स्टार्टअप Jarsh Safety की बदौलत मजदूरों के लिए अब गर्मी नहीं बनेगी खतरा, जानिए कैसे...
स्टार्टअप Jarsh Safety के जरिए कौस्तुभ कौंडिन्य ने इंडस्ट्रियल सेफ्टी को स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बदल दिया. AC हेलमेट, AI-समर्थित सॉल्यूशंस और बड़े विजन के साथ यह स्टार्टअप फैक्ट्री वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेफ्टी गियर बना रहा है.
फैक्ट्री के अंदर गर्मी, शोर और लगातार चलता काम. बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है. लेकिन असली कहानी उन लोगों की है जो रोज़ घंटों तक भारी मशीनों के बीच काम करते हैं. सेफ्टी गियर पहनना नियम है, मगर क्या वह सच में सुरक्षा देता है. यही सवाल एक दिन कौस्तुभ कौंडिन्य (Kausthub Kaundinya) के मन में गहराई से बैठ गया.
BITS Pilani और IIM जैसे संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद उनके सामने कई रास्ते थे. लेकिन उन्होंने आसान रास्ता नहीं चुना. उन्होंने उस समस्या को चुना, जिसे लोग सालों से सामान्य मान चुके थे. इसी सोच से हैदराबाद स्थित Jarsh Safety की शुरुआत हुई, एक ऐसा स्टार्टअप जो सेफ्टी को सिर्फ नियम नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी से जुड़ा समाधान मानता है.
कौस्तुभ कहते हैं, “कंपलायंस और प्रोटेक्शन अलग चीजें हैं. हमारा लक्ष्य सिर्फ नियम पूरा करना नहीं, बल्कि लोगों को सच में सुरक्षित रखना है.”
शुरुआत
कौस्तुभ बताते हैं कि उनकी पढ़ाई ने उन्हें दो अलग नजरिए दिए. BITS Pilani ने उन्हें सिस्टम समझना सिखाया. समस्याओं को छोटे हिस्सों में तोड़ना और तेज़ी से समाधान बनाना सिखाया. वहीं IIM ने बिजनेस की सच्चाई दिखाई. आइडिया अच्छा होना काफी नहीं है. उसे स्केलेबल और टिकाऊ भी होना चाहिए.
उनके शब्दों में, “हार्डवेयर और डीप-टेक में ट्रायल और गलती की गुंजाइश कम होती है. जो बनाओ, वह असली दुनिया में टिकना चाहिए.”
यही सोच Jarsh Safety की नींव बनी. इंजीनियरिंग और बिजनेस का संतुलन. तकनीक जो दिखने में नई हो, लेकिन इस्तेमाल में आसान हो.
जब एक हादसे ने बदली दिशा
Jarsh की कहानी का असली मोड़ तब आया जब कौस्तुभ ने मजदूरों को गर्मी की वजह से गिरते देखा. वे सभी जरूरी PPE (Personal Protective Equipment) पहने हुए थे. नियम पूरे थे. फिर भी खतरा कम नहीं हुआ था.
उन्हें समझ आया कि सेफ्टी गियर समय के साथ नहीं बदला है. जलवायु बदल रही है. तापमान बढ़ रहा है. लेकिन सुरक्षा उपकरण वहीं के वहीं हैं.
कौस्तुभ कहते हैं, “सुरक्षा का मतलब हादसे के बाद रिपोर्ट बनाना नहीं होना चाहिए. असली सेफ्टी वह है जो खतरे को पहले पहचान ले.”
इसी सोच से दुनिया का पहला एयर कंडीशंड सेफ्टी हेलमेट बनाने का विचार आया. सुनने में आसान लगा, मगर असली चुनौती तब शुरू हुई. कूलिंग सिस्टम, बैटरी, एयरफ्लो और इलेक्ट्रॉनिक्स को एक BIS सर्टिफाइड हेलमेट में फिट करना आसान नहीं था. 150 से ज्यादा प्रोटोटाइप बने. हर बार कुछ नया सीखा गया.
उन्होंने कहा, “हमने सिर्फ हेलमेट नहीं बनाया. हमने पूरी सप्लाई चेन को नए तरीके से सोचना पड़ा.”
एक हेलमेट से पूरा स्मार्ट सेफ्टी इकोसिस्टम
आज Jarsh Safety खुद को सिर्फ PPE कंपनी नहीं मानती. यह एक इंडस्ट्रियल सेफ्टी टेक कंपनी है. AC हेलमेट इसके सफर की शुरुआत था, लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती.
SmartVolt बिजली वाले क्षेत्रों में जाने से पहले चेतावनी देता है. Kavach गिरने या गलत मूवमेंट को पहचानता है. WorkAlive नाम का प्लेटफॉर्म इन सभी डिवाइसेस से डेटा लेकर AI की मदद से जोखिम का अंदाजा लगाता है.
कौस्तुभ इसे एक नर्वस सिस्टम की तरह समझाते हैं. “असली ताकत किसी एक डिवाइस में नहीं है. ताकत डेटा के मिलकर काम करने में है.”
Jarsh का बिजनेस मॉडल भी इसी सोच पर बना है. हार्डवेयर एंट्री पॉइंट है. उसके बाद सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन और एंटरप्राइज लेवल डिप्लॉयमेंट आते हैं. यही मॉडल कंपनी को बार बार आने वाला रेवेन्यू देता है.
वित्त वर्ष 24 में कंपनी ने तीन गुना ग्रोथ दर्ज की और 4.5 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया. अब लक्ष्य 20 करोड़ रुपये से आगे जाने का है. इसके पीछे रिपीट ऑर्डर बड़ी वजह हैं. एक बार जब कंपनियां नतीजे देख लेती हैं, तो वे अलग अलग प्लांट्स में इसे बढ़ाती हैं.
कौस्तुभ कहते हैं, “हम हेलमेट नहीं बेचते. हम रिस्क कम करने का भरोसा बेचते हैं.”
निवेश, भरोसा और आगे की राह
Jarsh Safety ने प्री-सीरीज A फंडिंग राउंड में 4 करोड़ रुपये जुटाए. Shark Tank India में आने से कंपनी को पहचान मिली. लेकिन कौस्तुभ के लिए असली फायदा था बातचीत का बदलना. पहले जहां सेफ्टी को खर्च माना जाता था, अब उसे निवेश की तरह देखा जाने लगा.
वे मानते हैं कि डीप-टेक में सिर्फ पैसा काफी नहीं होता. सही निवेशक वह है जो लंबे सफर को समझे. जो रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की चुनौतियों को जाने.
कौस्तुभ कहते हैं, हार्डवेयर बिजनेस रातों रात नहीं बदलता. धैर्य और भरोसा सबसे जरूरी है.”
आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन सेफ्टी नियमों को भी बदलेगा. हीट स्ट्रेस को एक औपचारिक खतरे के रूप में देखा जाएगा. स्मार्ट PPE धीरे धीरे जरूरी बन जाएगा.
Jarsh Safety की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की कहानी नहीं है. यह सोच बदलने की कहानी है. जहां सेफ्टी को चेकलिस्ट से निकालकर इंसानी जरूरत के रूप में देखा जा रहा है. विजन 2030 के तहत कंपनी एक मिलियन वर्कर्स की सुरक्षा का लक्ष्य लेकर चल रही है और 50 से ज्यादा नए प्रोडक्ट लाने की तैयारी में है.
कौस्तुभ कौंडिन्य का सपना साफ है. “हम चाहते हैं कि दुनिया कहे, सबसे भरोसेमंद सेफ्टी टेक्नोलॉजी भारत से आई है.” उन्हें Forbes 30 Under 30 Asia 2025 लिस्ट में भी जगह मिली है.
फैक्ट्री फ्लोर की गर्मी में खड़े उस मजदूर के लिए, यह सिर्फ एक हेलमेट नहीं है. यह भरोसा है. यह राहत है. और शायद भविष्य की वह दिशा है जहां तकनीक और इंसान साथ मिलकर सुरक्षित कल बनाते हैं.



