ITBP की ऑल वुमन टीम ने रचा इतिहास, मौत के जोन को पार कर एवरेस्ट फतह
ITBP की पहली ऑल वुमन टीम ने माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया. 11 महिला पर्वतारोहियों ने कठिन मौसम और डेथ जोन को पार करते हुए 8848 मीटर ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराया. BSF की महिला टीम ने भी एवरेस्ट पर वंदे मातरम् गाकर देश का गौरव बढ़ाया.
भारत की महिला शक्ति ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत दिखा दी है. इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) की पहली ऑल वुमन इंटरनेशनल माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर इतिहास रच दिया है. यह उपलब्धि सिर्फ ITBP के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल बन गई है.
ITBP की 14 सदस्यीय टीम ने 21 मई 2026 को नेपाल की ओर से साउथ कोल रूट के जरिए माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने में सफलता हासिल की. सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर पहला सफल समिट हुआ. टीम में 11 महिला पर्वतारोही और तीन तकनीकी व सपोर्ट सदस्य शामिल थे.
ITBP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस सफलता की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह भारत के लिए गर्व का क्षण है. पोस्ट में बताया गया कि ITBP की पहली ऑल वुमन टीम ने 8848 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की.
इस अभियान की शुरुआत 19 अप्रैल को ITBP मुख्यालय से हुई थी. लगभग एक महीने से ज्यादा समय तक चली इस कठिन यात्रा में महिला जवानों ने बेहद मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया. एवरेस्ट के ऊपर 8000 मीटर के बाद का हिस्सा “डेथ जोन” कहलाता है. यहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है और मौसम हर पल बदलता रहता है. तेज बर्फीली हवाएं और खतरनाक बर्फीली दीवारें पर्वतारोहियों के लिए बड़ी चुनौती बनती हैं.

ITBP की 14 सदस्यीय टीम ने नेपाल की ओर से साउथ कोल रूट के जरिए माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने में सफलता हासिल की.
ITBP के अनुसार टीम ने असाधारण साहस, धैर्य और टीमवर्क का परिचय दिया. जवानों ने हर चुनौती को पार करते हुए दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में से एक को सफलतापूर्वक फतह किया. यह अभियान महिलाओं के सशक्तिकरण, एडवेंचर लीडरशिप और हाई एल्टीट्यूड ऑपरेशन में ITBP की विशेषज्ञता को भी दिखाता है.
इस अभियान का एक और खास पहलू पर्यावरण संरक्षण रहा. ITBP की “क्लीन हिमालया सेव ग्लेशियर” मुहिम के तहत टीम ने एवरेस्ट क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया और वहां से गैर बायोडिग्रेडेबल कचरा भी इकट्ठा किया. इससे साफ संदेश गया कि पर्वतारोहण सिर्फ रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है.
ITBP ने अब तक कुल 232 पर्वतारोहण अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा किया है. इसके साथ ही बल ने दुनिया की 8000 मीटर से ऊंची छह प्रमुख चोटियों पर भी सफलता हासिल की है. इनमें माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, ल्होत्से, धौलागिरी और मानस्लु शामिल हैं.
इधर सीमा सुरक्षा बल (BSF) की महिला जवानों ने भी इसी दौरान इतिहास रचा. BSF की पहली ऑल वुमन माउंट एवरेस्ट एक्सपीडिशन टीम ने भी दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया. यह अभियान BSF के डायमंड जुबली समारोह का हिस्सा था.
BSF की टीम में लद्दाख की कॉन्स्टेबल कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल की कॉन्स्टेबल मुनमुन घोष, उत्तराखंड की कॉन्स्टेबल रेबेका सिंह और कारगिल की कॉन्स्टेबल त्सेरिंग चोरोल शामिल थीं. टीम ने सुबह 8 बजे एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर नया इतिहास बना दिया.
समाचार एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BSF ने बताया कि महिला जवानों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर “वंदे मातरम्” गाया. इतनी ऊंचाई पर जहां सामान्य रूप से खड़ा रहना भी मुश्किल होता है और ज्यादातर लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ती है, वहां भारतीय महिला जवानों ने एक साथ देशभक्ति का गीत गाकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.
BSF के मुताबिक यह उपलब्धि नारी शक्ति, देशभक्ति और बल की उत्कृष्टता का प्रतीक है. इन महिला जवानों ने साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों तो दुनिया की सबसे ऊंची चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं.
ITBP और BSF की इन महिला टीमों की सफलता आज लाखों लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय महिलाएं अब हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और दुनिया के सबसे कठिन मंचों पर भी देश का नाम रोशन कर रही हैं.
(images: X/ITBP)



