योगी सरकार ने Uttar Pradesh Startup Mission को दी मंजूरी, फाउंडर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी पूरी मदद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ को मंजूरी दे दी गई. यह मिशन राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए एक केंद्रीय एजेंसी के रूप में काम करेगा. मिशन की गवर्निंग बॉडी की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे.
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन (Uttar Pradesh Startup Mission) को मंजूरी दे दी गई. यह मिशन राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए एक केंद्रीय एजेंसी के रूप में काम करेगा.
अब स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं, इनक्यूबेटर्स, निवेशकों और शैक्षणिक संस्थानों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. उन्हें एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी जरूरी सुविधाएं और सहयोग मिलेगा.
अब तक उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप से जुड़ी योजनाएं और सेवाएं अलग-अलग विभागों के माध्यम से संचालित होती थीं. नए स्टार्टअप मिशन के आने से इन सभी प्रयासों को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा. इससे योजनाओं का बेहतर समन्वय होगा और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे.
सरकार ने इस मिशन को एक स्वायत्त संस्था के रूप में बनाने का फैसला किया है. इसके संचालन की जिम्मेदारी एक उच्च स्तरीय व्यवस्था के तहत होगी. मिशन की गवर्निंग बॉडी की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे. वहीं एक कार्यकारी समिति रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी.
सरकार का मानना है कि इससे स्टार्टअप से जुड़े फैसलों में तेजी आएगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी.
इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों को एक मंच पर लाएगा. इसमें स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, निवेशक, उद्योग जगत के दिग्गज और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम करेंगे.
स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटरशिप और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी. इनक्यूबेटर्स को संस्थागत सहयोग मिलेगा. निवेशकों को बेहतर स्टार्टअप्स तक पहुंच आसान होगी. उद्योग जगत को नई तकनीक और प्रतिभाओं से जुड़ने का मौका मिलेगा. वहीं विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में होने वाले शोध को व्यवसाय में बदलने का रास्ता भी आसान होगा.
सरकार का कहना है कि यह मिशन केवल शुरुआती आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को शुरुआत से लेकर बड़े स्तर तक पहुंचाने में हर चरण पर सहयोग देना है.
इसके तहत नए उद्यमियों को अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन मिलेगा. तेजी से आगे बढ़ने वाले स्टार्टअप्स के लिए एक्सेलरेटर कार्यक्रम चलाए जाएंगे. आवेदन और अन्य प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे. साथ ही इनोवेशन सेंटर भी विकसित किए जाएंगे, जहां नए विचारों को आकार दिया जा सके.
सरकार इस मिशन के जरिए स्टार्टअप संस्कृति को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती. इसका फोकस ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इनोवेशन और उद्यमिता को पहुंचाना है.
सरकार का मानना है कि अगर छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को सही मार्गदर्शन, डिजिटल सुविधाएं और जरूरी संसाधन मिलें तो वे स्थानीय समस्याओं का समाधान करने वाले सफल कारोबार खड़े कर सकते हैं. इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को उसी कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिली, जिसमें राज्य की नई डेटा सेंटर नीति समेत कई विकास संबंधी प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई. इन सभी फैसलों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाना है.
आने वाले महीनों में राज्य का सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग मिशन के संचालन से जुड़े विस्तृत दिशा निर्देश जारी करेगा. इसके बाद मिशन का निदेशालय भी स्थापित किया जाएगा.
सरकार को उम्मीद है कि यह नया मिशन उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देगा. यदि यह योजना अपने उद्देश्यों के अनुसार लागू होती है तो आने वाले वर्षों में देश के कई बड़े स्टार्टअप उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों और गांवों से भी निकल सकते हैं.



