National Startup Day 2026: छोटे शहरों से निकले इन स्टार्टअप्स ने लिखी सफलता की नई इबारत
आज भारत में स्टार्टअप की दुनिया सिर्फ़ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही. छोटे शहरों, कस्बों और पहाड़ों से भी प्रेरणादायक उद्यमी सामने आ रहे हैं. National Startup Day 2026 के मौके पर हम ऐसे ऑन्त्रप्रेन्योर्स की कहानियां बता रहे हैं, जिन्होंने स्थानीय समस्याओं को पहचानकर मजबूत बिज़नेस खड़े किए.
भारत में 6,20,611 से ज़्यादा स्टार्टअप्स हैं, जिससे यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया है. इनमें से करीब 33,100 स्टार्टअप्स को फंडिंग मिली है, जिन्होंने अब तक 627 अरब डॉलर की Venture Capital और Private Equity फंडिंग जुटाई है. 125 स्टार्टअप्स ‘यूनिकॉर्न’ बने हैं, यानी ऐसे स्टार्टअप जिनकी वैल्यू 1 अरब डॉलर से ज्यादा है.
अब तक 1,22,942 निवेशकों ने मिलकर 48,466 फंडिंग राउंड्स में निवेश किया है. इनमें से 2,932 स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण (Early-stage) की फंडिंग मिली, जबकि 867 स्टार्टअप्स को बाद के चरण (Late-stage) की फंडिंग मिली है.
पिछले पांच सालों में 61,269 नए स्टार्टअप्स शुरू हुए हैं, जिन्होंने मिलकर 8.78 अरब डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटाई है.
भारत के स्टार्टअप्स ने अब तक 5,003 कंपनियों का अधिग्रहण (Acquisition) किया. 5,443 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट (IPO) हुईं. खास बात यह है कि 22,749 कंपनियां महिलाओं द्वारा शुरू की गई हैं.
कुल मिलाकर, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है और रोजगार, निवेश व नवाचार का बड़ा केंद्र बन चुका है. ये आंकड़े Tracxn से जुटाए गए हैं.
आज भारत में स्टार्टअप की दुनिया सिर्फ़ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों, कस्बों और पहाड़ों से भी ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जो यह दिखाती हैं कि अगर नीयत साफ हो और समस्या को सही तरह समझा जाए, तो कहीं से भी मजबूत बिज़नेस खड़ा किया जा सकता है. राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस 2026 (National Startup Day 2026) के मौके पर हम ऐसे ऑन्त्रप्रेन्योर्स की कहानियां बता रहे हैं, जिन्होंने अपने आसपास की जरूरतों को पहचाना और बड़े बिजनेस खड़े कर दिए.
महेंद्र केवलानी, Culish Sports
पहली कहानी है राजस्थान के खैरथल से निकले महेंद्र केवलानी की. महेंद्र का जीवन बचपन से ही खेलों के इर्द-गिर्द रहा. वे राज्य स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे हैं. खेल ने उन्हें अनुशासन, टीमवर्क और आगे बढ़ने की जिद सिखाई. जब वे खुद एक खिलाड़ी थे, तब उन्होंने महसूस किया कि भारत में अच्छी क्वालिटी का स्पोर्ट्सवियर या तो बहुत महंगा है या फिर टिकाऊ नहीं है. यहीं से उनके दिमाग में अपना ब्रांड शुरू करने का विचार आया.
साल 2016 में महेंद्र ने पंद्रह लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ Culish Sports की शुरुआत की. उनका लक्ष्य साफ था. आम खिलाड़ियों के लिए किफायती, टिकाऊ और स्टाइलिश स्पोर्ट्सवियर बनाना. कॉर्पोरेट ऑडिटिंग का अनुभव और पारिवारिक बिज़नेस की समझ उनके काम आई. उन्होंने इन हाउस डिजाइन टीम बनाई ताकि लागत कम रहे और क्वालिटी पर पूरा नियंत्रण बना रहे.
शुरुआती दौर में नोटबंदी और जीएसटी जैसी चुनौतियां भी आईं. लेकिन महेंद्र ने हालात के हिसाब से खुद को ढाला. साल 2023 में वॉलमार्ट वृधि कार्यक्रम से जुड़ना उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. यहां से उन्हें डिजिटल बिक्री, स्टॉक मैनेजमेंट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने की समझ मिली. आज Culish Sports की करीब 90 प्रतिशत बिक्री ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से होती है. कंपनी में 32 लोग काम कर रहे हैं और कई राज्यों में वेयरहाउस का विस्तार हो रहा है. महेंद्र का सपना है कि आने वाले वर्षों में Culish Sports अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंचे और आम खिलाड़ी भी अपने गियर पर गर्व कर सकें.
टीना गोयल, RhinoKraft
दूसरी कहानी है उत्तर कर्नाटक के हुबली से आने वाली टीना गोयल की. टीना एक पारंपरिक कारोबारी परिवार से आती हैं. बचपन से ही उन्होंने देखा कि बिज़नेस कैसे चलता है. बिज़नेस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने बैंकिंग सेक्टर में काम किया. शादी के बाद वे लंदन गईं, जहां उन्हें ज़मीनी स्तर पर काम करने का अनुभव मिला. भारत लौटने पर उन्होंने महसूस किया कि यहां अच्छी क्वालिटी का एडवेंचर गियर, खासकर स्लीपिंग बैग, आसानी से नहीं मिलता.
साल 2017 में इसी समस्या को हल करने के इरादे से उन्होंने RhinoKraft की शुरुआत की. शुरुआत सिर्फ़ एक स्लीपिंग बैग से हुई. ई कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और स्टॉक मैनेजमेंट सब कुछ उनके लिए नया था. साथ ही तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी थी. फिर भी टीना ने हार नहीं मानी. उन्होंने ग्राहकों की बात ध्यान से सुनी और उसी के आधार पर अपने प्रोडक्ट्स में सुधार किया. ग्राहकों के सुझाव से लॉन्च किया गया इन्फ्लेटेबल तकिया आगे चलकर उनका हिट प्रोडक्ट बन गया. साल 2022 में वॉलमार्ट वृधि कार्यक्रम से जुड़ने के बाद RhinoKraft की दिशा बदली.
डिजिटल मार्केटिंग और सप्लाई चेन की समझ बेहतर हुई. इसका नतीजा यह रहा कि बिक्री में डेढ़ सौ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. आज RhinoKraft के पास सौ से ज्यादा प्रोडक्ट्स हैं. हर महीने करीब दो हजार यूनिट्स बिकते हैं. कंपनी का सालाना टर्नओवर दो से तीन करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. टीना चाहती हैं कि RhinoKraft हर एडवेंचर पसंद करने वाले भारतीय का भरोसेमंद साथी बने.
प्रीति भंडारी, Naturally Pahadi
तीसरी कहानी है देहरादून की प्रीति भंडारी की, जिनका जुड़ाव प्रकृति और किसानों से गहराई से रहा है. प्रीति ने National Institute of Design से डिज़ाइन की पढ़ाई की और बाद में एमबीए किया. उन्होंने कई साल तक डेवलपमेंट सेक्टर में काम किया, जहां उन्हें किसानों और किसान उत्पादक संगठनों के साथ काम करने का मौका मिला. इसी दौरान उन्होंने देखा कि उत्तराखंड की मिट्टी और जलवायु औषधीय पौधों और मोटे अनाज के लिए कितनी उपयुक्त है.
सितंबर 2022 में प्रीति ने किसान समूहों के साथ मिलकर Naturally Pahadi की शुरुआत की. उनका मकसद सिर्फ़ प्रोडक्ट बेचना नहीं था, बल्कि किसानों को भागीदार बनाना था. ब्रांड पहाड़ी ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स, क्लीन लेबलिंग और लोकल टेस्ट वाले फूड आइटम्स पर काम करता है. जैसे जैसे बिज़नेस बढ़ा, उन्हें सही पोज़िशनिंग और डिजिटल बिक्री की जरूरत महसूस हुई. साल 2023 में वॉलमार्ट वृधि कार्यक्रम से जुड़कर उन्हें सही दिशा और मेंटरशिप मिली. ई-कॉमर्स और गो टू मार्केट रणनीति मजबूत हुई. आज Naturally Pahadi के पास 14 प्रोडक्ट्स हैं. साल 2025 में ब्रांड की बिक्री 45 लाख रुपये से अधिक रही. प्रीति इस ब्रांड को पहाड़ों की शुद्धता और किसानों की मेहनत का प्रतीक मानती हैं.
अम्मार महमूद, Aykitzil Inc
बिहार के नवादा जिले के छोटे से कस्बे हिसुआ से निकलकर अम्मार महमूद ने यह साबित कर दिया कि बड़े सपनों के लिए बड़े शहर ज़रूरी नहीं होते. पारंपरिक सोच और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े अम्मार ने बचपन से ही अपने पिता के साथ बिज़नेस को करीब से देखा और वहीं से उद्यमिता की बुनियादी समझ विकसित की. इंटरनेट और ऑनलाइन सेलिंग के प्रति उनकी जिज्ञासा ने उन्हें ई-कॉमर्स की दुनिया से जोड़ा.
बीबीए की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने 2019 में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रोडक्ट्स बेचना शुरू किया और 2022 में सिर्फ 20 साल की उम्र में Aykitzil Inc की आधिकारिक शुरुआत की, जो टॉर्चलाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज़ की रीसेलिंग करने वाली कंपनी है. क्वालिटी, पैकेजिंग और कस्टमर एक्सपीरियंस पर फोकस करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे देशभर में अपनी पहचान बनाई.
घर से शुरू हुआ यह कारोबार आज करोड़ों तक पहुंच चुका है. वॉलमार्ट वृधि कार्यक्रम से मिली ट्रेनिंग और मेंटॉरशिप ने अम्मार को सही प्रोडक्ट चयन, बेहतर पैकेजिंग और लागत नियंत्रण की समझ दी, जिसका असर उनकी तेज़ ग्रोथ में साफ दिखा—2022 में ₹7–8 लाख से बढ़कर 2024 में ₹2 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर. आज वे पाँच लोगों की टीम के साथ अपने शहर से ही बिज़नेस चला रहे हैं और उनके साथ काम करने वाले कई युवा खुद भी उद्यमी बन चुके हैं.
मोहिनी उपाध्याय, Mudit Agrotech
महाराष्ट्र के नासिक की मोहिनी उपाध्याय ने Mudit Agrotech की स्थापना की, जहां 10 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ पारंपरिक घानी तकनीक अपनाकर सरसों, मूंगफली, तिल और नारियल सहित 14 प्रकार के लकड़ी से बने कोल्ड-प्रेस्ड तेल तैयार किए जाते हैं, जो अपने प्राकृतिक स्वाद और पोषक तत्वों को बनाए रखते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद, गुणवत्ता और स्वास्थ्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ही उनके सफर की सबसे बड़ी ताकत बनी.
योग प्रशिक्षक से उद्यमी बनीं मोहिनी के लिए जून 2023 में वॉलमार्ट वृधि कार्यक्रम से जुड़ना एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ. व्यक्तिगत मेंटरशिप के ज़रिए उन्होंने मार्केटिंग, ब्रांडिंग और वित्तीय योजना की अहमियत समझी और ‘लाभकारी बिक्री’ पर फोकस करना सीखा. इसका असर यह हुआ कि जून 2024 तक Mudit Agrotech की मासिक आय 3,500 रुपये से बढ़कर 1.7 लाख रुपये तक पहुंच गई. पर्यावरण-अनुकूल तरीकों और सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने ब्रांड को और मजबूती दी है. आगे चलकर मोहिनी ई-कॉमर्स में विस्तार और निर्यात के अवसरों को तलाशने की तैयारी में हैं
इन सभी कहानियों में एक बात समान है. स्टार्टअप सिर्फ़ एक आइडिया नहीं होता. वह लगातार सीखने, ज़मीन से जुड़े रहने और सही फैसले लेने का नाम है. आज भारत के अलग अलग कोनों से ऐसे उद्यमी उभर रहे हैं, जो दिखा रहे हैं कि अगर इरादा मजबूत हो, तो छोटे शहर भी बड़े सपने गढ़ सकते हैं.



