किराएदारों की किस्मत बदलने वाले स्टार्टअप RentenPe की कहानी
RentenPe की कहानी जानें, जिसे मुंबई की सारिका शेट्टी ने शुरू किया. BMW की नौकरी छोड़कर उन्होंने किराया चुकाने की आदत को क्रेडिट सिस्टम से जोड़ने का अनोखा समाधान निकाला. R Score™ और R Card™ से किराएदारों को मिलता है बेहतर क्रेडिट स्कोर और आसान लोन का रास्ता.
भारत में रेंटल हाउसिंग सेक्टर बेहद बड़ा है. देश की कुल आबादी का लगभग 30% हिस्सा किराए के घरों में रहता है. इसमें कामकाजी युवा, स्टूडेंट्स और माइग्रेंट फैमिलीज़ शामिल हैं. हर महीने लाखों लोग घर का किराया देते हैं. यह रकम अक्सर उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा होती है.
फिर भी, किराए का कोई हिसाब-किताब क्रेडिट सिस्टम में नहीं होता. जब कोई व्यक्ति लोन लेने जाता है, तो उसकी किराया चुकाने की आदत का कोई सबूत नहीं होता. ऐसे में, मेहनत से किराया देने वाला भी लोन से वंचित रह जाता है.
इसी दर्द को महसूस किया मुंबई की सारिका शेट्टी (Sarika Shetty) ने. एक निजी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि क्यों न किराए को भी वित्तीय दुनिया में जगह दी जाए. और इस सोच से जन्म हुआ RentenPe का. साल 2022 में सारिका ने RentenPe की स्थापना की थी. इसका हेडक्वार्टर मुंबई में है और बेंगलुरु में भी ऑफिस है.
BMW की नौकरी छोड़ बनीं ऑन्त्रप्रेन्योर
सारिका ने अपना करियर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से शुरू किया. उन्होंने Volkswagen और BMW जैसी नामचीन कंपनियों में लीडरशिप रोल्स निभाए. इस दौरान उन्हें कॉर्पोरेट सेक्टर का गहरा अनुभव मिला. आगे चलकर उन्होंने Golden Gate University, San Francisco से MBA किया, जहाँ उन्होंने रणनीतिक नेतृत्व और उद्यमिता पर फोकस किया. अमेरिका में पढ़ाई ने उनके सोचने का नजरिया बदला.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, सारिका बताती हैं, “मेरे लिए यह बहुत अहम था कि मैं अपनी पढ़ाई और अनुभव को केवल नौकरी तक सीमित न रखूँ. मैं ऐसा कुछ करना चाहती थी जिससे लोगों की जिंदगी में असली बदलाव आए.”
वह आगे कहती हैं, “MBA के दौरान मुझे समझ आया कि असली नेतृत्व वही है जो समस्याओं का हल निकालकर समाज को आगे बढ़ाए. मैंने तय किया कि मैं भी अपनी क्षमताओं से किसी बड़े मुद्दे को हल करूँगी.”

बैंक ने नहीं दिया होम लोन, किया स्टार्टअप
सारिका बताती हैं कि एक बार उन्होंने होम लोन के लिए अप्लाई किया, लेकिन बैंक ने उनकी रिक्वेस्ट ठुकरा दी. यह बात उन्हें चुभ गई क्योंकि वे एक अच्छी सैलरी पाने वाली प्रोफेशनल थीं और हर महीने समय पर किराया भरती थीं. उनकी अच्छी सैलरी और स्थिर नौकरी के बावजूद बैंक ने उन्हें लोन देने से मना कर दिया.
वह याद करती हैं, “जब मेरा लोन रिजेक्ट हुआ तो मुझे झटका लगा. मैंने सोचा कि मैं जैसे हज़ारों-लाखों लोग हर महीने किराया देते हैं, लेकिन इसका कोई फायदा क्यों नहीं मिलता. उसी पल मैंने ठान लिया कि मुझे इस समस्या का हल निकालना है.”
भारत में लगभग 2 करोड़ घर किराए पर रहते हैं. इनका खर्च उनकी आमदनी का लगभग 30% होता है. फिर भी, उनके पास कोई डिजिटल रेंटल आइडेंटिटी या रेंटल हिस्ट्री नहीं होती. मकान मालिक भी अक्सर किराएदार की विश्वसनीयता जांचने में असमर्थ रहते हैं.
सारिका बताती हैं, “किराया हर घर का बड़ा खर्च है, लेकिन यह बैंक या वित्तीय संस्थाओं के लिए अदृश्य रहता है. हम चाहते हैं कि किराया भी उतना ही मायने रखे जितना किसी लोन की किस्त. हमारा उद्देश्य था कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म बने जहाँ किराया भरोसेमंद, डिजिटल और फायदेमंद हो.”
R Score और R Card: क्या है इनकी ताकत?
RentenPe ने भारत में पहली बार Rent Credit Score (R Score™) और Residence Card (R Card™) की शुरुआत की.
R Score™ किराएदारों के लिए वैसा ही है जैसा CIBIL स्कोर लोन लेने वालों के लिए होता है. यदि कोई किराएदार हर महीने समय पर किराया देता है, तो उसका R Score™ बढ़ता है. इसका सीधा फायदा उन्हें लोन लेने में मिलता है. R Score™ समय पर किराया देने की आदत को एक क्रेडिट रिकॉर्ड की तरह दिखाता है. यह बैंक लोन या होम लोन लेते समय काम आता है.
R Card™ किरायेदार की डिजिटल पहचान है. यह एक तरह का ब्लू टिक है जो दिखाता है कि किरायेदार का रेंटल हिस्ट्री और पहचान सत्यापित है.यह एक तरह का डिजिटल पहचान पत्र है जो दिखाता है कि किराएदार वेरिफाइड है. इसमें उसका रेंटल एग्रीमेंट, आधार जैसी सरकारी आईडी और पेमेंट हिस्ट्री जुड़ी होती है.
सारिका कहती हैं, “हमने R Score™ और R Card™ इसलिए बनाए क्योंकि हम चाहते थे कि किराया देना सिर्फ खर्च न हो, बल्कि यह आपके भविष्य की क्रेडिट हिस्ट्री भी बनाए.”

बिज़नेस मॉडल
RentenPe का बिज़नेस मॉडल इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें किराएदार और मकान मालिक दोनों को फायदा हो. किरायेदार RentenPe ऐप से किराया चुका सकते हैं—चाहे UPI से हो, कार्ड से हो या डिजिटल पेमेंट मोड से. बदले में उन्हें कैशबैक और ऑफर मिलते हैं. सबसे अहम बात यह है कि उनका R Score™ लगातार बढ़ता है, जिससे उन्हें आगे चलकर होम लोन या पर्सनल लोन में आसानी होती है.
वहीं मकान मालिकों को मिलते हैं—वेरिफाइड टेनेंट प्रोफाइल, जल्दी किराया पाने के विकल्प, जीरो डिपॉजिट सॉल्यूशन और एक स्ट्रक्चर्ड पेमेंट रिकॉर्ड.
“हमारा मॉडल ऐसा है जिसमें टेनेंट और लैंडलॉर्ड दोनों का फायदा हो. यह एक विन-विन सिचुएशन है,” सारिका बताती हैं.
आज हजारों किरायेदार हर महीने RentenPe से किराया चुका रहे हैं. मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और दिल्ली-NCR जैसे शहरों में तेजी से इसका इस्तेमाल बढ़ा है.
अब तक कंपनी ने लगभग $1 मिलियन का मासिक रेंट ट्रांज़ैक्शन वैल्यू (GTV) प्रोसेस किया है. लगभग 20,000 टेनेंट्स (किराएदार) और 9,000 लैंडलॉर्ड्स (मकान मालिक) प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं. कंपनी ने MyGate जैसे प्रॉपर्टी मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म्स के साथ भी इंटीग्रेशन किया है.
सारिका कहती हैं, “हमें सबसे ज्यादा खुशी तब मिलती है जब कोई टेनेंट हमें बताता है कि R Score™ की वजह से उसे आसानी से लोन मिल गया.”
फंडिंग और रेवेन्यू
स्टार्टअप अभी तक ज्यादातर बूटस्ट्रैप्ड रहा है. लेकिन कंपनी ने परिवार और दोस्तों से शुरुआती दौर में लगभग $2 मिलियन जुटाए.
सारिका बताती हैं, “हमारे निवेशक सिर्फ फंडिंग देने तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने हमें बैंकों और फिनटेक पार्टनर्स से जोड़ने में मदद की, रेग्युलेटरी सलाह दी और हमारी मार्केट में विश्वसनीयता बढ़ाई.”
रेवेन्यू मॉडल के बारे में समझाते हुए, सारिका बताती हैं, “हमारा रेवेन्यू मॉडल ट्रांज़ैक्शन फीस और लोन कमीशन पर आधारित है. मकान मालिकों को मिलने वाली सेवाएँ और क्रेडिट ब्यूरो के साथ हमारी साझेदारी भी हमारी आय के स्रोत हैं.”
हालांकि उन्होंने रेवेन्यू के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया.

RentenPe की टीम
चुनौतियां और सीख
किराया देने का तरीका भारत में लंबे समय तक नकद पर आधारित रहा है. इसे डिजिटल बनाना आसान नहीं था.
सारिका बताती हैं कि सबसे बड़ी चुनौती थी लोगों को डिजिटल रेंट पेमेंट के फायदे समझाना.
वह कहती हैं, “भारत में आज भी बहुत लोग किराया नकद में देना पसंद करते हैं. उन्हें यह समझाना कि डिजिटल पेमेंट से उनका फायदा है, आसान नहीं था. लेकिन धीरे-धीरे लोग जागरूक हो रहे हैं.”
इसके अलावा, फिनटेक रेग्युलेशन और सीमित टीम के साथ प्रोडक्ट स्केल करना भी चुनौती थी. लेकिन टीम के धैर्य और विज़न से कंपनी आगे बढ़ती रही.
भविष्य की योजनाएं
कंपनी का लक्ष्य है कि शॉर्ट-टर्म में टियर-1 और टियर-2 शहरों में तेजी से विस्तार किया जाए. साथ ही, क्रेडिट ब्यूरो और फिनटेक कंपनियों के साथ और साझेदारी की जाए.
लॉन्ग-टर्म में, कंपनी UAE और खाड़ी देशों तक विस्तार करना चाहती है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग किराए के घरों में रहते हैं.
सारिका का सपना है, “हम चाहते हैं कि आने वाले समय में R Score™ क्रेडिट सिस्टम का हिस्सा बने. जैसे आज लोग CIBIL को जानते हैं, वैसे ही हर कोई R Score™ को भी जाने.”
सारिका कहती हैं, “हमारा विज़न साफ है—आज जो किराया आप भरते हैं, वह कल आपके घर की EMI (Equated Monthly Installment) बने. यही RentenPe का असली सपना है.”
RentenPe सिर्फ एक ऐप नहीं है, बल्कि यह एक सोच है—कि हर किराया चुकाने वाले को उसकी मेहनत का इनाम मिले. यह इनाम है बेहतर क्रेडिट स्कोर, आसान लोन और भविष्य में खुद के घर का मालिक बनने का सपना.
सारिका शेट्टी और उनके स्टार्टअप की यह कहानी दिखाती है कि निजी अनुभव और साहस अगर सही दिशा में लगाया जाए, तो करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकती है.



