बीज से बिजनेस तक: कैसे महाराजगंज के सोनू ने खड़ा किया नर्सरी बिजनेस, जानिए...
महाराजगंज के सोनू ने यूपी सरकार की CM YUVA Yojana का लाभ पाकर गांव की जमीन पर नर्सरी कारोबार खड़ा किया. बीज से पौधा तैयार कर वह किसानों और संस्थानों को सप्लाई करते हैं. यह कहानी बताती है कि सरकारी योजना से पर्यावरण और रोजगार को जोड़कर गांव में टिकाऊ उद्यम कैसे बना.
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में निचलौल कस्बे के पास बेड़वली ग्राम सभा है. इसी गांव में सोनू ने एक साधारण सी जमीन को काम की पहचान बना दिया है. सोनू खुद को नर्सरी का काम करने वाला और उद्यमी बताते हैं. उनका मानना है कि पौधे उगाना सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए जिम्मेदारी भी है.
सोनू की नर्सरी बीज से पौधा तैयार करने तक का पूरा सफर खुद संभालती है. यहां पौधे तैयार किए जाते हैं और फिर किसानों, स्थानीय संस्थानों और बाजार तक पहुंचाए जाते हैं. यह काम गांव के युवाओं को रोजगार भी देता है और इलाके को हरा भरा बनाने में मदद करता है.
खेत से शुरू हुआ नर्सरी का सफर
सोनू बताते हैं कि नर्सरी की शुरुआत परिवार की जमीन से हुई थी. शुरू में साधारण औजार थे. बीज ट्रे और पॉलीबैग का इस्तेमाल किया गया. धीरे धीरे काम ने आकार लिया. समय के साथ उन्होंने सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी जुटाई. यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) से उन्हें यह भरोसा मिला कि गांव में भी छोटा कारोबार खड़ा किया जा सकता है.
आज नर्सरी एक व्यवस्थित यूनिट की तरह काम करती है. यहां पौधों को शुरुआती अवस्था से लेकर मजबूत जड़ों तक तैयार किया जाता है. जब पौधा खेत में लगाने लायक हो जाता है, तभी उसे बेचा जाता है.
चार साल की सीख और रिसर्च
सोनू कहते हैं कि यह विचार एक दिन में नहीं बना. करीब चार साल तक उन्होंने सीखते हुए काम किया. बीज दुकानों और बाजारों से लाए गए. क्यारियां तैयार की गईं. पौधे उगाए गए. जब पौधे मजबूत हुए, तो उन्हें पॉलीबैग में शिफ्ट किया गया.
इसके बाद उनकी देखभाल की गई. पानी, छाया और मिट्टी का ध्यान रखा गया. जब पौधे टिकाऊ बन गए, तब उन्हें ग्राहकों को दिया गया. इस तरह बीज से बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया धीरे धीरे मजबूत होती गई.
सोनू की नर्सरी में फल और वन दोनों तरह के पौधे तैयार होते हैं. फलदार पौधों में अमरूद, आंवला और आम शामिल हैं. वन और सड़क किनारे लगाने वाले पौधों में कदंब जैसे मजबूत पौधे तैयार किए जाते हैं, जो स्थानीय मौसम में आसानी से बढ़ते हैं.
आम और कुछ दूसरे फलों के पौधों में ग्राफ्टिंग भी की जाती है. सोनू बताते हैं कि इससे पौधे जल्दी फल देने लगते हैं और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. पौधों की मिट्टी, पानी और धूप का संतुलन रखा जाता है, ताकि खेत में लगाने के बाद वे आसानी से जीवित रह सकें.
हरियाली ही असली मकसद
जब पौधे तय आकार और मजबूती तक पहुंच जाते हैं, तब उनकी बिक्री होती है. किसान अपनी जरूरत के हिसाब से पौधे चुनते हैं. कभी छोटे किसान खरीदते हैं, तो कभी संस्थाएं पौधारोपण के लिए बड़ी संख्या में पौधे ले जाती हैं.
ज्यादातर बिक्री मानसून और उसके बाद के समय में होती है. इस मौसम में पौधे लगाने पर उनके बचने की संभावना ज्यादा रहती है. किसान इस समय अपने बाग बढ़ाते हैं या पुराने पौधों की भरपाई करते हैं.
सोनू बार बार इस बात पर जोर देते हैं कि नर्सरी का मकसद सिर्फ कमाई नहीं है. वह इलाके को हरा और साफ देखना चाहते हैं. उनका मानना है कि अगर पर्यावरण से जुड़ा काम आजीविका भी दे, तो युवा लंबे समय तक उससे जुड़े रह सकते हैं.
उनके लिए हर पौधा एक उम्मीद है. एक तरफ वह रोजगार देता है. दूसरी तरफ हरियाली बढ़ाता है. गांव के माहौल में पनपा यह मॉडल दिखाता है कि छोटे स्तर पर भी पर्यावरण के साथ कारोबार किया जा सकता है.
सोनू की कहानी बताती है कि अगर इरादा साफ हो और मेहनत लगातार हो, तो गांव की जमीन भी भविष्य की नींव बन सकती है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



