कैसे गीता, संगीत और योग से जन्मा ‘म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल’ अभियान? जानिए...
तनाव और डिप्रेशन के दौर से शुरू हुई एक व्यक्तिगत यात्रा ने ‘म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल’ का रूप लिया. जानिए कैसे गूँजे गीता, क्लबफुट जागरूकता, संगीत, योग, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा ने उपचार, आत्मविकास और ग्लोबल वेलनेस के नए आयाम स्थापित किए.
विश्व संगीत दिवस और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें यह याद दिलाते हैं कि उपचार केवल दवाओं तक सीमित नहीं है. मेरे लिए यह अवसर एक ऐसी यात्रा की भी याद है, जो अपने प्रश्नों के उत्तर खोजने से शुरू हुई और समय के साथ "म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल (Music Therapy for All)" के रूप में विकसित हुई. यह एक वैश्विक पहल है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित संगीत, योग और साहित्य के माध्यम से कार्य करती है.
"म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल" की औपचारिक शुरुआत 25 मई 2015 को गिव वाचा फाउंडेशन और कृप म्यूजिक के माध्यम से हुई, लेकिन इसकी जड़ें मेरे कॉलेज जीवन तक जाती हैं. वर्ष 1999 में, जब मैं तनाव और डिप्रेशन के दौर से गुजर रहा था, तब मुझे दो साथी मिले - श्रीमद्भगवद्गीता और गिटार. गीता ने मुझे जीवन को देखने की नई दृष्टि दी, जबकि संगीत अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया.
इसी अनुभव से प्रेरित होकर वर्ष 2000 में मैंने "गूँजे गीता" की शुरुआत की. इस पहल के अंतर्गत मैंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों को भारतीय रागों पर आधारित मौलिक धुनों में संगीतबद्ध कर प्रस्तुत करना शुरू किया. इसी दौरान सात स्वर और सात चक्रों के संबंध की मेरी खोज भी आगे बढ़ी.
MBBS के बाद मेरी यात्रा मुझे अमेरिका ले गई, जहाँ मैंने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2013 तक क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में कार्य किया. इस अनुभव ने मेरी वैज्ञानिक समझ को गहरा किया, लेकिन भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति मेरी जिज्ञासा भी बढ़ती रही.
मेरे मन में एक प्रश्न था - क्या संगीत, योग और आध्यात्मिक साहित्य स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सार्थक भूमिका निभा सकते हैं? इसी प्रश्न के उत्तर खोजते हुए मैं 2013 में भारत लौटा और यही खोज आगे चलकर "म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल" का आधार बनी.
25 मई इस अभियान की वार्षिक शुरुआत का प्रतीक बन गया, जिसे "Gunje Gita Day" और "Global Music Therapy Day" के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन से "Global Music Therapy Month" की शुरुआत होती है, जो 25 मई से 25 जून तक चलता है. इसकी गतिविधियाँ 21 जून के विश्व संगीत दिवस और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आसपास केंद्रित रहती हैं.
यह प्रयास आगे चलकर बुजुर्गों, महिलाओं, किशोरों और बच्चों जैसे विभिन्न आयुवर्गों तथा ऑटिज्म, ADHD, एंटी-एजिंग और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों तक विस्तारित हुआ. इन सभी प्रयासों का मूल विश्वास था कि संगीत, योग और साहित्य उपचार और आत्मविकास में सहायक हो सकते हैं.
इन पहलों में क्लबफूट जागरूकता से जुड़ा कार्य एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा. वर्ष 2017 में मेरे पुत्र पर्व ठक्कर के जन्म के साथ "ग्लोबल क्लबफुट अवेयरनेस पर्व (Global Clubfoot Awareness Parv)" की शुरुआत हुई, जिसके माध्यम से गर्भावस्था से ही "Music Therapy for Clubfoot" को जागरूकता, समय पर उपचार और भावनात्मक सशक्तिकरण से जोड़ा गया.
पर्व के उपचार के दौरान हमने विशेष रूप से तैयार किए गए म्यूजिक थेरेपी मंत्रों को उपचार यात्रा का हिस्सा बनाया. इन्हीं रचनाओं को 2019 में एक एल्बम के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें पर्व ने अपनी आवाज़ दी. मात्र 1 वर्ष और 342 दिन की आयु में उन्होंने ‘Youngest Singer’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया.
इन्हीं अनुभवों ने आगे चलकर A.R.J.U.N. Attitude Framework की नींव रखी. श्रीमद्भगवद्गीता से प्रेरित यह दृष्टिकोण चुनौतियों को आत्मविकास और सार्थक कर्म के अवसर के रूप में देखने की प्रेरणा देता है.
साहित्य इस पूरी यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है. "गूँजे गीता" और "चलो राम बने" जैसे प्रकल्पों के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस की शिक्षाओं को समाज तक पहुँचाया गया. “अर्जुन उवाच: माँ पर्व" को हिन्दी साहित्य अकादेमी से मिले श्रेष्ठ पुस्तक पारितोषिक ने इन प्रयासों को व्यापक पहचान दिलाई.
ये प्रयास आगे चलकर शिक्षा और शोध तक भी पहुँचे. इसी दिशा में भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के IKS और VAC ढाँचे के अंतर्गत कच्छ यूनिवर्सिटी मान्य "Music Therapy & Ayurved for Stress Management" तथा "Bhagavad Gita for Life Management" जैसे पाठ्यक्रम विकसित किए गए.
वर्ष 2025 में यह अभियान वैश्विक मंच तक पहुँचा, जब Parv Fusion Band का एल्बम "Sounds of Sanatan: Vol. 1" रिलीज़ हुआ. इस एल्बम में मंत्रों पर आधारित सात चिकित्सीय रचनाएँ थीं. यह एल्बम ग्रेमी अवार्ड्स तक पहुँचा और "Healing with Heritage" की सोच को वैश्विक पहचान मिली.
आज यह अभियान वेलनेस कार्यक्रमों, विश्वविद्यालयों से जुड़े पाठ्यक्रमों और "Music Therapy for All - India Tour" के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है. साथ ही "Tiny Steps Take Giant Leaps" और "मैं भी अर्जुन" जैसी फिल्में भी इस विचार को व्यापक समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रही हैं.
दो दशक पहले अपने प्रश्नों के उत्तर खोजने की एक व्यक्तिगत यात्रा आज एक ऐसे अभियान का रूप ले चुकी है, जहाँ एक हाथ में गिटार और दूसरे में गीता लिए आधुनिक अर्जुन समाज से संवाद कर रहा है.
"म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल" की यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी, लेकिन इसके केंद्र में एक सरल विचार हमेशा बना रहेगा - "The 'i' Should Always Be Small."
(feature image: Dr. Krupesh Thacker)
(लेखक डॉ. कृपेश ठक्कर प्लेबैक सिंगर, गीतकार, डायरेक्टर और बेस्टसेलर ऑथर हैं. आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं. YourStory का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है.)
Edited by Ravi Pareek



