस्टिक लेवल पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने जैसी चीजें इस पूरे सेक्टर का फ्यूचर तय करेंगी. जैसे-जैसे देश की इकोनॉमी डिजिटल रूप ले रही है, इस इंडस्ट्री का फोकस प्रोडक्ट बेचने से हटकर अब स्मार्ट, कनेक्टेड और लंबे टाइम तक यूजर्स को फायदा पहुंचाने वाले डिवाइस बनाने पर हो गया है.
आज का कंज्यूमर केवल अप्लायंसेज नहीं चाहता, बल्कि वह ऐसे एडवांस डिवाइसेज की तलाश में है जो स्मार्ट होने के साथ साथ और उनकी डेली लाइफस्टाइल में आसानी से फिट हो सकें.
बदलते हुए इस दौर की सबसे बड़ी वजह देश में युवाओं की बढ़ती आबादी, लोगों की अच्छी कमाई, बहुत तेजी से हो रहा शहरीकरण और इंटरनेट की आसान रीच है. आज के डिजिटल मीडिया के दौर में होम अप्लायंस की शॉपिंग का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. अब चाहे टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन लेनी हो या एसी लेना हो, लोग खरीदने का फैसला करने से पहले इंटरनेट पर रिसर्च करते हैं. वे ऑनलाइन जाकर दूसरों के रिव्यू पढ़ते हैं, वीडियो देखते हैं, डिजिटल कंटेंट और ओमनीचैनल रिटेलिंग से अपनी राय बनाते हैं.
इसका मतलब ये है कि आज का ग्राहक किसी दुकान या शोरूम जाने से पहले ही अपनी शॉपिंग के प्रोसेस में पूरी तरह जुड़ जाता है.
स्मार्ट टेक्नोलॉजी ने बदली कंज्यूमर की चॉइस
टेक्नोलॉजी आज के समय में इस पूरे बदलाव की सबसे खास ताकत बन चुकी है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी टेक्नोलॉजी कंज्यूमर की डिमांड को पूरी तरह बदल रही हैं. इनकी हेल्प से अब ऐसे इंटेलिजेंट और कनेक्टेड अप्लायंसेज बन रहे हैं, जो इस्तेमाल करने वाले के बिहेवियर और उनकी पसंद-नापसंद को खुद लर्न करके उसी हिसाब से काम करते हैं.
आजकल लोगों के बीच स्मार्ट होम सिस्टम बहुत पॉपुलर हो रहे हैं, क्योंकि इन्हें यूज करना बहुत ही आसान है, इनके काम ऑटोमैटिक होते हैं, इन्हें कहीं भी बैठकर अपने स्मार्टफोन से ऑपरेट किया जा सकता है. खास बात तो ये है कि इस्तेमाल करने वाला इसे अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज भी कर सकता है. इन इन्वेंशन और लगातार हो रहे बदलावों की वजह से अब लोग पुराने प्रॉडक्ट को जल्दी बदलकर नए और ज्यादा स्मार्ट अप्लायंसेज खरीद रहे हैं. इससे कंपनियों को भी लगातार कुछ नया और अलग करने का मौका मिल रहा है, जिससे वे ऐसे प्रोडक्ट्स ला पा रही हैं जो लोगों की लाइफ को और कम्फर्टेबल बना रहे हैं.

सांकेतिक चित्र
सस्टेनेबिलिटी एक कंपीटीटिव एडवांटेज की तरह
डिजिटल चेंज के साथ-साथ अब सस्टेनेबिलिटी भी बिजनेस की ग्रोथ और मार्केट में टिके रहने का एक बड़ा जरिया बन गई है. आज का स्मार्ट कंज्यूमर कोई भी सामान खरीदते समय सिर्फ उसके फीचर्स नहीं देखता, वो ये भी देखता है कि वह प्रोडक्ट कितना एनवायरमेंट फ्रेंडली है और काम करने में कितना एफिसिएंट है.
बिजली की बढ़ती खपत और एनवायरमेंट की चिंता को देखते हुए अब कंपनियों के लिए भी यह भी जरूरी हो गया है कि वे ऐसे स्मार्ट अप्लायंसेज बनाएं जो बिजली बहुत कम खाएं और उनसे ऐसा वेस्ट न निकले जिसे रीसायकल न किया जा सके.
मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम
इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग के फील्ड में भी इस समय एक बहुत बड़ा चेंज देखने को मिल रहा है. इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और लॉजिस्टिक के सेक्टर में अच्छा खासा इनवेस्टमेंट किया जा रहा है, जिससे देश न केवल आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है बल्कि ग्लोबल मार्केट से मुकाबला करने के लिए भी तैयार हो रहा है.
इसके लिए कई बड़े और जरूरी कदम उठाए गए हैं, जैसे कि उत्तर प्रदेश के जेवर में एक बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट की शुरुआत होना, और भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' व प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी स्कीम. ये सभी मिलकर देश में एक मजबूत, लंबे समय तक चलने वाले और मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम को तैयार कर रहे हैं.
डेवलपमेंट की उम्मीद जगाने वाला नजरिया
मार्केट का फ्यूचर और इसके आगे बढ़ने की उम्मीद इन सभी बदलावों को और मजबूती देती हैं. अभी देश की जीडीपी (GDP) में कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर का योगदान 0.6 फीसदी है, जिसके फाइनेंशियल ईयर 2029 (FY29) तक 11% से ज्यादा की सालाना कंपाउंड ग्रोथ (CAGR) के साथ ₹3 लाख करोड़ (3000000000000 रुपये) के आंकड़े को पार करने का अनुमान है.
पूर्वानुमानों के अनुसार, घरों में इन अप्लायंसेज का इस्तेमाल बढ़ने, महंगे और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की तरफ लोगों का ट्रेंड होने, पुराने प्रोडक्ट्स को जल्दी बदलने की हैबिट और स्मार्ट अप्लायंसेज की बढ़ती डिमांड की वजह से भारत फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कंज्यूमर ड्यूरेबल मार्केट बन सकता है.
इसके अलावा, सरकार की कुछ बड़ी स्कीम जैसे 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) और 'प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना' भी इस सेक्टर में सामान की डिमांड को और बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं.
आगे की राह
इस सेक्टर के सामने आगे बढ़ने के मौके तो बहुत हैं, लेकिन लगातार मिलने वाली कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को कितने स्मार्ट तरीके से और तेजी से अपनाती हैं. अब कंपनियों को बिजनेस बढ़ाने के लिए डेटा एनालिसिस करना होगा, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कंज्यूमर तक अपनी पहुंच मजबूत करनी होगी, हर ग्राहक की चॉइस के हिसाब से उन्हें सर्विस देनी होगी और देश में ही सामान की सप्लाई का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना होगा.
आज के दौर में डिजिटल टेक्नोलॉजी सिर्फ बिजनेस का एक हिस्सा नहीं रह गई है, बल्कि यह इनोवेशन को जन्म देने और यूजर एक्सपीरिएंस को बेहतरीन बनाने का सबसे जरूरी जरिया बन चुकी है.
फ्यूचर पर नजर डालें तो 'विजन 2030' के तहत इंडिया टेक्नोलॉजी इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग की अपनी कैपेबिलिटी के दम पर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के फील्ड में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा. तेजी से बढ़ते डिजिटलाइजेशन और यूजर की बदलती चॉइस को देखते हुए इस इंडस्ट्री का फ्यूचर उन्हीं कंपनियों के हाथ में होगा जो इंटेलिजेंट और ग्रीन प्रोडक्ट्स बनाएंगी.
आज की इस डिजिटल इकोनॉमी में मार्केट में दूसरों से आगे बने रहने का मतलब सिर्फ सही और अच्छा प्रोडक्ट बनाना नहीं है, बल्कि कंज्यूमर को शॉपिंग से लेकर यूज करने तक का एक शानदार एक्सपीरिएंस देना भी है.
(images: AI generated)
(लेखक Thermocool Home Appliances में Operations विभाग के डायरेक्टर हैं. आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं. YourStory का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है.)
Edited by Ravi Pareek



