Mother Sparsh: सरकारी नौकरी छोड़ शुरू किया बेबी केयर ब्रांड, अब सालाना 200 करोड़ रुपये का कारोबार
डॉ. हिमांशु गांधी ने सरकारी नौकरी छोड़कर बेबी केयर ब्रांड Mother Sparsh की शुरुआत की. कभी 20 लाख रुपये से शुरू हुआ यह ब्रांड आज करीब 200 करोड़ रुपये के सालाना रन रेट से आगे बढ़ रहा है. जानिए कैसे कपास व पानी की सोच से मिला आइडिया बना बड़ा बिजनेस.
बेबी केयर प्रोडक्ट्स की दुनिया बाहर से देखने पर बेहद आसान लगती है. बच्चों के लिए साबुन, लोशन, वाइप्स और दूसरे प्रोडक्ट्स बाजार में पहले से मौजूद हैं. लेकिन जब बात अपने बच्चे की आती है तो माता-पिता की उम्मीदें बदल जाती हैं. वे सिर्फ कोई प्रोडक्ट नहीं खरीदना चाहते. वे भरोसा चाहते हैं. इसी भरोसे की जरूरत को समझने से Mother Sparsh की शुरुआत हुई.
हरियाणा के एक छोटे शहर से आने वाले डॉ. हिमांशु गांधी ने MBA और PhD की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने हरियाणा सरकार में सीनियर पोजिशन पर काम किया. सरकारी नौकरी से ऑन्त्रप्रेन्योरशिप की ओर आना आसान फैसला नहीं था. लेकिन उन्हें बेबी केयर में एक ऐसा अंतर नजर आया, जहां प्रोडक्ट्स से ज्यादा जरूरत को समझने की गुंजाइश थी.
2018 में शुरू हुए बेबी केयर ब्रांड Mother Sparsh ने इसी सोच के साथ अपने सफर का आग़ाज़ किया. कंपनी का दावा है कि आज इसका सालाना रन रेट करीब 200 करोड़ रुपये है.
कपास और पानी की सोच से मिला आइडिया
डॉ. हिमांशु गांधी के लिए ऑन्त्रप्रेन्योरशिप की शुरुआत किसी बड़े बिजनेस प्लान से नहीं हुई. उन्होंने बेबी केयर कैटेगरी को करीब से देखा और पाया कि कई प्रोडक्ट्स बाजार में कमोडिटी की तरह बेचे जा रहे थे. सवाल यह था कि क्या हर प्रोडक्ट को किसी खास पैरेंटिंग समस्या का समाधान बनाया जा सकता है.
बेबी वाइप्स इसका सबसे अच्छा उदाहरण बने. बाजार में पहले से वाइप्स थे, लेकिन कई प्रोडक्ट सिंथेटिक, प्लास्टिक आधारित या साबुन आधारित थे. Mother Sparsh ने इस जगह पर एक आसान सवाल रखा. बच्चे की त्वचा को साफ करने के लिए वास्तव में क्या चाहिए. जवाब था कपास और पानी. इसी सोच से 99% Pure Water Unscented Baby Wipes विकसित हुए.
YourStory से बात करते हुए Mother Sparsh के को-फाउंडर और CEO डॉ. हिमांशु गांधी बताते हैं, “हमारे लिए अवसर सिर्फ बाजार में एक और प्रोडक्ट जोड़ने का नहीं था. हम यह समझना चाहते थे कि माता-पिता की असली समस्या क्या है और उसे बेहतर तरीके से कैसे हल किया जा सकता है. इसी सोच ने हमें प्रोडक्ट्स को समाधान के तौर पर देखने की आदत दी. हम पहले समस्या को समझते हैं और फिर सोचते हैं कि उसके लिए किस तरह का प्रोडक्ट बनाया जाना चाहिए. यही नजरिया Mother Sparsh की नींव बना.”
₹20 लाख से हुई शुरुआत
2018 में कंपनी शुरू करते समय करीब 20 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी लगाई गई. पूंजी सीमित थी, इसलिए हर खर्च को लेकर सावधानी बरतनी पड़ी. कंपनी ने शुरुआती दौर में सेलिब्रिटी या बड़े विज्ञापन अभियानों के बजाय प्रोडक्ट और ग्राहक अनुभव पर ध्यान दिया.
सैंपलिंग इस रणनीति का अहम हिस्सा रही. टीम ने प्रोडक्ट सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए और उनकी प्रतिक्रिया सुनी. कंपनी के लिए यह समझना जरूरी था कि लोग वास्तव में प्रोडक्ट को कैसे देख रहे हैं. केवल यह मान लेना कि कोई विचार अच्छा है, पर्याप्त नहीं था.
डॉ. हिमांशु गांधी कहते हैं, “शुरुआत में हमारे पास पूंजी सीमित थी. इसलिए हमें यह तय करना था कि हर रुपये का सही इस्तेमाल हो. हमने बड़े विज्ञापनों पर खर्च करने के बजाय प्रोडक्ट लोगों के हाथ में पहुंचाया. सैंपलिंग से हमें सीधे यह जानने का मौका मिला कि ग्राहक क्या सोचते हैं. उनकी प्रतिक्रिया ने हमें कई चीजें समझाईं और उसी आधार पर हमने अपने प्रोडक्ट और फैसले बेहतर किए.”

Mother Sparsh के को-फाउंडर और CEO डॉ. हिमांशु गांधी
D2C से ओम्नीचैनल तक का सफर
Mother Sparsh ने शुरुआत D2C (डायरेक्ट टू कंज्यूमर) मॉडल से की. लेकिन कंपनी के लिए D2C का मतलब केवल अपनी वेबसाइट पर सामान बेचना नहीं था. इसका मतलब था ग्राहक के करीब रहना. उसकी शिकायत सुनना. सवालों का जवाब देना. प्रोडक्ट की डिलीवरी पर नजर रखना और लगातार फीडबैक लेना.
कोविड के दौरान इस मॉडल की अहमियत और साफ हुई. जब बाजार और फिजिकल रिटेल में कई तरह की रुकावटें आईं, तब भी माता-पिता को बेबी केयर के जरूरी प्रोडक्ट्स की जरूरत थी. कंपनी ने उस समय भी ग्राहकों को सेवा देना जारी रखा. इससे ग्राहकों के बीच भरोसा बढ़ा.
डॉ. हिमांशु गांधी कहते हैं, “हमारे लिए D2C सिर्फ एक सेलिंग चैनल नहीं है. यह ग्राहक के साथ सीधे जुड़ने का तरीका है. हम उनकी क्वेरी, रिव्यू और अनुभव को ध्यान से देखते हैं. कोविड के दौरान भी हमने यह कोशिश की कि जरूरी बेबी केयर प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचते रहें. आज हम D2C के साथ ई कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ऑफलाइन रिटेल में भी मौजूद हैं, ताकि ग्राहक जहां चाहें वहां से खरीद सकें.”
ITC का निवेश और ₹200 करोड़ की ग्रोथ
Mother Sparsh के कारोबार में एक अहम मोड़ साल 2021 में आया, जब ITC ने कंपनी में निवेश किया. बाद में ITC ने अपना निवेश बढ़ाया. यह साझेदारी केवल पूंजी तक सीमित नहीं रही. ITC का FMCG, डिस्ट्रीब्यूशन और बड़े स्तर पर कंज्यूमर बिजनेस बनाने का अनुभव कंपनी के लिए महत्वपूर्ण रहा.
आज Mother Sparsh का कारोबार बेबी और किड्स केयर पर केंद्रित है. कंपनी ने सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की रन रेट से कारोबार बढ़ने का दावा किया है. आगे कंपनी बेबी स्किनकेयर जैसे मौजूदा क्षेत्रों को मजबूत करने के साथ भारत के छोटे शहरों और उभरते बाजारों में पहुंच बढ़ाना चाहती है.
डॉ. हिमांशु गांधी बताते हैं, “ITC के साथ हमारी साझेदारी हमारे लिए सिर्फ वित्तीय निवेश नहीं है. उनके पास FMCG, डिस्ट्रीब्यूशन और बड़े कंज्यूमर बिजनेस को बनाने का लंबा अनुभव है. इससे हमें अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है. साथ ही हम उस मूल सोच को बनाए रखना चाहते हैं जिसके साथ Mother Sparsh शुरू हुआ था. हमारे लिए विकास का मतलब सिर्फ ज्यादा बिक्री नहीं, बल्कि ज्यादा ग्राहकों तक सही प्रोडक्ट्स पहुंचाना भी है.”
आगे की राह
बेबी केयर में सबसे बड़ी चुनौती भरोसा कायम करना है. माता-पिता अपने बच्चे के लिए किसी नए ब्रांड को आसानी से नहीं चुनते. Mother Sparsh ने इस भरोसे को विज्ञापन से ज्यादा प्रोडक्ट एक्सपीरियंस, सैंपलिंग और लगातार बातचीत के जरिए बनाने की कोशिश की.
कंपनी प्रोडक्ट्स तैयार करने में आयुर्वेद, प्राकृतिक सामग्री और आधुनिक विज्ञान को एक साथ देखने की बात करती है. इसका उद्देश्य केवल किसी प्रोडक्ट पर प्राकृतिक होने का दावा करना नहीं है. कंपनी के मुताबिक, किसी भी सामग्री को इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह सुरक्षित, प्रभावी और स्थिर प्रोडक्ट बनाने में कितनी उपयोगी है. गुणवत्ता को लेकर कंपनी का नजरिया भी सख्त है, क्योंकि बेबी केयर में एक छोटी गलती भी पूरे बैच को प्रभावित कर सकती है.
डॉ. हिमांशु गांधी कहते हैं, “बेबी केयर में समझौते की गुंजाइश बहुत कम है. किसी प्रोडक्ट को बाजार में भेजने से पहले कई स्तरों पर क्वालिटी और सेफ्टी की जांच जरूरी है. हमारा मानना है कि प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल तभी मायने रखता है जब वह वास्तव में उपभोक्ता के लिए उपयोगी हो. हम आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान से सीखते हैं, लेकिन आधुनिक विज्ञान के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि फाइनल प्रोडक्ट सुरक्षित, प्रभावी और आज के माता-पिता की जरूरतों के मुताबिक हो.”
Mother Sparsh की कहानी फिलहाल एक ऐसे ब्रांड की कहानी है जिसने बड़े बाजार में जगह बनाने के लिए एक अलग रास्ता चुना. शुरुआत सीमित पूंजी से हुई. आगे बढ़ने का तरीका भी धीरे-धीरे ग्राहक को समझने से बना. कंपनी अब बड़े स्तर पर पहुंच चुकी है, लेकिन उसके सामने अगली चुनौती भी साफ है. भारत के महानगरों से बाहर ज्यादा परिवारों तक पहुंचना और बढ़ते कारोबार के साथ वही भरोसा बनाए रखना.
डॉ. गांधी के लिए ऑन्त्रप्रेन्योरशिप का मतलब सिर्फ कारोबार बढ़ाना नहीं है. उनका मानना है कि किसी भी कंज्यूमर ब्रांड की असली पहचान रोज होने वाले छोटे फैसलों से बनती है. शायद यही वजह है कि Mother Sparsh की कहानी किसी एक प्रोडक्ट की कहानी नहीं लगती. यह उस सोच की कहानी है जिसमें बाजार से पहले माता-पिता और उनकी जरूरत को समझने की कोशिश की गई.



