बिना फंडिंग CodelogicX ने कैसे बनाया अपना मुकाम, अब AI और SaaS पर दांव
कोलकाता की CodelogicX ने 2013 में 32 लाख रुपये से शुरुआत की. आज कंपनी AI, SaaS और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर काम कर रही है. YourStory से बात करते हुए फाउंडर अमिताभ रॉय बताते हैं कि बिना बाहरी फंडिंग के कंपनी को कैसे बढ़ाया और अब आगे की ग्रोथ के लिए क्या रणनीति है.
टेक्नोलॉजी की दुनिया में किसी कंपनी की शुरुआत अक्सर एक बड़े आइडिया से होती है. लेकिन उसे टिकाए रखना आसान नहीं होता. कोलकाता की CodelogicX ने भी 2013 में एक ऐसे समय में शुरुआत की थी, जब कई स्टार्टअप अच्छे आइडिया के बावजूद टैलेंट, सही प्लानिंग और बेहतर अमल की कमी से जूझ रहे थे. अमिताभ रॉय ने इसी अंतर को करीब से देखा और करीब 32 लाख रुपये लगाकर शुरुआत की.
आज CodelogicX का काम सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से आगे बढ़कर AI, क्लाउड, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और SaaS (Software as a Service) तक पहुंच चुका है. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष25 में रेवेन्यू 14.5 करोड़ रुपये रहा और वह स्थापना के बाद से हर साल मुनाफे में रही है. यह सफर ऐसे दौर में आगे बढ़ रहा है जब भारतीय टेक इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.
Nasscom की Annual Strategic Review 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर का रेवेन्यू वित्त वर्ष25 में 5.1% बढ़कर $282.6 बिलियन हो गया. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष26 में यह इंडस्ट्री $300 बिलियन के रेवेन्यू का आंकड़ा पार कर सकती है. ऐसे माहौल में CodelogicX अब अपने सर्विस बिजनेस के साथ TeamTrace और FieldTrace जैसे SaaS प्रोडक्ट्स को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है.
YourStory ने हाल ही में CodelogicX के फाउंडर और CEO अमिताभ रॉय से बात की. इस बातचीत में उन्होंने कंपनी की शुरुआत और अब तक के सफर के बारे में बताया. उन्होंने बिना बाहरी फंडिंग के बिजनेस खड़ा करने की चुनौतियों पर भी बात की. साथ ही, AI के बढ़ते प्रभाव और कंपनी की आगे की योजनाओं को लेकर भी अपने विचार साझा किए.

कैसे हुई शुरुआत
अमिताभ रॉय किसी बड़े कारोबारी घराने से नहीं आते हैं. उनका ऑन्त्रप्रेन्योरशिप का सफर कई संघर्षों से गुजरा है. उनकी दिलचस्पी टेक्नोलॉजी और लोगों के साथ काम करने में थी. उन्होंने Jorhat Engineering College से MCA किया है. शुरुआती करियर में उन्होंने देखा कि कई स्टार्टअप अच्छे बिजनेस आइडिया होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पा रहे थे. कहीं प्लानिंग कमजोर थी, तो कहीं टेक टैलेंट की कमी थी.
इसी अनुभव ने उन्हें 2013 में CodelogicX शुरू करने के लिए प्रेरित किया. कंपनी का हेडक्वार्टर कोलकाता में है. शुरुआती लक्ष्य साफ था. लोगों को टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर संभव मदद देना, जिससे उनका आइडिया बिजनेस बने और आगे बढ़ सकने वाले डिजिटल प्रोडक्ट में बदले.
अमिताभ रॉय बताते हैं, “मेरे लिए ऑन्त्रप्रेन्योरशिप के मायने केवल कंपनी खड़ी करना नहीं है. यह असल समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की प्रक्रिया है. शुरुआती दौर में मैंने देखा कि कई अच्छे बिजनेस आइडिया प्लानिंग और सही टैलेंट के अभाव में पीछे रह जाते हैं. इसी अनुभव ने CodelogicX की नींव रखी. हमारा मकसद शुरू से ऐसा टेक्नोलॉजी पार्टनर बनना था, जो बिजनेस को केवल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए सही दिशा और समाधान दे सके.”
बिना फंडिंग के आगे बढ़ने का फैसला
CodelogicX की शुरुआत करीब 32 लाख रुपये की पूंजी से हुई. यह रकम अमिताभ ने अपनी निजी बचत से लगाई थी. कंपनी ने अब तक किसी भी बाहरी निवेशक से फंडिंग नहीं जुटाई है. रॉय के मुताबिक, शुरुआत से ही कंपनी ने कमाई के जरिए धीरे और टिकाऊ तरीके से बढ़ने पर ध्यान दिया.
इस मॉडल में चुनौतियां भी थीं. एक छोटी कंपनी के लिए ग्राहकों का भरोसा जीतना आसान नहीं होता. खासकर तब, जब सामने बड़ी और स्थापित टेक कंपनियां हों. CodelogicX ने इसका जवाब लगातार काम की गुणवत्ता और ग्राहक संबंधों से देने की कोशिश की. कंपनी के अनुसार, वह स्थापना के बाद से हर साल मुनाफे में रही है.
अमिताभ रॉय कहते हैं, “हमने जानबूझकर बूटस्ट्रैप्ड रहने का फैसला किया. इसका मतलब था कि हमें हर फैसले में वित्तीय अनुशासन रखना पड़ा. शुरुआती कमाई को हमने टीम, तकनीकी क्षमता और नए समाधान विकसित करने में लगाया. बाहरी निवेश नहीं होने से हमारी रफ्तार कभी कभी धीमी रही, लेकिन इससे हमें अपने फैसले खुद लेने की आजादी भी मिली. हमने जल्दी बढ़ने के बजाय ऐसी नींव बनाने पर ध्यान दिया, जिस पर लंबे समय तक कारोबार खड़ा रह सके.”

CodelogiX की टीम
सर्विस से SaaS तक बदलता मॉडल
समय के साथ CodelogicX का कारोबार केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहा. कंपनी अब प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, क्लाउड, AI और मशीन लर्निंग (ML), Generative AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में काम करती है. इसके साथ ही कंपनी SaaS प्रोडक्ट्स पर भी ध्यान दे रही है.
TeamTrace और FieldTrace उसके प्रमुख इन हाउस प्लेटफॉर्म हैं. TeamTrace का इस्तेमाल वर्कफोर्स प्रोडक्टिविटी और ऑपरेशनल विजिबिलिटी जैसे क्षेत्रों में किया जाता है. FieldTrace फील्ड वर्कफोर्स मैनेजमेंट की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
कंपनी का रेवेन्यू मॉडल भी इसी बदलाव को दिखाता है. वित्त वर्ष25 में CodelogicX ने 14.5 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया. वित्त वर्ष26 में कंपनी ने 14.9 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का अनुमान जताया है. वित्त वर्ष27 के लिए लक्ष्य 18 करोड़ रुपये है. कंपनी दिसंबर 2027 तक अपने SaaS बिजनेस से 12 से 15 करोड़ रुपये का ARR हासिल करने की उम्मीद कर रही है.
अमिताभ रॉय कहते हैं, “हमने सर्विस बिजनेस से शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ समझ आया कि कुछ समस्याओं के लिए दोहराए जा सकने वाले प्रोडक्ट बेहतर समाधान दे सकते हैं. इसलिए TeamTrace और FieldTrace हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं. हमारा लक्ष्य केवल SaaS बनाना नहीं है. हम ऐसे प्रोडक्ट डेवलप करना चाहते हैं, जो वास्तविक कारोबारी समस्याओं को हल करें. सर्विस, कंसल्टिंग और प्रोडक्ट्स का यह मिश्रण हमें भविष्य के लिए अधिक संतुलित कारोबार बनाने में मदद कर सकता है.”
AI के दौर में इंजीनियर की नई भूमिका
AI ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है. अब कोड लिखने से लेकर टेस्टिंग और डॉक्यूमेंट्स तैयार करने तक कई काम AI टूल की मदद से किए जा रहे हैं. Nasscom की Enterprise Experiments with AI Agents: 2025 Global Trends स्टडी के मुताबिक, करीब 90% कंपनियों के पास AI के लिए अलग बजट है, जबकि 88% कंपनियां 2025 में AI एजेंट्स की टेस्टिंग और डेवलपमेंट के लिए विशेष बजट रखने की तैयारी में थीं.
रॉय के लिए इसका मतलब इंजीनियरों की विदाई नहीं है. बल्कि भूमिका में बदलाव है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में इंजीनियरों को कोड लिखने के साथ समस्या समझने, सिस्टम डिजाइन करने और AI को सही तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करनी होगी.
अमिताभ रॉय कहते हैं, “AI सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जगह नहीं ले रहा है. वह उसके काम का तरीका बदल रहा है. आने वाले समय में इंजीनियर केवल कोड लिखने वाला व्यक्ति नहीं रहेगा. उसे समस्या समझने वाला, सिस्टम के बारे में सोचने वाला और AI को सही दिशा देने वाला पेशेवर बनना होगा. आर्किटेक्चर, सुरक्षा, प्रोडक्ट सोच और जटिल कारोबारी समस्याओं को समझने की जरूरत बनी रहेगी. इसलिए AI से मुकाबला करने के बजाय उसके साथ काम करना सीखना ज्यादा जरूरी है.”
आगे की राह
CodelogicX फिलहाल भारत के साथ अमेरिका और कनाडा में भी काम कर रही है. कंपनी की योजना बहुत तेजी से नए देशों में जाने की नहीं है. इसके बजाय मौजूदा बाजारों में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर है. AI-समर्थित डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड, डेटा एनालिटिक्स और वर्कफोर्स ऑटोमेशन इसके अगले चरण के प्रमुख क्षेत्र हैं.
कंपनी के सामने चुनौती भी साफ है. टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. आज Generative AI महत्वपूर्ण है, तो कल Agentic AI और नई टेक्नोलॉजी बिजनेस का तरीका बदल सकती हैं. ऐसे में किसी कंपनी के लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी अपनाना काफी नहीं है. उसे सही समय पर सही टेक्नोलॉजी को बिजनेस की जरूरत से जोड़ना भी होगा.
अमिताभ रॉय कहते हैं, “ऑन्त्रप्रेन्योर्स के लिए मेरी सबसे बड़ी सलाह है कि वे हाइप के बजाय समस्या पर ध्यान दें. आज AI चर्चा में है और कल कोई दूसरी टेक्नोलॉजी हो सकती है. लेकिन वास्तविक समस्या का समाधान हमेशा मायने रखेगा. सीखते रहना, ग्राहकों को ध्यान से सुनना और जरूरत के मुताबिक खुद को बदलना जरूरी है. बिजनेस लंबे समय की यात्रा है. इसमें तेज शुरुआत से ज्यादा महत्वपूर्ण निरंतरता, ईमानदारी और भरोसा है.”
अब कंपनी के सामने अगला सवाल यह है कि बूटस्ट्रैप्ड सर्विस बिजनेस को कितनी मजबूती से SaaS और AI-समर्थित बिजनेस में बदला जा सकता है. आने वाले कुछ साल इस सफर का सबसे दिलचस्प हिस्सा हो सकते हैं.



