क्यों इनोवेशन है भारत की रणनीतिक ताकत? जानिए विकसित भारत 2047 का विजन
इनोवेशन, AI, सेमीकंडक्टर, डीपटेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर भारत Viksit Bharat 2047 की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. जानिए कैसे Bharat Innovates 2026, Tata Group, IITs और नई तकनीकी नीतियां भारत को ग्लोबल इनोवेशन लीडर बनाने की तैयारी कर रही हैं.
‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’
ऋग्वेद का एक प्रसिद्ध मंत्र कहता है कि दुनिया के सभी दिशाओं से अच्छे विचार हमारे पास आएं. हजारों वर्षों से यही भावना भारत की पहचान रही है. ज्ञान को अपनाना, उसे आगे बढ़ाना और मानवता के हित में उपयोग करना भारतीय सभ्यता का मूल स्वभाव रहा है.
आज के समय में यही भावना इनोवेशन के रूप में हमारे सामने दिखाई देती है.
दुनिया तेजी से बदल रही है. अब केवल आर्थिक शक्ति ही किसी देश की ताकत तय नहीं करती. आज तकनीक राष्ट्रीय संप्रभुता का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है. किसी देश की व्यापारिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसकी स्थिति महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में कितनी मजबूत है.
भारत के लिए इनोवेशन अब केवल विकास का साधन नहीं है. यह एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है. यह नागरिकों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने का माध्यम है. यह उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है. यह देश की बाहरी निर्भरता को कम करता है और ऐसी क्षमताएं विकसित करता है जिन्हें दुनिया आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर सकती.
यही सोच विकसित भारत के विजन के केंद्र में है.
इनोवेशन को राष्ट्रीय मिशन बनाने का दशक
पिछले एक दशक में भारत ने इनोवेशन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई ऐसी पहलें शुरू हुईं जिन्होंने इनोवेशन को संस्थागत रूप दिया.
Startup India, IndiaAI Mission, ANRF, iDEX, BIRAC, IN SPACe, Semicon India, Atal Tinkering Labs और RDI Fund जैसी पहलों ने देश में इनोवेशन का मजबूत ढांचा तैयार किया है.
इन पहलों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य की तकनीकों में नेतृत्व हासिल करना भारत के विकास के लिए आवश्यक है.
शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से IITs और IISc जैसे संस्थान डीपटेक प्रतिभाओं को तैयार करने के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं. ये केवल शिक्षण संस्थान नहीं हैं बल्कि ऐसे इनोवेशन हब हैं जहां नए विचार उद्योगों और स्टार्टअप्स में बदल रहे हैं.
पहला दशक भागीदारी का था, अब महारत का समय है
भारत के इनोवेशन सफर का पहला दशक मजबूत नींव तैयार करने में बीता है.
इस दौरान स्टार्टअप्स, Incubators, Digital Public Infrastructure, Research Missions, Student Hackathons और नए निवेश विकल्पों के माध्यम से इनोवेशन को व्यापक बनाया गया.
अब अगला दशक और अधिक महत्वपूर्ण है. भारत इनोवेशन के मामले में व्यापक उपस्थिति तो बना चुका है. अब उसे गहराई हासिल करनी है.
आगे की प्रगति केवल स्टार्टअप्स की संख्या से नहीं मापी जाएगी. सफलता इस बात से तय होगी कि भारत कितनी नई क्षमताओं में महारत हासिल करता है. कितनी रणनीतिक निर्भरताएं कम करता है. कितनी मजबूती से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रवेश करता है और कितने बड़े पैमाने पर लोगों का जीवन बेहतर बनाता है.
टेक्नोलॉजी बनाने की जरूरत
भारत ने तकनीक को अपनाने और उसे बड़े पैमाने पर लागू करने में शानदार सफलता हासिल की है.
अब अगला लक्ष्य तकनीक का मूल निर्माता बनना है.
इसका अर्थ है महत्वपूर्ण बौद्धिक संपदा यानी Intellectual Property का स्वामित्व रखना. महत्वपूर्ण सप्लाई चेन पर नियंत्रण रखना. तकनीकी मानकों को तय करना. ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करना जिन पर पूरी दुनिया निर्माण कर सके.
आज भी भारत में औद्योगिक अनुसंधान और विकास पर खर्च कई विकसित देशों की तुलना में कम है.
भारत को ऐसी स्थिति में पहुंचना होगा जहां वह केवल दुनिया की तकनीक का उपयोग न करे बल्कि दुनिया भारत द्वारा विकसित तकनीकों का उपयोग करे.
हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में हमें यह सवाल पूछना होगा कि क्या विज्ञान हमारा है. क्या डिजाइन हमारा है. क्या डेटा हमारा है. क्या Intellectual Property हमारी है. क्या निर्माण प्रक्रिया हमारे नियंत्रण में है. क्या मानक हम तय कर रहे हैं और क्या ग्राहकों तक हमारी सीधी पहुंच है.
नीति और बाजार के बीच सही संतुलन जरूरी
भारत के इनोवेशन भविष्य में सरकार और उद्योग दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. जो क्षेत्र अभी शुरुआती अवस्था में हैं वहां सरकार को मांग तैयार करनी होगी और शुरुआती जोखिम उठाने होंगे.
iDEX इसका सफल उदाहरण है. इस पहल के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार हुआ जो सामान्य बाजार परिस्थितियों में शायद संभव नहीं था.
जब कोई क्षेत्र परिपक्व हो जाए तो उद्योग को नेतृत्व संभालना चाहिए. वहीं सरकार को दीर्घकालिक अनुसंधान, साझा मानकों और ऐसे बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें कोई एक कंपनी अकेले विकसित नहीं कर सकती.
रणनीतिक आत्मनिर्भरता का मतलब अकेले चलना नहीं
भारत तकनीकी संप्रभुता की दिशा में आगे बढ़ रहा है. लेकिन इसका मतलब तकनीकी अलगाव नहीं है. भारत के राष्ट्रीय हित इस बात में हैं कि वह समान सोच वाले देशों के साथ गहरी साझेदारी बनाए. ऐसी साझेदारियां महत्वाकांक्षा से समझौता नहीं हैं. बल्कि वे तेजी से आगे बढ़ने का माध्यम हैं.
रणनीतिक संप्रभुता का अर्थ निर्भरता से नहीं बल्कि आत्मविश्वास के साथ सहयोग करना है.
India France Year of इनोवेशन इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है. यह दिखाता है कि कैसे दो देश अपनी ताकतों को जोड़कर इनोवेशन में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं.
बड़ी कंपनियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण
भारत के बड़े उद्योग समूह इनोवेशन को नई दिशा दे सकते हैं. उनकी भूमिका केवल स्टार्टअप्स के पहले ग्राहक बनने तक सीमित नहीं होनी चाहिए.
उन्हें अनुसंधान और विकास में निवेश करना होगा. स्टार्टअप्स के साथ मिलकर नई तकनीक विकसित करनी होगी. MSMEs और स्टार्टअप्स को सप्लाई चेन का हिस्सा बनाना होगा. साथ ही रणनीतिक निवेश भी करना होगा.
उनकी इंजीनियरिंग क्षमता, गुणवत्ता मानक और वैश्विक बाजार तक पहुंच पूरे इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत कर सकती है.
Tata Group का मॉडल
Tata Group इसी दिशा में काम कर रहा है.
Semiconductors, Artificial Intelligence, Defence, Clean Energy और Digital Infrastructure जैसे क्षेत्रों में अपने विस्तार के दौरान समूह स्टार्टअप्स और MSMEs को अपने विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है.
किसी भी जटिल तकनीकी क्षेत्र में इनोवेशन केवल एक उत्पाद से नहीं आता. इसके पीछे पूरा इकोसिस्टम काम करता है.
उदाहरण के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग को डिजाइन, सामग्री, पैकेजिंग और ग्राहकों की जरूरत होती है.
इसी तरह Electric Vehicle (EV) उद्योग को बैटरी, चार्जिंग नेटवर्क, सॉफ्टवेयर और वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता होती है. जब बड़ी कंपनियां इस सोच के साथ आगे बढ़ती हैं तो पूरा इनोवेशन इकोसिस्टम मजबूत होता है.
हर क्षेत्र में नहीं, सही क्षेत्रों में महारत जरूरी
भारत हर तकनीकी क्षेत्र में नेतृत्व हासिल नहीं कर सकता. इसलिए प्राथमिकताएं तय करना आवश्यक है.
हमें उन क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा जो स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसी बड़ी सामाजिक चुनौतियों का समाधान कर सकें.
हमें यह देखना होगा कि किन क्षेत्रों में भारत की घरेलू मांग इतनी बड़ी है कि वह नई तकनीकों के लिए परीक्षण का सबसे बड़ा मंच बन सकती है.
हमें यह भी पहचानना होगा कि किन क्षेत्रों में भारत की प्रतिभा और लागत संरचना उसे विशेष बढ़त देती है. साथ ही उन तकनीकों पर विशेष ध्यान देना होगा जहां आयात पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है.
भारत का लक्ष्य उन क्षेत्रों में मजबूत स्थिति बनाना होना चाहिए जहां दुनिया हमारे बिना आसानी से आगे न बढ़ सके.
AI के अवसर और चुनौतियां
Artificial Intelligence (AI) आज सबसे परिवर्तनकारी तकनीकों में से एक है. यह स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशासन और उत्पादकता के क्षेत्र में कई दशकों की प्रगति को तेजी से आगे बढ़ा सकती है. लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं.
यदि इसका उपयोग सावधानी से न किया जाए तो यह रोजगार के स्वरूप को बदल सकता है. सामाजिक असमानताओं को बढ़ा सकता है और पूर्वाग्रहों को मजबूत कर सकता है.
भारत को ऐसा मॉडल विकसित करना होगा जो समाज के लिए सकारात्मक परिणाम दे.
AI को लोगों की क्षमताएं बढ़ाने, नए रोजगार बनाने और विकास को अधिक समावेशी बनाने का माध्यम बनना चाहिए. इसके लिए Reskilling और Redeployment जैसी प्रक्रियाओं को संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ लागू करना होगा.
Bharat Innovates 2026 दुनिया को देगा नया संदेश
फ्रांस में शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) द्वारा आयोजित Bharat Innovates 2026 केवल एक कार्यक्रम नहीं है.
यह दुनिया को दिया गया एक संदेश है कि भारत के सबसे महत्वाकांक्षी Innovators वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं.
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह भारतीय स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, विश्वविद्यालयों, कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और बाजारों से जोड़ने वाला मंच बनेगा.
इसका सबसे बड़ा उद्देश्य केवल यह नहीं है कि दुनिया देखे कि भारत क्या बना रहा है. बल्कि यह है कि दुनिया यह पूछे कि भारत के साथ मिलकर क्या बनाया जा सकता है.
युवा Innovators के लिए सुनहरा अवसर
भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी इनोवेशन प्रयोगशालाओं में से एक है. यह ऐसा देश है जहां मानव विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता की सबसे कठिन चुनौतियों का समाधान अरबों लोगों के स्तर पर करना है.
यही वजह है कि जो इनोवेटर भारत की समस्याओं का समाधान करता है, वह दुनिया के बड़े हिस्से की समस्याओं का समाधान करने की क्षमता भी रखता है. यह चुनौती नहीं बल्कि एक असाधारण अवसर है.
भारत की इनोवेशन कहानी उस पीढ़ी द्वारा लिखी जाएगी जो केवल भागीदारी से संतुष्ट नहीं होगी. जो गहराई में जाकर महारत हासिल करना चाहेगी. जो सुविधा से अधिक उद्देश्य को महत्व देगी.
ऐसी पीढ़ी तैयार है. भारत तैयार है. और यह समय भी तैयार है.
अब इनोवेशन केवल विकास का विकल्प नहीं है. यह भारत के दुनिया में अपने सही स्थान तक पहुंचने का सबसे मजबूत मार्ग बन चुका है.
(लेखक Tata Sons के चेयरमैन हैं. आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं. YourStory का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है.)
Edited by Ravi Pareek



