India Handpicked: कारीगरों का हुनर किताब के पन्नों पर
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल के तहत 'India Handpicked' किताब प्रकाशित हुई है. इसे YourStory और The Bharat Project की फाउंडर-CEO श्रद्धा शर्मा और छवि महाजन ने लिखा है. यह किताब भारत की जीवित धरोहर को सामने लाती है. इसमें शिल्पकला और कारीगरों की सदियों पुरानी परंपराओं की कहानियां हैं.
“भारत की कहानी न तो केवल एक भाषा में लिखी जाती है और न ही एक ही परंपरा में कही जाती है. यह हमारे वस्त्रों की बुनावट, धातुओं की चमक और शिल्पकला की लय में जीवित है.”
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के ये शब्द 'इंडिया हैंडपिक्ड' (India Handpicked) किताब के सार को सामने लाते हैं. यह किताब YourStory और The Bharat Project की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा तथा छवि महाजन ने मिलकर लिखी है. यह किताब भारत की कला को दुनियाभर के सामने प्रमुखता से उजागर करने का प्रयास है—आजमगढ़ से नवसारी तक की यात्रा कराते हुए यह बताती है कि भारत के शिल्प केवल संग्रहालयों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवित परंपराएं हैं जो हर रोज हमारे जीवन और संस्कृति का हिस्सा हैं.
भारत अनेक शिल्पकलाओं का घर है, जहां हर क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है—जो वहां की भौगोलिक स्थिति, इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों से निर्मित हुई है. हिमाचल की कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग्स हों जो पहाड़ी कला की शाही धड़कन को दर्शाती हैं, कश्मीर के रेशमी कालीन हों या उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की खुर्जा पॉटरी—हर शिल्प अपनी क्षेत्रीय पहचान और करोड़ों कारीगरों की आजीविका का आधार है.
श्रद्धा शर्मा कहती हैं—“YourStory और The Bharat Project में हमारा उद्देश्य हमेशा उन आवाजों को सामने लाना रहा है जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है. ये शिल्प केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं. ये हमारे उद्यमशीलता की भावना, काम की गरिमा और परंपरा में जड़ें जमाए हुए पहचान के जीते-जागते उदाहरण हैं.”
भारत सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल के सहयोग से प्रकाशित 'इंडिया हैंडपिक्ड' किताब भारत के कई कारीगरों की कहानियों को जीवंत रूप में पेश करती है.
वन डिस्ट्रिक्ट, वन स्टोरी
ODOP (One District One Product) पहल भारत सरकार का एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य देशभर में समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को सक्षम बनाना है. पीयूष गोयल बताते हैं—“जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ODOP की शुरुआत की गई थी, तब हमारा उद्देश्य सरल लेकिन परिवर्तनकारी था—हर जिले की अनूठी धरोहर को राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ारों से जोड़ना. आज ODOP आत्मनिर्भर भारत का अहम स्तंभ है, जो रोज़गार दे रहा है, कारीगरों को सशक्त बना रहा है और ‘लोकल’ को ‘ग्लोबल’ तक पहुंचा रहा है.”
अब तक ODOP ने देश के 761 जिलों से कुल 1102 उत्पादों की पहचान की है. इन उत्पादों का चयन राज्य सरकारें या केंद्र शासित प्रदेश वहां की ज़मीनी हकीकत, GI टैग और जिला-निर्यात हब से जुड़े उत्पादों को ध्यान में रखते हुए करती हैं.
इस पहल के अंतर्गत 2022 में जापान में इंडिया मैंगो फेस्टिवल, 2021 में रूस के साथ सुई धागा बायर-सेलर मीट, क्रोएशिया और कनाडा के संग्रहालयों में ODOP उत्पादों की प्रदर्शनी और 2023 में स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारतीय पवेलियन में ODOP उत्पादों का प्रदर्शन किया गया.

ज़मीनी असर और बदली हुई तस्वीर
ODOP का असर केवल बाज़ार तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में ज़मीनी स्तर पर भी दिख रहा है. तेलंगाना के भूदन पोचमपल्ली की पोचमपल्ली इकत को नई पहचान और बाज़ार मिला है. वाराणसी की लाख की कारीगरी (लैकरवेयर), जो कभी खत्म होती जा रही थी, आज 40 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार कर रही है और जापान से कनाडा तक निर्यात हो रही है.
उत्तर प्रदेश के सीतापुर की हैंडक्राफ्टेड दरी अब पेरिस के शोरूम्स और वैश्विक सम्मेलनों तक पहुंच चुकी है, यहां तक कि IKEA ने भी इन दरियों को खरीदा है. सूरत की सदेली वुडवर्क नई प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन वर्कशॉप्स की वजह से युवा कारीगरों के बीच फिर जीवित हो रही है.
आगरा की पारचिनकारी (मार्बल इनले) की वजह से 2020 से 2021 के बीच 407 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ और आज उत्तर प्रदेश भारत के कुल स्टोनक्राफ्ट उत्पादन का 62% योगदान दे रहा है.
कूटनीति और शिल्प का संगम
ODOP सांस्कृतिक गर्व और सॉफ्ट डिप्लोमेसी को जोड़ने का अद्भुत तरीका है. कई बार भारतीय शिल्प विश्व नेताओं को राज्य उपहार के रूप में भी दिए गए हैं. 2022 के G20 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को अहमदाबाद की माता नी पछेड़ी भेंट की. उसी साल G7 समिट पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कन्नौज का अत्तर दिया गया.
2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर अमेरिकी फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन को कश्मीरी पश्मीना शॉल भेंट की गई. 2025 में G7 समिट के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को ढोकरा घोड़े की मूर्ति दी गई.
वहीं, 2025 में ही क्रोएशिया के राष्ट्रपति को पटचित्र पेंटिंग उपहार में दी गई. ये उपहार सिर्फ शिल्प नहीं थे, बल्कि भारत की जीवंत कहानियां और कूटनीति का हिस्सा थे.
DPIIT के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया कहते हैं—“ODOP केवल प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की कहानी है. हर जिला अपने कारीगरों के हाथों से अपनी पहचान गढ़ता है. जब ये प्रोडक्ट्स विदेशी नेताओं को उपहार में दिए जाते हैं तो वे केवल सुंदर वस्तुएं नहीं होते, बल्कि भारत की आत्मा और पहचान को विश्व मंच पर पहुंचाते हैं.”
नीति से आगे की सोच
ODOP केवल एक नीति नहीं है, बल्कि इतिहास, कहानी, अर्थव्यवस्था और पहचान का संगम है. यह केवल महानगरों में ही नहीं बल्कि छोटे कस्बों और गांवों तक विकास की रोशनी पहुंचा रहा है.
श्रद्धा शर्मा अपने नोट में लिखती हैं—“ODOP केवल कला या वस्तुओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह लोगों की कहानी है. यह धैर्य, विरासत और उस मौन गर्व की कहानी है जो हर कारीगर के हाथों में जीवित है. हर कपड़े की बुनावट, हर पत्थर की नक्काशी और हर अत्तर की बूंद में एक कहानी है—धैर्य, परंपरा और अपनी कला के प्रति प्रेम की.”
(Translated by: रविकांत पारीक)



