कैसे बलरामपुर की कुसुमलता सिंह ने घर से शुरू किया बुटीक और बदली किस्मत!
बलरामपुर की कुसुमलता सिंह ने घर से सिलाई करके डिजाइनर बुटीक खड़ा किया. कोरोना महामारी के बाद घर से काम करते हुए उन्होंने यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना’ के लोन से नई मशीनें खरीदीं और अपने हुनर से स्थिर आजीविका बनाई.
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की मानसा पुरी कॉलोनी में रहने वाली कुसुमलता सिंह ने घर से शुरुआत करते हुए एक स्थिर सिलाई और डिजाइनिंग का काम खड़ा किया है. वह ‘अम्बा बुटीक’ की संस्थापक और संचालक हैं.
कुसुमलता बताती हैं कि उन्होंने साल 2005 में सिलाई सीखनी शुरू की थी और 2012–13 में इसे पेशेवर तौर पर अपनाया. आज वह ब्लाउज, पेटीकोट, कुर्ता, फैंसी ड्रेस और लहंगे जैसे कपड़े स्थानीय ग्राहकों के लिए तैयार करती हैं.
पड़ोस की जरूरत से बना बुटीक
कुसुमलता ने 2005 में सिद्धार्थनगर में औपचारिक कक्षाएं ली थीं. यहां उन्होंने कढ़ाई, सिलाई और कपड़ों पर बेसिक पेंटिंग सीखी.
शुरुआत में उन्होंने घर से ही काम किया. जैसे जैसे ऑर्डर बढ़े, उन्होंने स्थानीय बाजार में एक छोटी दुकान किराए पर ली. वह खुद कच्चा माल खरीदती हैं. ग्राहकों से डिजाइन पर बात करती हैं और फिर नाप लेकर कपड़े काटती और सिलती हैं.
उनका कहना है कि उनके काम का सबसे बड़ा प्रचार मुख जुबानी हुआ है. ग्राहकों से बार-बार मिलने वाले ऑर्डर ने उनकी आमदनी को स्थिर बनाया.
कोरोना का झटका और फिर घर वापसी
कोरोना महामारी के दौरान बाजारों में आवाजाही कम हो गई. इससे कई छोटे दुकानदारों को नुकसान हुआ. कुसुमलता को भी किराए की दुकान छोड़नी पड़ी और फिर से घर से काम शुरू करना पड़ा. अच्छी बात यह रही कि पुराने ग्राहक उनके साथ जुड़े रहे.
हालात सुधरने पर नए ग्राहक भी घर पर आने लगे. यह काम उनके पांच लोगों के परिवार को सहारा देता है. उनके पति भी कमाते हैं और उनके तीन छोटे बच्चे अभी स्कूल में पढ़ते हैं.
CM Yuva Yojana से कैसे बदला कामकाज
कुसुमलता बताती हैं कि पैसों की कमी के कारण वह नई सिलाई मशीनें नहीं खरीद पा रही थीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना’ (CM Yuva Yojana) के तहत लोन के लिए आवेदन किया. लोन मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक मशीनें खरीदीं. इससे काम की रफ्तार बढ़ी और फिनिशिंग भी बेहतर हुई. जो काम पहले दो घंटे में होता था, वह अब करीब एक घंटे में पूरा हो जाता है.
मशीन चलाना उन्होंने ऑनलाइन वीडियो देखकर खुद ही सीखा. लोन के साथ कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं मिली. फिर भी इस पूंजी से उनका काम तेजी से बढ़ा. खासकर शादी के मौसम में ज्यादा ऑर्डर पूरे करना आसान हुआ.
उनके बुटीक में रोजमर्रा के कपड़ों के साथ खास मौकों के लिए भी कपड़े बनते हैं. ब्लाउज और पेटीकोट पूरे साल चलते रहते हैं. शादी के मौसम में कुर्ता और लहंगे की मांग बढ़ जाती है. वह हर कपड़ा ग्राहक के नाप और बजट के अनुसार बनाती हैं. डिजाइन की जटिलता के हिसाब से लेस, कढ़ाई और पैनल जोड़े जाते हैं. कच्चा माल स्थानीय बाजार से लिया जाता है ताकि खर्च काबू में रहे और काम जल्दी पूरा हो सके.
युवा उद्यमियों के लिए सलाह
कुसुमलता का कहना है कि जो लोग पहली बार बिजनेस शुरू कर रहे हैं, उन्हें घर से काम शुरू करना चाहिए. इससे किराए का बोझ नहीं आता और ग्राहक भी पास रहते हैं. वह सरकारी क्रेडिट योजनाओं का लाभ लेने की सलाह देती हैं. समय पर डिलीवरी और अच्छी क्वालिटी से भरोसा बनता है.
आगे चलकर कुसुमलता चाहती हैं कि उनके डिजाइन शहर से बाहर भी जाएं. वह डिजाइन की रेंज बढ़ाना चाहती हैं. उनका सफर यह दिखाता है कि हुनर, छोटी पूंजी और समुदाय का भरोसा मिलकर छोटे शहरों में भी मजबूत रोज़गार खड़ा कर सकते हैं.
Edited by रविकांत पारीक



