Getepay: जयपुर के स्टार्टअप ने बदली 10 लाख व्यापारियों की किस्मत
जयपुर से शुरू हुआ Getepay आज भारत के 10 लाख से ज़्यादा व्यापारियों को डिजिटल बना रहा है. जानिए कैसे प्रवीन शर्मा ने छोटे शहरों में फिनटेक क्रांति शुरू की और RBI से पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस हासिल कर राजस्थान का गौरव बढ़ाया.
भारत एक ऐसा देश है जहां करोड़ों छोटे और मझौले व्यापारी (SMEs) रोज़मर्रा की चुनौतियों से जूझते हैं—कैश हैंडलिंग, डिजिटल पेमेंट न समझ पाना, ग्राहकों को जोड़कर रखना, और समय के साथ टेक्नोलॉजी को अपनाने में मुश्किलें. जहां मेट्रो शहरों में डिजिटल इंडिया (Digital India) की रफ्तार तेज़ है, वहीं छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में यह बदलाव धीमा और संघर्ष भरा रहा है.
लेकिन जयपुर से निकली एक स्टार्टअप कंपनी ने इन जमीनी हकीकतों को चुनौती दी और एक ऐसा समाधान पेश किया जो न सिर्फ छोटे व्यापारियों की जरूरतें समझता है, बल्कि उन्हें डिजिटल इंडिया का हिस्सा भी बनाता है.
इस क्रांति की शुरुआत हुई प्रवीन शर्मा (Pravin Sharma) के उस सपने से, जिसमें उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने की ठानी जो हर छोटे व्यापारी को डिजिटल शक्ति दे सके—वो भी बिना किसी जटिलता, बिना किसी बड़े बजट के. और इस सपने का नाम है — (गेटेपे ).
आज Getepay 10 लाख से अधिक व्यापारियों का भरोसेमंद साथी बन चुका है और राजस्थान की पहली ऐसी कंपनी बन गई है जिसे RBI (Reserve Bank of India) से पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस मिला है. लेकिन इस कामयाबी के पीछे संघर्ष, धैर्य और दूरदर्शिता की एक गहरी कहानी है.

Getepay के फाउंडर और सीईओ प्रवीन शर्मा
शुरुआत
प्रवीन शर्मा ने 2008 में पेमेंट इंडस्ट्री में कदम रखा. सालों तक इस सेक्टर में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि देश के छोटे व्यापारियों के लिए कोई ऐसा एकीकृत (unified) प्लेटफॉर्म नहीं है जो पेमेंट से लेकर ग्राहक जुड़ाव तक की हर सुविधा सरलता से दे सके.
YourStory हिंदी से बात करते हुए Getepay के फाउंडर और सीईओ प्रवीन शर्मा ने बताया, “बाज़ार में डिजिटल टूल्स तो थे, लेकिन SMEs के लिए एक सिंपल और किफायती समाधान नहीं था. यही सोच Getepay की प्रेरणा बनी और 2016 में इसकी शुरुआत हुई.”
जहां ज़्यादातर स्टार्टअप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में शुरू होते हैं, वहीं प्रवीन ने जयपुर को चुना. वजह थी—अपने माता-पिता के करीब रहना.
वे कहते हैं, “उस समय जयपुर में स्टार्टअप इकोसिस्टम नया था. टैलेंट और इन्वेस्टर की कमी थी, लेकिन कम लागत और सपोर्टिव लोकल कम्युनिटी ने चीजों को आसान बना दिया.”
Getepay की सोच: छोटे शहरों की डिजिटल क्रांति
Getepay का सपना है—भारत के छोटे व्यापारियों का सबसे भरोसेमंद फिनटेक पार्टनर बनना. खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहां अब तेजी से डिजिटल अपनाने की लहर चल रही है.
Getepay सिर्फ पेमेंट प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सिस्टम है जो व्यापारी को पैसा लेने से लेकर ग्राहक से जुड़ने तक, हर कदम पर मदद करता है.
Getepay व्यापारियों को एक सिंगल प्लेटफॉर्म पर डिजिटल पेमेंट, कस्टमर मैनेजमेंट, और प्रमोशन जैसे टूल्स देता है. जहां दूसरे पेमेंट एग्रीगेटर सिर्फ पेमेंट प्रोसेसिंग पर फोकस करते हैं, वहीं Getepay उन्हें बिज़नेस ग्रोथ में भी मदद करता है.

कौन हैं Getepay के ग्राहक?
Getepay सेक्टर-एग्नोस्टिक है—यानि किसी भी क्षेत्र का व्यापारी इससे जुड़ सकता है. चाहे वह एक छोटी किराना दुकान हो, रेस्टोरेंट, या मध्यम स्तर का मैन्युफैक्चरिंग बिज़नेस.
स्टार्टअप का आदर्श ग्राहक है—“वह व्यापारी जो डिजिटल अपनाने को तैयार है और अपने बिज़नेस को बढ़ाना चाहता है.”
आज Getepay के साथ 1 मिलियन (10 लाख) से ज़्यादा व्यापारी जुड़े हुए हैं. कंपनी साल दर साल 3–4 गुना की दर से बढ़ रही है. आने वाले 12 महीनों में कंपनी का लक्ष्य है—अधिक से अधिक छोटे शहरों में पहुंच बनाना और अपने प्लेटफॉर्म को और ज्यादा उपयोगी बनाना.
राजस्थान का पहला RBI-अप्रूव्ड पेमेंट एग्रीगेटर
Getepay को हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस मिला है. यह उपलब्धि राजस्थान की किसी भी कंपनी को पहली बार मिली है.
प्रवीन शर्मा इस पर गर्व से कहते हैं, “ये सिर्फ हमारी नहीं, पूरे राज्य की जीत है. इससे हमारे जैसे स्टार्टअप्स को नई पहचान मिली है.”
RBI का लाइसेंस पाना आसान नहीं था. इसके लिए कंपनी को अपने सिस्टम, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रोसेस को पूरी तरह से अपग्रेड करना पड़ा.
प्रवीन बताते हैं, “हमने इस कठिन प्रक्रिया को एक अवसर की तरह लिया और अपनी नींव और भी मजबूत कर ली.”
पेमेंट एग्रीगेटर (पीए) ऐसी संस्थाएं हैं जो ईकॉमर्स साइटों और व्यापारियों को अपने भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए ग्राहकों से विभिन्न भुगतान साधनों को स्वीकार करने की सुविधा देती है. इसका मतलब है कि व्यापारियों को अपना खुद का अलग पेमेंट इंटीग्रेशन सिस्टम बनाने की जरूरत नहीं होती है.
नॉन-मेट्रो सिटी से स्टार्टअप करना: मुश्किलें और मौके
जयपुर जैसे शहर से स्टार्टअप शुरू करना आसान नहीं था. टैलेंट की कमी, इकोसिस्टम की दूरी, और इन्वेस्टर का ध्यान न मिलना जैसी चुनौतियां सामने आईं.
लेकिन कम लागत, अपने शहर का सपोर्ट और कुछ मददगार दोस्तों ने Getepay की नाव को पार लगाया.
फंडिंग, बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल
Getepay फंडेड कंपनी है. RBI के नियमानुसार पेमेंट एग्रीगेटर बनने के लिए पूंजी जुटाना जरूरी था.
अब तक कंपनी ने कई राउंड में फंडिंग जुटाई है. इसमें शामिल हैं—महावीर प्रताप शर्मा, ITI Growth Fund, Hyderabad Angels, वीरेंद्र सहवाग और योगेश चौधरी (Jaipur Rugs) जैसे नाम.
कंपनी का मुख्य रेवेन्यू MDR (Merchant Discount Rate) से आता है. यानी जब व्यापारी पेमेंट स्वीकार करता है, तो कंपनी को एक छोटा कमीशन मिलता है.
Getepay हर साल 2–3 गुना रेवेन्यू ग्रोथ कर रहा है. RBI लाइसेंस और नए व्यापारियों की एंट्री के बाद इस साल की ग्रोथ और भी तेज़ होगी.
भविष्य की योजनाएं
फिलहाल Getepay की पूरी फोकस भारत पर है. खासकर SMEs को डिजिटल बनाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है.
हालांकि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय विस्तार की भी योजना है. साथ ही कंपनी पेमेंट से जुड़े नए इनोवेशन पर भी काम कर रही है.
‘भारत’ में स्टार्टअप शुरू करने वालों के लिए प्रवीन शर्मा का संदेश, “सिर्फ नतीजों के पीछे न भागें, सफर का मज़ा लें. असफलता से न डरें. भारत में भरपूर मौके हैं. अगर हम ईमानदारी और लगन से असली समस्याओं को हल करें, तो भारत का भविष्य हम सब मिलकर संवार सकते हैं.”
Getepay की कहानी एक मिसाल है—कि एक साधारण सोच, असाधारण बदलाव ला सकती है. छोटे शहर से शुरू होकर, देशभर के व्यापारियों को डिजिटल बना रही यह कंपनी दिखाती है कि असली नवाचार सिर्फ बड़े शहरों में नहीं, भारत के दिल ‘भारत’ में भी हो सकता है.
Getepay न सिर्फ एक कंपनी है, बल्कि वह पुल है—जो छोटे व्यापारियों को डिजिटल भविष्य से जोड़ता है. और यही है भारत की असली डिजिटल क्रांति.




