35 रुपये लेकर मुंबई आए थे वीरल पटेल, आज खड़ा कर दिया 25 करोड़ का मिठाई कारोबार
सिर्फ 35 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे वीरल पटेल ने संघर्ष, मेहनत और धैर्य के दम पर गौरव स्वीट्स जैसा 25 करोड़ रुपये का सफल मिठाई कारोबार खड़ा किया. सड़क किनारे होटल में हेल्पर से शुरू हुआ उनका सफर आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है.
मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है. यहां हर दिन हजारों लोग बेहतर जिंदगी की तलाश में पहुंचते हैं. लेकिन हर किसी की मंजिल आसान नहीं होती. कुछ लोगों को अपनी पहचान बनाने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है. वीरल पटेल (Veeral Patel) की कहानी भी ऐसी ही है, जिसने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है.
वीरल पटेल मूल रूप से गुजरात के कच्छ इलाके से आते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1982 में वह मुंबई पहुंचे थे. उस समय उनकी जेब में सिर्फ 35 रुपये थे. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. बताया जाता है कि उनके पिता ने मुंबई भेजने के लिए 100 रुपये उधार लिए थे. नए शहर में न कोई बड़ा सहारा था और न ही कोई निश्चित रोजगार.
मुंबई पहुंचने के बाद वीरल ने काम की तलाश शुरू की. शुरुआत में उन्हें एक सड़क किनारे खाने की दुकान पर हेल्पर का काम मिला. इस काम के बदले उन्हें वेतन नहीं मिलता था. केवल दिन में तीन वक्त का खाना दिया जाता था. लेकिन उन्होंने हालात से समझौता करने के बजाय उन्हें सीखने का मौका माना.
कुछ समय बाद उन्हें एक स्टेशनरी की दुकान में काम मिला. यहां भी शुरुआत आसान नहीं थी. लंबे समय तक उन्होंने बेहद कम सुविधाओं में काम किया. धीरे धीरे उनकी मेहनत और ईमानदारी ने मालिकों का भरोसा जीत लिया. इसके बाद उन्हें 250 रुपये महीने की सैलरी मिलने लगी. उस दौर में यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी.
वीरल केवल नौकरी करके संतुष्ट नहीं होना चाहते थे. वह कुछ अपना करना चाहते थे. साल 1985 में एक रिश्तेदार ने उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें ठाणे में एक स्टेशनरी दुकान में साझेदारी का मौका दिया. यहीं से उन्होंने कारोबार की बारीकियां सीखना शुरू किया. ग्राहकों को समझना, हिसाब संभालना और बाजार की जरूरतों को पहचानना उन्होंने इसी दौर में सीखा.
कई सालों तक अलग-अलग कारोबार और व्यापारिक अनुभव लेने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ आया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2004 में उनके एक दोस्त ने उन्हें मिठाई के कारोबार में आने की सलाह दी. यह बिजनेस उनके लिए बिल्कुल नया था. फिर भी उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया.
करीब 30 लाख रुपये के निवेश के साथ उन्होंने गौरव स्वीट्स (Gaurav Sweets) की शुरुआत की. इस दुकान का नाम उन्होंने अपने बेटे गौरव के नाम पर रखा. शुरुआत से ही उनका फोकस गुणवत्ता और ग्राहकों के भरोसे पर रहा. यही वजह रही कि कुछ ही महीनों में कारोबार अच्छा चलने लगा.
गौरव स्वीट्स ने धीरे-धीरे मुंबई में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी. ग्राहकों को यहां मिलने वाली मिठाइयों का स्वाद पसंद आने लगा. कारोबार बढ़ता गया और एक दुकान से शुरू हुआ सफर कई आउटलेट्स तक पहुंच गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले 18 वर्षों में गौरव स्वीट्स की 25 शाखाएं मुंबई में खुल गईं.
आज गौरव स्वीट्स में करीब 300 तरह की मिठाइयां उपलब्ध हैं. यहां ड्राई फ्रूट मिठाइयों से लेकर शुगर फ्री मिठाइयां, बंगाली मिठाइयां, श्रीखंड, रबड़ी और बासुंदी तक मिलती हैं. इसके अलावा चाट और स्नैक्स की भी बड़ी रेंज मौजूद है. बदलते समय के साथ ब्रांड ने ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा भी शुरू की, जिससे ग्राहकों तक पहुंच और बढ़ गई.
अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौरव स्वीट्स का कारोबार करीब 25 करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा पार कर चुका है. यह उपलब्धि किसी एक दिन में नहीं मिली. इसके पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य और लगातार सीखने की इच्छा रही है.
वीरल पटेल की कहानी केवल एक कारोबारी सफलता की कहानी नहीं है. यह उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेते हैं. एक समय था जब उनके पास केवल 35 रुपये थे. आज उनका नाम सफल उद्यमियों में लिया जाता है.
उनकी यात्रा यह सिखाती है कि शुरुआत कितनी छोटी है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इंसान अपने लक्ष्य के लिए कितना समर्पित है. संघर्ष के दिनों में हार न मानना, मौके मिलने पर उन्हें पहचानना और ग्राहकों का भरोसा जीतना ही उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज बना.
जब भी मेहनत और धैर्य की बात होगी, वीरल पटेल की कहानी जरूर याद की जाएगी. क्योंकि उन्होंने यह साबित कर दिया कि सपनों की कीमत पैसों से नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की जिद से तय होती है.
Edited by Ravi Pareek




