MYLYFCARE: सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जॉब छोड़कर खड़ी की हेल्थटेक कंपनी — दवा, टेस्ट और डॉक्टर सब एक जगह
कानपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर सतीश कुमार सिंह ने IT करियर छोड़कर MYLYFCARE हेल्थटेक प्लेटफॉर्म शुरू किया. यह प्लेटफॉर्म दवा की डिलीवरी, डायग्नोस्टिक टेस्ट, डॉक्टर कंसल्टेशन और होम हेल्थकेयर सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध करता है, जिससे मरीजों को घर बैठे तेज और भरोसेमंद चिकित्सा सेवाएं मिलती हैं.
भारत में हेल्थकेयर सिस्टम लंबे समय से कई चुनौतियों से जूझ रहा है. मरीज को दवा के लिए एक जगह जाना पड़ता है. टेस्ट के लिए दूसरी जगह. डॉक्टर से मिलने के लिए अलग अस्पताल. इस पूरी प्रक्रिया में समय भी लगता है और परेशानी भी होती है.
दिल्ली NCR में काम कर रही हेल्थटेक कंपनी MYLYFCARE इसी समस्या को हल करने की कोशिश कर रही है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए दवाइयों की तेज डिलीवरी, घर पर टेस्ट, डॉक्टर कंसल्टेशन और कई अन्य सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.
इस स्टार्टअप के जनक हैं कानपुर के सतीश कुमार सिंह (Satish Kumar Singh). उनकी यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं है. एक इंजीनियर से हेल्थटेक फाउंडर बनने तक का उनका सफर कई अनुभवों से भरा रहा.
हाल ही में YourStory हिंदी से हुई बातचीत में उन्होंने MYLYFCARE की शुरुआत, हेल्थकेयर सेक्टर में काम करने की प्रेरणा और कंपनी के अब तक के सफर के बारे में बताया.
कानपुर से शुरू हुआ सफर
सतीश कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के कानपुर से आते हैं. उनका बचपन पढ़ाई और अनुशासन वाले माहौल में बीता. परिवार ने हमेशा शिक्षा को सबसे ऊपर रखा.
स्कूल के दिनों से ही वह पढ़ाई में अच्छे थे. साथ ही खेलों में भी सक्रिय रहे. यूपी बोर्ड की दसवीं परीक्षा में उन्होंने कानपुर में तीसरा स्थान और पूरे राज्य में दसवां स्थान हासिल किया.
सतीश बताते हैं कि स्कूल के दिनों में मिली जिम्मेदारियों ने उन्हें आत्मविश्वास दिया.
वह कहते हैं, “मैंने बहुत छोटी उम्र में समझ लिया था कि जिम्मेदारी लेना और नेतृत्व करना जीवन में बहुत जरूरी होता है.”
स्कूल में वह क्लास लीडर भी रहे. वर्ष 2004 में उन्हें एक दिन के लिए प्रिंसिपल बनने का मौका मिला. यह अनुभव उनके लिए खास रहा.
इसके बाद उन्होंने IILM AHL से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 2010 में ग्रेजुएट हुए. पढ़ाई के बाद उन्होंने आईटी सेक्टर में काम शुरू किया.
करीब सात साल से अधिक समय तक उन्होंने बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया. इसी दौरान उनकी तकनीकी समझ मजबूत हुई.
कोरोना महामारी ने बदला सोचने का तरीका
सतीश के जीवन में असली बदलाव कोरोना महामारी के दौरान आया. कोरोना महामारी के समय उन्होंने देखा कि कई मरीजों को दवा, टेस्ट और डॉक्टर तक पहुंचने में मुश्किल हो रही थी. लोग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे. हेल्थकेयर सेवाएं बिखरी हुई थीं.
यही अनुभव उनके लिए एक नई सोच की शुरुआत बना.
सतीश कहते हैं, “महामारी ने हमें दिखाया कि भारत में हेल्थकेयर कितनी बिखरी हुई है. मरीज को अलग अलग जगह भटकना पड़ता है. तभी मैंने सोचा कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म होना चाहिए जहाँ सारी सेवाएं एक साथ मिल सकें.”
इसी सोच से MYLYFCARE की शुरुआत हुई.
एक प्लेटफॉर्म पर पूरी हेल्थकेयर
MYLYFCARE का उद्देश्य है घर बैठे हेल्थकेयर सेवाएं उपलब्ध कराना. यह प्लेटफॉर्म दवा की डिलीवरी, डायग्नोस्टिक टेस्ट, डॉक्टर कंसल्टेशन, नर्सिंग सेवा, मेडिकल उपकरण किराये और एम्बुलेंस जैसी सेवाओं को एक साथ जोड़ता है.
सतीश बताते हैं कि स्टार्टअप का मॉडल O2O यानी ऑफलाइन टू ऑनलाइन है. वह कहते हैं, “हमने टेक्नोलॉजी और लोकल हेल्थ नेटवर्क को जोड़ने की कोशिश की है. ताकि मरीज को जल्दी और भरोसेमंद सेवा मिल सके.”
दिल्ली NCR में कंपनी 30 से 60 मिनट के भीतर दवा की डिलीवरी और सैंपल कलेक्शन की सुविधा देने का दावा कर रही है. इसके लिए स्थानीय फार्मेसी और डायग्नोस्टिक पार्टनर्स के साथ नेटवर्क बनाया गया है.
अलग पहचान बनाने की कोशिश
आज भारत में कई हेल्थटेक प्लेटफॉर्म मौजूद हैं. लेकिन MYLYFCARE अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है. कंपनी ने एक खास मॉडल विकसित किया है जिसे “Virtual Test Booking” कहा जाता है.
इस मॉडल का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो टेक्नोलॉजी के ज्यादा जानकार नहीं हैं. जैसे बुजुर्ग या ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग.
सतीश बताते हैं, “हम चाहते हैं कि हेल्थकेयर सिर्फ टेक-सेवी लोगों तक सीमित न रहे. बुजुर्ग और कम तकनीकी ज्ञान वाले लोग भी आसानी से सेवाएं ले सकें.”
कंपनी फार्मेसी, लैब टेस्ट, डॉक्टर कंसल्टेशन और होम हेल्थकेयर को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराती है.
बिजनेस मॉडल
MYLYFCARE का बिजनेस मॉडल B2C (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) और B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) दोनों तरह का है. सीधे ग्राहकों को दवा डिलीवरी, टेस्ट और हेल्थ सेवाएं दी जाती हैं. वहीं सोसाइटी और संस्थानों के लिए हेल्थ प्लान भी तैयार किए जाते हैं.
कंपनी का अनुमानित सालाना रेवेन्यू एक से पांच मिलियन डॉलर के बीच बताया जाता है.
सतीश कहते हैं, “हमारा लक्ष्य सिर्फ कारोबार बढ़ाना नहीं है. हम हेल्थकेयर को ज्यादा आसान और सुलभ बनाना चाहते हैं.”
दिलचस्प बात यह है कि यह स्टार्टअप अभी तक बूटस्ट्रैप्ड है. यानी कंपनी ने बाहरी निवेश नहीं लिया है.
सतीश ने पिछले छह वर्षों में अपने स्तर पर लगभग दो करोड़ रुपये निवेश किए हैं. परिवार और दोस्तों का भी सहयोग मिला है.
कंपनी को नोएडा के Atal Incubation Centre BIMTECH और ITS Engineering College Incubation Center से भी मार्गदर्शन मिला.
भविष्य की योजनाएं
अब कंपनी अपने विस्तार की योजना बना रही है. दिल्ली NCR के बाद अन्य बड़े शहरों और टियर टू शहरों में सेवाएं शुरू करने की तैयारी चल रही है. साथ ही घर पर मिलने वाली क्रिटिकल केयर सेवाओं और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर भी काम हो रहा है.
सतीश कहते हैं, “हमारा सपना है कि भारत में हेल्थकेयर समय, जगह या टेक्नोलॉजी पर निर्भर न रहे. हर व्यक्ति को सही समय पर इलाज मिल सके.”
उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी और लोकल नेटवर्क को साथ लाकर भारत में हेल्थकेयर को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है.



