Qila.io ने ब्लॉकचेन को बिजनेस के लिए बनाया सस्ता और सुरक्षित
Qila.io ब्लॉकचेन-एज-ए-सर्विस (BaaS) प्लेटफ़ॉर्म है. इसकी शुरुआत 2022 में सिद्धार्थ उग्रंकर और विशाल मल्होत्रा ने की थी. यह कंपनियों को आसान, किफ़ायती और रेग्युलेटरी-रेडी ब्लॉकचेन सॉल्यूशंस मुहैया करता है. हेल्थकेयर, सप्लाई चेन, फाइनेंस और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में Qila.io तेज़ी से विस्तार कर रहा है.
टेक्नॉलॉजी की दुनिया में अक्सर नए-नए शब्द सुनने को मिलते हैं. कुछ शब्द लंबे समय तक चर्चा में रहते हैं और कुछ कुछ समय बाद गायब हो जाते हैं. लेकिन ब्लॉकचेन ऐसा कॉन्सेप्ट है, जो केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहा. इसने वित्तीय लेन-देन, सप्लाई चेन, हेल्थकेयर, बीमा और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में क्रांति की संभावनाएँ पैदा की हैं.
हालांकि, बड़ी कंपनियों और संस्थाओं के लिए ब्लॉकचेन अपनाना आसान नहीं रहा. यह महंगा था, जटिल था और विशेषज्ञ संसाधनों की कमी के कारण मुश्किल भी. इसी चुनौती को आसान बनाने के लिए सामने आया है Qila.io — एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म जो ब्लॉकचेन को कंपनियों के लिए आसान, सस्ता और रेग्युलेटरी कंप्लायंस के साथ उपलब्ध कराता है.
Qila.io की शुरुआत 2022 में मुंबई से हुई. इसके फ़ाउंडर और सीईओ हैं सिद्धार्थ उग्रंकर (Siddharth Ugrankar), जिन्होंने अपने को-फ़ाउंडर विशाल मल्होत्रा (Vishal Malhotra) के साथ मिलकर इस स्टार्टअप की नींव रखी.
शुरुआत
सिद्धार्थ उग्रंकर और विशाल हमेशा से डिजिटल स्पेस में काम करते रहे हैं. उन्होंने ZEE Group के लिए भारत की पहली OTT सर्विस बनाई. फिर देश में शुरुआती CPaaS प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किए. इसके बाद उन्होंने Splunk जैसी टेक्नॉलॉजी को भारत में पेश किया और सफलतापूर्वक स्केल किया.
2012 में उन्होंने अपनी कंपनी SmartCirqls शुरू की. 10 साल से भी ज़्यादा समय तक वे क्लाइंट्स को नई टेक्नॉलॉजी अपनाने में मदद करते रहे. इसी दौरान ब्लॉकचेन चर्चा में आया. लेकिन जब उन्होंने इसकी ग्राउंड रियलिटी देखी तो पाया कि इसे अपनाना बहुत मुश्किल है. बड़े खर्च और जटिल प्रोसेस की वजह से कंपनियाँ इसे इम्प्लीमेंट ही नहीं कर पा रही थीं.
यहीं से Qila.io का आइडिया आया. 2022 में इसे लॉन्च किया गया ताकि ब्लॉकचेन को आसान, किफ़ायती और एंटरप्राइज़-रेडी बनाया जा सके.
बिज़नेस मॉडल
Qila.io का मॉडल है SaaS (Software-as-a-Service). यानी यह सब्सक्रिप्शन आधारित है. जैसे क्लाउड सर्विस यूज़ की जाती है, वैसे ही कंपनियाँ Qila के ब्लॉकचेन इंफ़्रास्ट्रक्चर, API और वर्कफ़्लो को ऑन-डिमांड यूज़ कर सकती हैं.
- ARK: मल्टी-टेनेंट प्लेटफ़ॉर्म, जिससे कंपनियाँ तेज़ी से पायलट प्रोजेक्ट्स चला सकती हैं.
- ARK+: डेडिकेटेड प्राइवेट नेटवर्क, जहाँ रेग्युलेटर-रेडी और बड़े लेवल पर प्रोडक्शन हो सकता है.
- PrivaSea Wallet: टोकनाइज़्ड असेट्स को सुरक्षित तरीके से मैनेज करने का टूल.
इस मॉडल से कंपनियाँ बिना बड़े निवेश के शुरू कर सकती हैं और ज़रूरत के हिसाब से स्केल भी कर सकती हैं.

फंडिंग और रेवेन्यू
शुरुआत में सिद्धार्थ और उनकी टीम ने अपनी खुद की बचत से पैसे लगाए हैं. उन्होंने पहले ARK और ARK+ को डेवलप किया, पायलट रन किए और टेक स्टैक तैयार किया. कुछ शुरुआती एंजल इन्वेस्टर्स भी जुड़े, जिन्होंने आइडिया पर भरोसा दिखाया.
अब तक कंपनी ने किसी भी बाहरी निवेशक से फंडिंग हासिल नहीं की है और प्रोडक्ट व कस्टमर वैलिडेशन पर ध्यान दिया है. लेकिन अब यह अगले स्टेज की ग्रोथ के लिए संस्थागत निवेशकों से बातचीत कर रही है.
Qila.io का रेवेन्यू मुख्य रूप से एंटरप्राइज़ सब्सक्रिप्शन और इंटीग्रेशन व मैनेज्ड सर्विसेज़ से आता है.
पिछले साल कंपनी को सप्लाई चेन, पैरामीट्रिक इंश्योरेंस, रियल एस्टेट और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में बड़ी सफलता मिली. यहाँ पारदर्शिता और अनुपालन (compliance) बेहद ज़रूरी होते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि ग्राहक अक्सर सिर्फ़ एक यूज़ केस पर नहीं रुकते. जब उन्हें ब्लॉकचेन का फ़ायदा समझ आता है तो वे उसी प्लेटफ़ॉर्म से और भी वर्कफ़्लोज़ जोड़ लेते हैं.
चुनौतियां और खासियत
Qila.io के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी धारणा. बहुत से लोग ब्लॉकचेन को अब भी केवल एक प्रयोगात्मक तकनीक मानते थे, जो व्यवसायिक उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. इस सोच को बदलना आसान नहीं था. इसे दूर करने के लिए टीम ने कुछ ऐसे पायलट प्रोजेक्ट्स चुने, जिनसे तुरंत और व्यावहारिक परिणाम सामने आ सकें.
Qila की टीम ने क्लीनिकल ट्रायल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर काम किया, जिससे मेडिकल रिसर्च में भरोसा और गति बढ़ी. सप्लाई चेन में ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम लागू कर नकली उत्पादों पर रोक लगाने का प्रयास किया. फाइनेंस सेक्टर में माइलस्टोन-बेस्ड लोन डिस्बर्सल और बिल रिकॉन्सिलिएशन जैसे प्रयोग किए. इन प्रोजेक्ट्स ने यह साबित किया कि ब्लॉकचेन केवल एक थ्योरी नहीं है, बल्कि वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाली तकनीक है, जो व्यवसायों के लिए ठोस मूल्य प्रदान कर सकती है.
जहाँ बाकी कंपनियाँ ब्लॉकचेन नेटवर्क को कंसल्टिंग मॉडल से बनाती हैं, वहीं Qila रेडीमेड प्लेटफ़ॉर्म देता है. इसमें पहले से ही ERC स्टैंडर्ड्स मौजूद हैं, जिससे कंपनियाँ हफ़्तों-महीनों की जगह कुछ ही दिनों में टोकनाइज़ेशन कर सकती हैं.
साथ ही Qila की आर्किटेक्चर RBI, RERA और GDPR जैसे रेग्युलेशन से मेल खाती है.

Qila.io की टीम
बाज़ार और विस्तार
मुंबई स्थित होने के बावजूद Qila ने दुबई और शिकागो जैसे शहरों में जल्दी संबंध बनाए. इन जगहों पर BFSI, हेल्थकेयर और सप्लाई चेन में वेब3 सॉल्यूशंस की माँग थी.
सिद्धार्थ बताते हैं, “हमारा फोकस हमेशा प्रासंगिकता पर रहा. हमने पहले एक बाज़ार में अपनी वैल्यू साबित की और जब सफलता मिली तो पार्टनरशिप और सेक्टर नेटवर्क के ज़रिए दूसरे बाज़ारों में विस्तार किया.”
सिद्धार्थ उग्रंकर के अनुसार, CBDCs (Central Bank Digital Currencies) और Tokenized Assets फाइनेंस का भविष्य हैं. Qila ऐसी तकनीक बना रहा है जिससे कंपनियाँ आसानी से इन्हें अपने सिस्टम में शामिल कर सकें.
टोकनाइज़ेशन सिर्फ़ लोन या इनवॉइस तक सीमित नहीं है. यह कार्बन क्रेडिट्स और सप्लाई चेन रिकॉर्ड्स तक फैला है. इसका असर तेज़ सेटलमेंट, नई मार्केट्स और लिक्विडिटी पर पड़ेगा.
Qila.io ने हेल्थकेयर में Mascot Spincontrol के साथ पायलट किया, जहाँ क्लिनिकल ट्रायल डेटा को टोकनाइज़ किया गया. BFSI सेक्टर में LC मैनेजमेंट और पैरामीट्रिक इंश्योरेंस पर काम हुआ.
एजुकेशन सेक्टर में एकेडमिक क्रेडेंशियल्स को टोकनाइज़ करने पर काम चल रहा है. साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए नए यूज़ केस डेवलप किए जा रहे हैं.
भविष्य की योजनाएं
प्रोडक्ट फ्रंट पर Qila कई ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क्स को एक प्लेटफ़ॉर्म पर लाने पर काम कर रहा है. माइक्रोसर्विसेज़ और रोलअप्स भी जोड़े जा रहे हैं.
कंपनी AI इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स से भी पार्टनरशिप कर रही है. इससे AI और ब्लॉकचेन मिलकर नई संभावनाएँ खोलेंगे.
विकास के लिहाज़ से यूरोप और मिडिल ईस्ट पर बड़ा फोकस है, वहीं भारत में भी अब प्रयोग से असली अपनाने (real deployments) की ओर बढ़ रहा है.
सिद्धार्थ उग्रंकर का कहना है कि यही उनकी आकांक्षा है. उनका विज़न है कि Qila उद्यमों और सरकारों के लिए भरोसेमंद, रेग्युलेटरी-रेडी ब्लॉकचेन इंफ़्रास्ट्रक्चर बने.
अगर यह मिशन सफल होता है, तो वाकई Qila “AWS of Web3” बन सकता है.
Qila.io की कहानी यह दिखाती है कि भारत अब केवल टेक्नॉलॉजी अपनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि उसे आगे बढ़ाने वाला भी है. Qila ब्लॉकचेन को आसान और सस्ता बनाकर न सिर्फ़ उद्यमों को मदद कर रहा है, बल्कि भारत को ग्लोबल Web3 रेस में आगे खड़ा कर रहा है.



