KITG 2026: छत्तीसगढ़ में चमका झारखंड का सितारा, बाबूलाल हेम्ब्रम ने गरीबी से लड़कर वेटलिफ्टिंग में जीता मेडल
छत्तीसगढ़ में खेले जा रहे पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ (KITG) 2026 में झारखंड के युवा वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम ने अपनी छाप छोड़ी है. उन्होंने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता है. आर्थिक तंगी से जूझते हुए बाबूलाल एक-एक मेडल के साथ अपनी पहचान बना रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में खेले जा रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 (Khelo India Tribal Games - KITG 2026) में देशभर से आए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं. इसी मंच पर झारखंड के युवा वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम (Babulal Hembrom) ने भी सबका ध्यान खींचा. उन्होंने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई.
यह सिर्फ एक पदक नहीं है. यह संघर्ष और मेहनत की कहानी है.
छोटे गांव से बड़ा सपना
बाबूलाल झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव से आते हैं. यह एक छोटा सा गांव है. यहां से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होता.
वे साधारण परिवार से आते हैं. उनकी मां एक स्कूल में खाना पकाती हैं. पिता छोटे मोटे काम करके घर चलाते हैं. पांच भाई बहनों में बाबूलाल सबसे छोटे हैं.
आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौती रही. लेकिन सपनों में कभी कमी नहीं आई.
बाबूलाल की कहानी का सबसे खास हिस्सा उनका संघर्ष है. जब उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की, तब उनके पास सही उपकरण नहीं थे. कोच गुरविंदर सिंह ने उनकी कद काठी देखकर उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी. लेकिन असली चुनौती थी पैसे.
बाबूलाल ने हार नहीं मानी. उन्होंने कंस्ट्रक्शन साइट्स पर बांस और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया. यही उनका जिम था. यही उनकी ट्रेनिंग थी.
यह आसान नहीं था. लेकिन उनका हौसला मजबूत था.

आर्थिक तंगी से जूझते हुए झारखंड के वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम एक-एक मेडल के साथ बना रहे हैं अपनी पहचान. (image: KITG 2026)
रोज 60 किलोमीटर का सफर
बाद में उन्हें झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) में ट्रेनिंग का मौका मिला. लेकिन इसके लिए भी उन्हें रोज 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था.
वह हर दिन इतनी दूरी तय करके कोच गुरविंदर सिंह के मार्गदर्शन में अभ्यास करते थे. यह मेहनत धीरे-धीरे रंग लाने लगी.
पहले ही बना चुके हैं पहचान
बाबूलाल ने उम्र के हिसाब से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है.
साल 2024 में उन्होंने चेन्नई में आयोजित Khelo India Youth Games में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता. इसके बाद उन्होंने विश्व युवा वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए.
अब वह धीरे-धीरे बड़े मंच की ओर बढ़ रहे हैं.
KITG 2026 से बढ़ा आत्मविश्वास
छत्तीसगढ़ में आयोजित Khelo India Tribal Games 2026 में मिला रजत पदक उनके लिए बहुत खास है.
बाबूलाल मानते हैं कि यह पदक उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है. उन्हें भरोसा है कि वह सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अब बाबूलाल सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं. वह फिलहाल पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं.
उनका लक्ष्य साफ है. वह भारत के लिए बड़े मंच पर खेलना चाहते हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व करना उनका सपना है.
बाबूलाल हेम्ब्रम की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं है. यह उस जिद की कहानी है जो हालात से बड़ी होती है. बांस और लोहे से शुरू हुआ सफर आज राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है. यह दिखाता है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो रास्ते खुद बनते हैं.
आज बाबूलाल जैसे खिलाड़ी देश के युवाओं को यह संदेश दे रहे हैं कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती.
(images: KITG 2026)





