मुरादाबाद में योग से बदली जिंदगी, स्वाति वर्मा का आत्मनिर्भर सफर
मुरादाबाद की स्वाति वर्मा ने दस साल के योग अभ्यास के बाद शिवोहम योगशाला शुरू की. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक मदद और अपनी बचत से उन्होंने योग स्टूडियो खड़ा किया, जो शारीरिक और मानसिक संतुलन पर केंद्रित है.
मुरादाबाद जिले में रहने वाली स्वाति वर्मा शिवोहम योगशाला चलाती हैं. यह एक छोटा सा योग स्टूडियो है, जिसकी शुरुआत उन्होंने लगभग दस साल के निजी योग अभ्यास के बाद की. स्वाति के लिए योग कभी केवल फिटनेस नहीं रहा. यह धीरे धीरे उनके सोचने, जीने और खुद को समझने का तरीका बन गया.
करीब दस वर्षों तक वह नियमित योग करती रहीं. इस दौरान उन्होंने अपने शरीर और मन में कई बदलाव महसूस किए. तनाव कम हुआ. अनुशासन आया. जीवन को देखने का नजरिया बदला. इन्हीं अनुभवों ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि योग को वह दूसरों तक भी पहुंचाना चाहती हैं और इसे अपने काम का रूप देना चाहती हैं.
शिवोहम योगशाला में सांसों के अभ्यास, आसन और रिलैक्सेशन पर ध्यान दिया जाता है. स्वाति बताती हैं कि यह जगह शहर की भागदौड़ से दूर एक शांत माहौल देने के लिए बनाई गई है. यहां कोई प्रतियोगिता नहीं है. लोग बिना दबाव के अपने शरीर और मन पर काम कर सकते हैं.
हालांकि योग का अभ्यास वह पहले से कर रही थीं, लेकिन सेंटर खोलने का फैसला आसान नहीं था. उन्हें लगा कि सिखाने के लिए गहरी समझ और औपचारिक प्रशिक्षण जरूरी है. इसी सोच के साथ वह ऋषिकेश गईं. वहां उन्होंने अलग अलग संस्थानों को देखा और फिर योग की विधिवत ट्रेनिंग पूरी की.
इस प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मविश्वास दिया. उन्हें योग के मूल सिद्धांत समझ आए. सिर्फ आसन नहीं, बल्कि योग की सोच और संरचना भी साफ हुई. इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि एक कक्षा कैसे चलानी है और लोगों की जरूरत को कैसे समझना है.
स्वाति के पास एमबीए और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री है. पहले उनका झुकाव नौकरी की ओर था. शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ समय के लिए उनका करियर पीछे चला गया. अपना काम शुरू करने का विचार जोखिम भरा लगता था. मायके की ओर से भी व्यापार का माहौल नहीं था.
लेकिन योग ने उनके भीतर धैर्य और संतुलन पैदा किया. अनिश्चितता से डर कम हुआ. धीरे धीरे उन्होंने फैसला लिया कि अब वह अपने अनुभव को एक दिशा देंगी.
सबसे पहले सही जगह तलाशनी थी. वह किसी भीड़भाड़ वाले बाजार में सेंटर नहीं चाहती थीं. उन्हें शांति चाहिए थी. आखिरकार बुद्ध बाजार इलाके में उन्हें एक किराए की जगह मिली. करीब चालीस दिनों में योगशाला तैयार हुई. यह समय काफी व्यस्त रहा. लेकिन उनका पूरा ध्यान एक सरल और शांत माहौल बनाने पर था.
पैसों की व्यवस्था एक और चुनौती थी. शुरुआती खर्च अनुमान से ज्यादा निकला. कई बार काम रुकता सा लगा. इसी दौरान उन्हें यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में जानकारी मिली. इस योजना और अपनी बचत की मदद से वह सेटअप पूरा कर पाईं. फंड स्टूडियो खुलने से कुछ ही समय पहले मिला. लेकिन आखिरकार शिवोहम योगशाला ने अपने दरवाजे खोल दिए.
पहले ही महीने में करीब चालीस लोग जुड़ गए. स्वाति बताती हैं कि ज्यादातर लोग योग को केवल कसरत समझकर आए थे. धीरे धीरे उन्होंने सांस, रिलैक्सेशन और नियमित अभ्यास की अहमियत समझनी शुरू की.
अपने सफर को याद करते हुए स्वाति कहती हैं कि योग ने सिर्फ उनका वजन नहीं बदला, बल्कि उनकी सोच और जीवन को देखने का नजरिया भी बदल दिया.
आज शिवोहम योगशाला उनके लिए मंजिल नहीं, बल्कि एक स्थिर शुरुआत है. वर्षों की तैयारी, सीख और धैर्य अब एक ठोस रूप ले चुके हैं. मुरादाबाद में यह योगशाला स्वाति के उस विश्वास का प्रतीक है, जो उन्होंने खुद पर और योग की शक्ति पर किया.
Edited by रविकांत पारीक



