कानपुर के अनुभव शुक्ला ने सॉफ्टवेयर डेवलपर की जॉब छोड़कर शुरू की मशरूम की खेती
कानपुर के अनुभव शुक्ला ने यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक मदद से मशरूम की खेती करना शुरू किया. सॉफ्टवेयर डेवलपर की जॉब से खेती तक का उनका सफर दिखाता है कि टेक्नोलॉजी, धैर्य और नियंत्रित माहौल से साल भर स्थिर उत्पादन कैसे संभव है.
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में रहने वाले अनुभव शुक्ला आज बटन मशरूम की खेती कर रहे हैं. उनका यह काम सामान्य खेती से अलग है. वह खुले खेत में नहीं, बल्कि पूरी तरह नियंत्रित कमरों में मशरूम उगाते हैं. यहां तापमान, नमी और हवा सब कुछ मशीनों से तय किया जाता है. इसी वजह से वह साल भर मशरूम की खेती कर पाते हैं, न कि सिर्फ सर्दियों के मौसम में.
उनके यूनिट में एक तय प्रक्रिया से काम होता है. तैयार कंपोस्ट को बैग में भरा जाता है. उसमें स्पॉन मिलाया जाता है. इसके बाद बैग को एयर कंडीशन्ड कमरे में रखा जाता है. शुरुआत में तापमान को स्थिर रखा जाता है, ताकि माइसीलियम अच्छे से फैल सके. इसके बाद तापमान धीरे धीरे कम किया जाता है. सही परतें डालने पर पिन बनते हैं और कुछ ही दिनों में मशरूम निकलने लगते हैं. एक ही बैच से कई बार कटाई होती है. पूरे समय नमी, हवा और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर पर नजर रखी जाती है.
अनुभव फिलहाल सिर्फ बटन मशरूम पर ही काम कर रहे हैं. हालांकि उन्हें ऑयस्टर और औषधीय मशरूम की भी जानकारी है. उनका मानना है कि बटन मशरूम की खेती जमीन से ज्यादा सटीक नियंत्रण मांगती है. मौसम चाहे जैसा हो, अगर अंदर का माहौल सही है तो उत्पादन लगातार हो सकता है.
अनुभव का सफर खेती से शुरू नहीं हुआ था. वह पहले एक फ्रंटएंड सॉफ्टवेयर डेवलपर थे. वेब टेक्नोलॉजी में काम करते थे और नियमित नौकरी करते थे. खेती की ओर उनका झुकाव अचानक नहीं आया. कानपुर के एक कृषि कॉलेज में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने मौसमी मशरूम उत्पादन सीखा. वहीं उनके मन में यह सवाल उठा कि क्या इसी फसल को मौसम से अलग करके उगाया जा सकता है.
यहीं से प्रयोग शुरू हुए. कई महीनों तक तापमान, नमी और हवा के प्रवाह के साथ प्रयोग चलते रहे. कई बैच खराब हुए. करीब छह महीने तक नतीजे असमान रहे. कभी उत्पादन ठीक होता, कभी बिल्कुल नहीं. लेकिन सातवें महीने के आसपास सिस्टम स्थिर होने लगा. पैदावार अनुमान के अनुसार आने लगी.
सॉफ्टवेयर से खेती की ओर जाने का फैसला उन्होंने सोच समझकर लिया. अनुभव बताते हैं कि सब्जियों में रसायनों का बढ़ता इस्तेमाल, खेती की जमीन का कम होना और खाने की आदतों में बदलाव उन्हें परेशान करता था. नियंत्रित और इनडोर खेती उन्हें छोटे स्तर पर काम करने वालों के लिए बेहतर विकल्प लगी.
शुरुआत में उन्होंने अपनी बचत से यूनिट खड़ी की. जैसे जैसे खर्च बढ़ा, उन्होंने औपचारिक मदद लेने का फैसला किया. उन्होंने यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत लोन के लिए आवेदन किया. स्थानीय अधिकारियों की मदद से कागजी प्रक्रिया पूरी हुई. बैंक से जुड़े काम हुए. इससे उन्हें वर्किंग कैपिटल मिला और काम को स्थिर करने में मदद मिली.
अनुभव कहते हैं कि सीएम युवा योजना उनके लिए दिशा नहीं बल्कि सहारा बनी. इससे वह उत्पादन की बारीकियों पर ध्यान दे सके. जैसे जैसे यूनिट नियमित चक्र में चलने लगी, उन्होंने कुछ लोगों को काम पर रखा. इससे रोजमर्रा का काम बंट गया और निरंतरता बनी रही.
आज उनकी दिनचर्या पहले से कहीं ज्यादा व्यवस्थित है. आमदनी भी नियमित हो गई है. शुरुआती प्रयोगों की अनिश्चितता अब पीछे छूट चुकी है.
अनुभव अपने इस बदलाव को किसी बड़े छलांग की तरह नहीं देखते. उनके लिए यह छोटे छोटे सुधारों और लगातार सीखने का नतीजा है. एक कमरे में शुरू हुआ प्रयोग आज स्थिर काम बन चुका है. यह कहानी धैर्य, तकनीक और संतुलन खोजने की है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



