म्यूजिक थेरेपी और क्लबफुट चिकित्सा: "मैं भी अर्जुन" से ग्लोबल क्लबफुट अवेयरनेस पर्व तक
विश्व क्लबफुट दिवस (3 जून) हमें याद दिलाता है कि हर बच्चे को अवसर मिलना चाहिए, केवल सहानुभूति नहीं. यही “मैं भी अर्जुन” और “ग्लोबल क्लबफुट अवेयरनेस पर्व” की मूल भावना है कि प्रत्येक बच्चे को अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठने और अपने सपनों को जीने का अवसर मिलना चाहिए.
क्लबफुट (Clubfoot) का निदान किसी भी परिवार के लिए कई प्रश्न खड़े कर देता है. एक चिकित्सक और पिता के रूप में मैं इस अनुभव से परिचित हूँ.
गर्भावस्था के पाँचवें महीने की सोनोग्राफी में हमें पता चला कि हमारे होने वाले पुत्र को क्लबफुट है. चिंता स्वाभाविक थी, लेकिन हमने भय को निर्णय का आधार नहीं बनने दिया.
मेरी पत्नी डॉ. पूजा ठक्कर (BAMS) के मार्गदर्शन में गर्भसंस्कार की प्रक्रिया चल रही थी. निदान के बाद हमने संगीत की भूमिका बढ़ाई, जिसने आगे चलकर एक व्यापक जागरूकता पहल का रूप लिया.
7 मई 2017 को पर्व ठक्कर के जन्म के साथ गिव वाचा फाउंडेशन और कृप म्यूजिक के संयुक्त प्रयास से ‘ग्लोबल क्लबफुट अवेयरनेस पर्व’ की शुरुआत हुई.
श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 2 श्लोक 47 से प्रेरित होकर हमने तय किया कि हमारा ध्यान परिणाम से अधिक कर्तव्य पर होगा. हमारा लक्ष्य केवल अपने पुत्र का उपचार नहीं, बल्कि अन्य परिवारों तक आशा और जागरूकता पहुँचाना था.
इसी संकल्प के साथ 7 मई को “ग्लोबल क्लबफुट डे” के रूप में स्थापित किया गया, जो आज इस जागरूकता पहल का वार्षिक प्रारंभ बिंदु है. यह वर्षव्यापी अभियान क्लबफुट जागरूकता, म्यूजिक थेरेपी और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाता है.
प्रत्येक वर्ष 7 मई से 7 जून तक “ग्लोबल क्लबफुट अवेयरनेस मंथ” मनाया जाता है.
समय के साथ यह पहल अमेरिका तक पहुँची और 2025 में अटलांटा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की सराहना से इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई.
आज यह पहल “Awareness Through Arts” का एक व्यापक मॉडल बन चुकी है. “I Support Global Clubfoot Awareness Parv” पोस्टर के माध्यम से लोग सोशल मीडिया पर क्लबफुट जागरूकता आंदोलन से जुड़ रहे हैं.

Parv Fusion Band GCAP Initiative
एक डॉक्टर और म्यूजिक थेरपिस्ट के रूप में मैंने अनुभव किया कि क्लबफुट उपचार की लंबी प्लास्टरिंग, ब्रेसिंग और फॉलो-अप प्रक्रिया पूरे परिवार के लिए भावनात्मक चुनौती बन सकती है.
इसी सोच ने 2015 से चल रही हमारी "म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल" पहल को क्लबफुट चिकित्सा से जोड़ने की प्रेरणा दी. भारतीय शास्त्रीय संगीत, वैदिक मंत्रों और सकारात्मक वातावरण को उपचार यात्रा का हिस्सा बनाया गया.
मेरा मानना है कि म्यूजिक थेरेपी की भूमिका केवल दर्द या तनाव कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक उपचार अनुपालन (Treatment Compliance), पारिवारिक सहभागिता और भावनात्मक सशक्तिकरण में भी सहायक है.
पॉनसेटी मेथड ने क्लबफुट उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है, फिर भी प्रकाशित रिसर्च पेपर्स में 14% से 41% तक रिलेप्स की रिपोर्ट की गई है. रिसर्च यह भी दर्शाता है कि नॉन-कम्प्लायंस इसके प्रमुख कारणों में से एक है.
ऐसे में म्यूजिक थेरेपी बच्चों और परिवारों को उपचार यात्रा से जुड़े रखने, उपचार अनुभव बेहतर बनाने तथा अनुपालन मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो रिलेप्स से जुड़े जोखिम को कम करने में सार्थक सहयोग दे सकती है.
पर्व की यात्रा इसी सोच का उदाहरण बनी. संगीत और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से उसने अपनी पहचान सीमाओं से नहीं, संभावनाओं से बनानी शुरू की. पर्व ने 1 साल और 342 दिन की आयु में ‘Youngest Singer’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया और आगे चलकर (Grammy Awards) ग्रैमी अवॉर्ड्स कंसिडरेशन तक पहुँचने वाली संगीत परियोजनाओं का हिस्सा बना.
एक पिता के रूप में मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि पर्व ने स्वयं को अपनी चिकित्सा स्थिति से परिभाषित नहीं होने दिया.
इसी अनुभव ने "मैं भी अर्जुन" दृष्टिकोण को जन्म दिया, जो आगे चलकर A.R.J.U.N. Attitude Framework के रूप में विकसित हुआ. श्रीमद्भगवद्गीता से प्रेरित यह दृष्टिकोण बच्चों को चुनौतियों को कमजोरी नहीं, बल्कि विकास के अवसर के रूप में देखने की प्रेरणा देता है.
आज भी अनेक परिवार क्लबफुट के निदान के बाद घबरा जाते हैं, जबकि समय पर उपचार, सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के साथ अधिकांश बच्चे सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं.
वर्ष 2026 इस पहल का दसवाँ वर्ष है और आज यह जागरूकता, शोध, शिक्षा तथा रचनात्मक माध्यमों के जरिए आगे बढ़ रही है. इस वर्ष ग्लोबल एम्बेसेडर पर्व ठक्कर के नेतृत्व में क्लबफुट क्षेत्र को समर्पित ‘The Parv Awards’ की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य जागरूकता, प्रेरणा और उत्कृष्ट योगदानों को सम्मानित करना है.
इसी क्रम में पर्व के जीवन की घटनाओं से प्रेरित "मैं भी अर्जुन: पर्व" (हिंदी), "Tiny Steps Take Giant Leaps" (अंग्रेज़ी) और "नानकड़ा पगला भरे हरणफाड़" (गुजराती) जैसी फिल्म परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, जिनका उद्देश्य क्लबफुट जागरूकता और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण को व्यापक समाज तक पहुँचाना है.
विश्व क्लबफुट दिवस (3 जून) हमें याद दिलाता है कि हर बच्चे को अवसर मिलना चाहिए, केवल सहानुभूति नहीं. यही “मैं भी अर्जुन” और “ग्लोबल क्लबफुट अवेयरनेस पर्व” की मूल भावना है कि प्रत्येक बच्चे को अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठने और अपने सपनों को जीने का अवसर मिलना चाहिए. क्योंकि Every Child Has the Right to Rise Like Arjun.
(feature image: AI generated)
(लेखक डॉ. कृपेश ठक्कर प्लेबैक सिंगर, गीतकार, डायरेक्टर और बेस्टसेलर ऑथर हैं. आलेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं. YourStory का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है.)
Edited by Ravi Pareek



