बिहार के छोटे गाँव से 2000 करोड़ का साम्राज्य: SAVE Group ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर!
साल 2009 में SAVE Group ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर पहला CSP खोला. इसके बाद सफर तेज़ी से आगे बढ़ा और धीरे-धीरे अन्य बैंकों के साथ भी साझेदारी हुई. आज SAVE Group के 15,000+ ग्राहक सेवा केंद्र हैं, जो पूरे देश में 2.3 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएँ दे रहे हैं.
बिहार के छोटे गाँव से शुरू हुई एक पहल आज करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद और भरोसे का नाम बन चुकी है. कभी गाँव के लोग बैंकिंग सेवाओं के लिए कई किलोमीटर पैदल चलते थे. महिलाएँ सामाजिक झिझक और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण बैंक तक नहीं जा पाती थीं. लेकिन आज उन्हीं गाँवों में लोग अपने दरवाज़े पर बैंकिंग सेवाएँ पा रहे हैं. यह बदलाव किसी चमत्कार से कम नहीं है. इस बदलाव के पीछे है SAVE Group, SAVE Solutions और इनके फाउंडर और एमडी-सीईओ अजीत कुमार सिंह का विज़न.
SAVE Group की कहानी सिर्फ़ एक कंपनी की सफलता की गाथा नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के जीवन में आए बदलाव की भी दास्तान है, जिन्हें पहले औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर दिया गया था.
शुरुआत
YourStory हिंदी से बात करते हुए, अजीत कुमार सिंह बताते हैं कि यह सफर बिहार के छोटे गाँव से शुरू हुआ. वहाँ बैंकिंग तक पहुँचना आसान नहीं था. लोग साधारण लेन-देन के लिए भी घंटों पैदल चलते थे. महिलाएँ अक्सर बैंक जाने से कतराती थीं.
इसी दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने वित्तीय समावेशन मिशन के तहत बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंस का मॉडल शुरू किया. इसमें ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) के ज़रिए बैंकिंग सेवाएँ गाँवों तक पहुँचाई जानी थीं. अजीत कुमार सिंह को इसमें एक सुनहरा अवसर दिखा. उन्होंने तय किया कि इस मॉडल को अपनाकर ग्रामीण भारत को बैंकिंग की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है.
साल 2009 में SAVE Group ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर पहला CSP खोला. इसके बाद सफर तेज़ी से आगे बढ़ा और धीरे-धीरे बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और अन्य बैंकों के साथ भी साझेदारी हुई.
आज SAVE Group के 15,000+ ग्राहक सेवा केंद्र हैं, जो पूरे देश में 2.3 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएँ दे रहे हैं.
घर के दरवाज़े पर बैंकिंग
SAVE Group का मॉडल सरल और ग्राहक-केंद्रित है. इसका उद्देश्य है—“लोगों तक बैंकिंग पहुँचाना, न कि लोगों को बैंक तक लाना.”
कंपनी का तगड़ा बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट नेटवर्क गाँव-गाँव जाकर बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराता है. CSPs स्थानीय समुदाय से चुने जाते हैं. इससे लोग अपने ही परिचित चेहरे पर भरोसा करके लेन-देन करते हैं.
SAVE Group की विभिन्न कंपनियाँ अलग-अलग क्षेत्रों पर फोकस करती हैं:
- सेव माइक्रोफाइनेंस: ग्रामीण महिलाओं को JLG मॉडल के ज़रिए छोटे लोन, ताकि वे स्वरोज़गार शुरू कर सकें.
- सेव फाइनेंशियल सर्विसेज: छोटे और मध्यम व्यवसायियों के लिए एमएसएमई लोन.
- सेव हाउसिंग फाइनेंस: ग्रामीण और अर्ध-शहरी परिवारों को किफ़ायती होम लोन.
- सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट्स (बीसी लेंडिंग): दक्षिण भारत की महिलाओं को माइक्रो लोन.
यह मॉडल तकनीक और इंसानी भरोसे पर टिका है. SAVE Group के लिए टेक्नोलॉजी रीढ़ की हड्डी है. सीएसपी नेटवर्क न केवल बैंकिंग की पहुँच बढ़ाता है, बल्कि लोगों को वित्तीय साक्षरता भी देता है.
अजीत कुमार सिंह कहते हैं, “टेक्नोलॉजी और मानवीय स्पर्श का मिश्रण ही हमारी असली ताक़त है. यह सिर्फ़ बैंकिंग नहीं, बल्कि एक सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण है.”
चुनौतियां
किसी भी बड़ी यात्रा की शुरुआत आसान नहीं होती. SAVE Group के सामने भी कई चुनौतियाँ थीं. सबसे बड़ी चुनौती थी—लोगों का भरोसा जीतना. गाँव वाले नए सिस्टम पर पैसे देने से डरते थे. उन्हें लगता था कि कहीं यह धोखा न हो. बिजली, इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी ने भी मुश्किलें बढ़ाईं.
अजीत कुमार सिंह याद करते हैं, “हम लोगों के घर गए, उनके साथ बैठकर समझाया. कई बार खुद लेन-देन किया ताकि वे देख सकें कि यह सुरक्षित है. धीरे-धीरे पारदर्शिता और निरंतर सेवा ने भरोसा कायम किया.”
प्रतिभाशाली प्रोफेशनल्स को जोड़ना भी आसान नहीं था. लेकिन कंपनी ने एक पर्पस-ड्रिवन कल्चर बनाया. इसमें हर कर्मचारी सिर्फ़ नौकरी नहीं करता, बल्कि वित्तीय समावेशन के मिशन का हिस्सा बनता है.
रेवेन्यू
वित्त वर्ष 2025 में SAVE Group का रेवेन्यू ₹595 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 8.1% ज़्यादा है. कंपनी ने अब तक कुल $40 मिलियन की फंडिंग हासिल की है. इसके मुख्य निवेशक Incofin और Maj Invest हैं.
आज SAVE Group के पास 15,000 से ज़्यादा ग्राहक सेवा केंद्र, 450 से अधिक लोन ब्रांचें और 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का एयूएम (AUM) है. अब तक 10 लाख से ज़्यादा ग्राहकों को ऋण और वित्तीय सेवाओं के ज़रिए सशक्त किया जा चुका है. यह आँकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ़ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसने करोड़ों लोगों को बैंकिंग की मुख्यधारा से जोड़ा है.
SAVE Group आने वाले समय में अपनी पकड़ और मज़बूत करना चाहता है. कंपनी का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2026 तक AUM को 30% बढ़ाकर ₹2,600 करोड़ करना. साथ ही, रेवेन्यू को ₹600 करोड़ और शुद्ध लाभ को ₹12 करोड़ तक पहुँचाना. इसके लिए कंपनी तीन दिशाओं पर काम कर रही है—ग्रामीण बाज़ारों में और गहरी पैठ, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को मज़बूत करना और ग्राहक-केंद्रित नए उत्पाद लॉन्च करना.
ग्रामीण जीवन पर असर
SAVE Group ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी है. पहले दैनिक मज़दूरी करने वाले लोग बैंकिंग सेवाओं से वंचित रहते थे. लेकिन आज उनके गाँव में ही CSP मौजूद है. खासकर महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है. माइक्रोफाइनेंस ने उन्हें आर्थिक रूप से मज़बूत किया है.
कई महिलाएँ, जो पहले खेतों में मज़दूरी करती थीं, अब अपने गाँव में सिलाई सेंटर, किराना दुकान या छोटे व्यवसाय चला रही हैं. इससे न सिर्फ़ उनका आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि पूरा समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हुआ.
बचत और ऋण का यह मेल ग्रामीण परिवारों में एक नई ऊर्जा लेकर आया है. घर की वित्तीय सुरक्षा मज़बूत हुई, महिलाएँ उद्यमी बनीं और गाँव का योगदान भी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा.
SAVE Group की कहानी यह साबित करती है कि अगर सही नीयत और मजबूत इरादे हों, तो बदलाव लाना मुश्किल नहीं है. बिहार के छोटे गाँव से शुरू हुई यह यात्रा आज पूरे भारत में लाखों लोगों को सशक्त कर रही है.
(नोट: हेडलाइन में बदलाव के साथ लेख को पुन: प्रकाशित किया गया है.)



