Merino Industries की कहानी: लैमिनेट्स से इंटीरियर मैटेरियल्स तक कैसे बढ़ा कारोबार
Merino Industries ने डेकोरेटिव लैमिनेट्स से आगे बढ़कर इंजीनियर्ड पैनल, चिपबोर्ड, फर्नीचर सिस्टम और सरफेस सॉल्यूशंस तक कारोबार फैलाया है. जानिए कैसे कंपनी मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन, एग्रोफॉरेस्ट्री और सस्टेनेबिलिटी के जरिए बदलते भारतीय इंटीरियर बाजार में आगे बढ़ रही है.
हाइलाइट्स
लैमिनेट्स से कई इंटीरियर सॉल्यूशंस तक फैला Merino Industries का कारोबार
2,500+ किसान Merino के एग्रोफॉरेस्ट्री इकोसिस्टम से जुड़े
Merino की 84% से अधिक ऊर्जा जरूरतें गैर-जीवाश्म स्रोतों से पूरी
इनोवेशन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर है कंपनी का फोकस
भारत में घर और ऑफिस के इंटीरियर को लेकर ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है. अब केवल आकर्षक डिजाइन या प्रीमियम फिनिश पर्याप्त नहीं है. टिकाऊपन, बेहतर परफॉर्मेंस, कम उत्सर्जन वाली सामग्री और पर्यावरण पर कम असर जैसे पहलू भी खरीद के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं. इस बदलाव का असर डेकोरेटिव लैमिनेट्स से लेकर इंजीनियर्ड वुड और दूसरे सरफेस सॉल्यूशंस तक दिखाई दे रहा है.
6Wresearch के अनुमान के मुताबिक, भारत का डेकोरेटिव लैमिनेट्स बाजार 2025 से 2031 के बीच 7.4% की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ सकता है. बढ़ते शहरीकरण, रेजिडेंशियल और कमर्शियल कंस्ट्रक्शन और बदलती उपभोक्ता पसंद इस मांग को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं.
इसी बदलते बाजार में Merino Industries डेकोरेटिव लैमिनेट्स से आगे बढ़कर इंजीनियर्ड पैनल, चिपबोर्ड, फर्नीचर सिस्टम और अलग-अलग सरफेस सॉल्यूशंस तक अपना कारोबार फैला चुकी है. कंपनी अब अपनी अगली ग्रोथ को मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्ट इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के मेल में देख रही है.
लैमिनेट्स से आगे बढ़ता कारोबार
Merino की कारोबारी यात्रा डेकोरेटिव लैमिनेट्स के निर्माण से शुरू हुई थी. समय के साथ कंपनी ने इंजीनियर्ड पैनल, चिपबोर्ड, फर्नीचर ग्रेड बोर्ड, फर्नीचर सिस्टम और अलग-अलग सरफेस सॉल्यूशंस को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा. कंपनी भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करती है.
इस विस्तार के पीछे कंपनी का जोर तेजी से बड़ा बनने के बजाय लंबी अवधि की तैयारी पर रहा है. मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में निवेश को कंपनी अपनी ग्रोथ का अहम हिस्सा मानती है.
हाल ही में YourStory से हुई बातचीत में Merino Industries Ltd के डायरेक्टर मनोज लोहिया कहते हैं, “Merino की यात्रा हमेशा छोटी अवधि के अवसरों के बजाय लंबी सोच से आगे बढ़ी है. डेकोरेटिव लैमिनेट्स से शुरू होकर हमने कारोबार को अलग-अलग इंटीरियर और मैटेरियल सॉल्यूशंस तक बढ़ाया है. इस दौरान हमारी कोशिश केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की नहीं रही. हमने टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग की गुणवत्ता में लगातार निवेश किया है.”

Marino Industries के डायरेक्टर मनोज लोहिया
किसानों तक पहुंचती सप्लाई चेन
Merino सस्टेनेबिलिटी को फैक्ट्री के भीतर ऊर्जा और संसाधनों की बचत तक सीमित नहीं रखती. कंपनी इसे कच्चे माल की सोर्सिंग और सप्लाई चेन से भी जोड़ रही है. इसके लिए Project Nirmal और एग्रोफॉरेस्ट्री प्रोग्राम जैसे प्रयास किए जा रहे हैं.
कंपनी के मुताबिक, उसके एग्रोफॉरेस्ट्री इकोसिस्टम से 2,500 से अधिक किसान जुड़े हैं. इसके तहत 30,206 एकड़ क्षेत्र में 3.02 करोड़ पौधे लगाए गए हैं. ये आंकड़े कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं.
लोहिया कहते हैं, “केवल तेज विस्तार से मजबूत कंपनी नहीं बनती. टेक्नोलॉजी, लोगों, क्वालिटी सिस्टम और रिसर्च में लगातार निवेश जरूरी है. सप्लायर, किसान, आर्किटेक्ट और ग्राहकों के साथ लंबे रिश्ते भी उतने ही अहम हैं.”
बदलते घरों के साथ बदल रहा पोर्टफोलियो
भारतीय इंटीरियर बाजार में अब केवल रंग और डिजाइन की बात नहीं होती. ग्राहक मैट फिनिश, अलग टेक्सचर, टिकाऊपन और कम उत्सर्जन वाली सामग्री पर भी ध्यान दे रहे हैं. घरों और ऑफिस में ऐसी सामग्री की मांग बढ़ रही है जो देखने में बेहतर होने के साथ लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सके.
इसी बदलाव के बीच Merino ने एडवांस्ड डेकोरेटिव लैमिनेट्स, स्पेशलाइज्ड सरफेस सॉल्यूशंस, Luvih जैसे haute matte कलेक्शन और Merino Marine Board जैसे इंजीनियर्ड बोर्ड अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए हैं.
लोहिया कहते हैं, “आज ग्राहकों को खूबसूरती के साथ परफॉर्मेंस, टिकाऊपन और बेहतर इनडोर वातावरण भी चाहिए. इसी सोच ने हमें स्पेशलाइज्ड लैमिनेट्स, haute matte सरफेस और इंजीनियर्ड बोर्ड जैसे प्रोडक्ट विकसित करने के लिए प्रेरित किया है. हर नया प्रोडक्ट किसी व्यावहारिक जरूरत का समाधान करना चाहिए.”
भविष्य की फैक्ट्री कैसी होगी?
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए ऊर्जा का स्रोत, कच्चे माल की खरीद, कचरे का इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन जैसे मुद्दे तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं. ऐसे में भविष्य की फैक्ट्री को केवल उत्पादन और लागत के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा.
Merino के मुताबिक, उसकी 84% से अधिक ऊर्जा जरूरतें गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से पूरी होती हैं. Project Nirmal के तहत कंपनी रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग, एग्रोफॉरेस्ट्री और सर्कुलर ऑपरेशनल प्रैक्टिस को अपनी रणनीति से जोड़ रही है. यह आंकड़ा भी कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है.
लोहिया कहते हैं, “भविष्य की फैक्ट्री का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि वहां कितना उत्पादन होता है. यह भी देखा जाएगा कि वह संसाधनों का इस्तेमाल कितनी कुशलता से करती है और पर्यावरण व समुदाय के लिए कैसी वैल्यू बनाती है. हमारे लिए सस्टेनेबिलिटी अलग पहल नहीं है. इसे रोजमर्रा के कारोबारी फैसलों और लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा बनना होगा.”
भारत के लिए बड़ा मौका, लेकिन मुकाबला भी
भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, इंजीनियरिंग टैलेंट और तेजी से विकसित होता मैन्युफैक्चरिंग बेस है. लेकिन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लिए केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा. एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत सप्लाई चेन और जिम्मेदार सोर्सिंग में निवेश भी महत्वपूर्ण होगा.
अगले तीन से पांच वर्षों में Merino की नजर एडवांस्ड इंटीरियर मैटेरियल्स, इंजीनियर्ड वुड सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड सरफेस टेक्नोलॉजी से जुड़े अवसरों पर है. कंपनी आर्किटेक्ट्स, डिजाइनर्स और फर्नीचर मैन्युफैक्चरर्स के साथ भागीदारी बढ़ाने की भी बात करती है.
हालांकि, इस अवसर पर नजर रखने वाली Merino अकेली कंपनी नहीं है. भारतीय डेकोरेटिव लैमिनेट्स और सरफेस सॉल्यूशंस बाजार में Greenlam Industries, CenturyPly, Stylam Industries और AICA Laminates जैसे खिलाड़ी भी मौजूद हैं.
ऐसे में आने वाले वर्षों में मुकाबला केवल डिजाइन, कीमत या बड़े प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का नहीं होगा. मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नई सरफेस टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बदलती ग्राहक जरूरतों के साथ सस्टेनेबिलिटी भी कंपनियों के लिए अंतर पैदा कर सकती है.
Merino की कहानी भारतीय इंटीरियर मैटेरियल इंडस्ट्री में हो रहे इसी बदलाव की ओर इशारा करती है. बाजार बढ़ने के साथ असली कसौटी यह होगी कि कंपनियां ग्रोथ, लागत और इनोवेशन के साथ जिम्मेदार सोर्सिंग और पर्यावरणीय असर के बीच कितना संतुलन बना पाती हैं. यही संतुलन तय कर सकता है कि भारतीय कंपनियां घरेलू बाजार से आगे वैश्विक स्तर पर कितनी मजबूत जगह बना पाती हैं.



