IPO की राह पर स्टार्टअप्स, पर VC फंडिंग में 18% की गिरावट
2025 के पहले 9 महीनों में भारतीय स्टार्टअप्स की वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग 18% घटकर $8.6 बिलियन पर आ गई. फिनटेक सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश आया, जबकि AI स्टार्टअप्स पीछे रह गए. मुंबई फंडिंग में सबसे आगे रहा. पढ़िए 2025 की स्टार्टअप फंडिंग रिपोर्ट.
भारतीय स्टार्टअप्स में वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है. 2025 के पहले 9 महीनों में फंडिंग 18% घटकर 8.6 बिलियन डॉलर पर आ गई. इस दौरान कुल 926 डील्स हुईं. जबकि 2024 की इसी अवधि में स्टार्टअप्स ने 10.6 बिलियन डॉलर जुटाए थे.
विश्लेषण से पता चलता है कि आर्थिक अनिश्चितताएं, वैश्विक मंदी और निवेशकों की सतर्कता ने भारतीय स्टार्टअप्स में फंडिंग को प्रभावित किया है. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे साल की फंडिंग 2024 के स्तर को पार करना मुश्किल होगा.
तिमाही फंडिंग के रुझान
2025 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में कुल 2.8 बिलियन डॉलर फंडिंग हुई. यह 2024 की इसी अवधि की तुलना में 32% कम है. दूसरी तिमाही की तुलना में भी इसमें 12.5% की गिरावट आई.

इस गिरावट का मुख्य कारण आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक निवेश प्रवाह में कमी माना जा रहा है. हालांकि, सितंबर में 1.2 बिलियन डॉलर की फंडिंग एक सकारात्मक संकेत है. इस साल 9 में से 5 महीनों में फंडिंग 1 बिलियन डॉलर से ऊपर रही, जो यह दर्शाता है कि निवेशक अब भी चुनिंदा स्टार्टअप्स में पैसा लगाने को तैयार हैं.
किस स्टेज और सेक्टर में आया पैसा?
तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा फंडिंग लेट-स्टेज स्टार्टअप्स को मिली. इसके बाद अर्ली-स्टेज और फिर ग्रोथ स्टेज का नंबर रहा. ग्रोथ और लेट-स्टेज में निवेश कम होने का मतलब है कि बड़े निवेशक अभी जोखिम लेने से बच रहे हैं.

सेक्टर की बात करें तो फिनटेक सबसे मजबूत और आकर्षक सेगमेंट बना हुआ है. इसके बाद D2C और हेल्थटेक सेक्टर ने निवेशकों को आकर्षित किया.

वहीं, AI स्टार्टअप्स में भारत पीछे है. अमेरिका में AI स्टार्टअप्स सबसे ज्यादा निवेश खींच रहे हैं, लेकिन भारत में तीसरी तिमाही में AI स्टार्टअप्स ने सिर्फ 100 मिलियन डॉलर जुटाए. इसका कारण है कि भारत में AI स्टार्टअप्स की संख्या कम है और निवेशक अभी तक इसे मुख्य धारा में नहीं ले आए हैं.
कौन से शहर ने बाजी मारी?
तीसरी तिमाही में मुंबई सबसे अधिक फंडिंग पाने वाला शहर रहा. इसके बाद बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर का नंबर रहा. मुंबई में फाइनेंशियल और फिनटेक स्टार्टअप्स का मजबूत नेटवर्क होने की वजह से निवेशक अधिक आकर्षित हुए.
चेन्नई, हैदराबाद और पुणे जैसे हब्स में VC निवेश अभी भी सीमित है. यह संकेत देता है कि भारत में निवेश का केंद्र अभी भी तीन मुख्य शहरों तक सीमित है और नए हब्स में निवेश बढ़ने की संभावना अभी है.

स्टार्टअप्स की उम्मीदें और भविष्य
कुल मिलाकर तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं है. आर्थिक अनिश्चितताएं और निवेश प्रवाह में कमी ने भारतीय स्टार्टअप्स की चुनौतियों को बढ़ाया है. फिर भी उद्यमी हिम्मत नहीं हार रहे हैं.
एक सकारात्मक संकेत यह है कि IPO के जरिए स्टार्टअप्स पब्लिक मार्केट में प्रवेश कर रहे हैं. इससे उन्हें नई पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, कुछ स्टार्टअप्स अपने व्यवसाय को स्थिर करने और नए बाजारों में विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक और घरेलू आर्थिक स्थिति सुधरती है, तो 2026 भारतीय स्टार्टअप्स के लिए बेहतर साल साबित हो सकता है.
(Translated by: रविकांत पारीक)



