मथुरा की कुसुम सैनी ने पगड़ी और मुकुट बनाकर बनाई अपनी पहचान
मथुरा की कुसुम सैनी ने घर से पगड़ी और धार्मिक मुकुट बनाने का काम शुरू किया. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक सहायता ने कच्चा माल और उपकरण खरीदने में मदद की. आज उनका छोटा यूनिट कई लोगों को रोजगार देकर स्थिर आय का आधार बन चुका है.
मथुरा जिले के बिड़ला मंदिर इलाके की एक संकरी गली में एक छोटा सा घर है. इसी घर के एक हिस्से में पगड़ी और सजावटी मुकुट तैयार होते हैं. कपड़ा काटा जाता है. नाप के अनुसार पैटर्न बनाए जाते हैं. सिलाई होती है. फिर लेस, मोती, पत्थर और जरी से सजावट की जाती है. अंत में तैयार मुकुट और पगड़ी पैक होकर मंदिरों और धार्मिक आयोजनों के लिए भेजे जाते हैं.
इस छोटे से यूनिट को चलाती हैं कुसुम सैनी. वह पिछले करीब पांच साल से इस काम में लगी हैं. जो काम उन्होंने घर पर देखकर और मदद करते हुए सीखा था, वही अब उनके परिवार की आजीविका का सहारा बन चुका है.
कुसुम ने किसी बड़े संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया. उन्होंने किसी अनुभवी व्यक्ति को काम करते देखा. साथ में हाथ बंटाया. फिर खुद अभ्यास किया. शुरुआत में उत्पादन बहुत कम था. दो लोग मिलकर जितना बना पाते, उतना ही तैयार होता.
कच्चा माल भी कम मात्रा में खरीदा जाता था. तैयार सामान आसपास के खरीदारों को सावधानी से दिया जाता था. धीरे धीरे अनुभव बढ़ा. हाथ की पकड़ मजबूत हुई. डिजाइन में निपुणता आई.
अब वह जटिल मुकुट भी बनाती हैं. जिनमें कई परतों की सजावट और बारीक काम होता है. वृंदावन, बरसाना और नंदगांव जैसे स्थानों से भी ऑर्डर आने लगे. इन जगहों पर धार्मिक परंपराओं के लिए पगड़ी और मुकुट की नियमित मांग रहती है.
कुसुम अनुमान के आधार पर बड़ा उत्पादन नहीं करतीं. वह कहती हैं कि काम ऑर्डर के अनुसार ही किया जाता है. इससे नुकसान का जोखिम कम रहता है. बड़े और विशेष डिजाइन वाले मुकुट तभी बनाए जाते हैं जब पक्का ऑर्डर हो.
उनका काम पूरी तरह हाथ से होता है. इसलिए गुणवत्ता पर ध्यान जरूरी है. हर टुकड़ा समय लेकर बनाया जाता है. यही वजह है कि ग्राहक भरोसा करते हैं.
एक स्थानीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्हें अलग अलग आजीविका विकल्पों की जानकारी मिली. उसी दौरान यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में जानकारी मिली. कुसुम ने नया काम शुरू करने के बजाय उसी काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया, जिसे वह पहले से जानती थीं.
योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने कच्चा माल थोक में खरीदना शुरू किया. कुछ बुनियादी उपकरण जोड़े. इससे उत्पादन थोड़ा बढ़ा. काम में स्थिरता आई.
कुसुम कहती हैं, “इससे हमने अपना काम बढ़ा लिया और घर का खर्च चलने लगा.” अब उनके साथ कुल पांच लोग काम करते हैं. ज्यादातर महिलाएं घर से ही कपड़ा काटने, सिलाई और सजावट का काम करती हैं.
कुसुम की योजना बहुत बड़ी नहीं है. वह धीरे धीरे काम बढ़ाना चाहती हैं. दो तीन और लोगों को जोड़ने की सोचती हैं. लेकिन जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं. उनके लिए सबसे जरूरी है गुणवत्ता बनाए रखना.
यह सफर किसी बड़ी छलांग का नहीं है. यह छोटे और सावधानी से उठाए गए कदमों का है. अनिश्चितता से निकलकर एक नियमित काम तक पहुंचने का है.
आज यह छोटा यूनिट कई परिवारों के लिए आय का जरिया है. कुसुम सैनी की कहानी दिखाती है कि घर से शुरू हुआ हुनर भी धीरे धीरे मजबूत आधार बन सकता है. बस जरूरत है धैर्य, मेहनत और सही समय पर मिले सहारे की.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



