कैसे अंडमान में टूरिज्म का गेम चेंजर बना देसी फेरी स्टार्टअप Nautika
अंडमान में जन्मे अनूप कुमार ने स्थानीय समस्याओं को समझकर Nautika की शुरुआत की. यह कहानी बताती है कि कैसे एक साधारण विचार ने अंडमान की समुद्री यात्रा को सुरक्षित, तेज और बेहतर अनुभव में बदल दिया.
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (Andaman & Nicobar Islands) हमेशा से अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. नीला समंदर, शांत द्वीप और सुकून भरी हवा. लेकिन इन द्वीपों के बीच सफर हमेशा आसान नहीं रहा. यहीं से जन्म होता है एक कहानी का, जो स्थानीय ज़रूरतों, अनुभवों और बड़े सपनों से बनी है.
यह कहानी है फेरी स्टार्टअप Nautika की. अनूप कुमार (Anup Kumar) इसके डायरेक्टर हैं. अनूप का जन्म और परवरिश अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में हुई. बचपन से उन्होंने इन द्वीपों को करीब से देखा. उन्होंने देखा कि यहां संभावनाएं बहुत हैं, लेकिन सुविधाएं सीमित हैं. यही अनुभव उनके भीतर कुछ नया करने की इच्छा बनकर उभरा.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, अनूप कहते हैं, “मैंने हमेशा अंडमान को सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि संभावनाओं की भूमि के रूप में देखा. यहां की ज़रूरतें मुझे साफ दिखती थीं.”
अनूप की पढ़ाई कोयंबटूर में हुई. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग सेक्टर में काम किया. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े अनुभव ने उन्हें रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) की समझ दी. दिल्ली में रियल एस्टेट सेक्टर में काम करते हुए उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट को नजदीक से जाना.
इन अलग-अलग भूमिकाओं ने उन्हें एक बड़ा नजरिया दिया. बाजार कैसे काम करता है, ग्राहक क्या चाहता है और किसी भी बिजनेस को जमीन पर कैसे उतारना है. यही अनुभव आगे चलकर उनके उद्यमी सफर की नींव बने.
पहले स्टार्टअप से मिली सीख
2014 में अनूप ने अपना पहला डिस्ट्रीब्यूशन वेंचर शुरू किया. यह एक प्रयोग था. इसी प्रयोग ने उन्हें सिखाया कि भरोसा, समय पर डिलीवरी और ग्राहकों से रिश्ता कितना अहम होता है. सप्लाई चेन को संभालना और रोजमर्रा की चुनौतियों से निपटना उन्होंने यहीं सीखा.
वे बताते हैं, “डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस ने मुझे जमीन से जोड़ा. यहीं समझ आया कि असली गैप कहां है और नया क्या किया जा सकता है.”
अंडमान में टूरिज्म बढ़ रहा था. हर साल लाखों पर्यटक आते थे. लेकिन द्वीपों के बीच सफर धीमा और असुविधाजनक था. अनूप ने यात्रियों की परेशानी देखी. उत्साह के साथ आने वाले लोग सफर से निराश हो जाते थे.
Port Blair से Havelock Island और Neil Island तक की समुद्री यात्रा अनुभव के अनुरूप नहीं थी. यहीं अनूप को लगा कि इस खाली जगह को भरना जरूरी है.
वे कहते हैं, “द्वीपों की खूबसूरती के हिसाब से सफर भी वैसा ही होना चाहिए था.”
2017 का टर्निंग पॉइंट
साल 2017 में अनूप ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने लक्जरी पैसेंजर शिपिंग में कदम रखा. यही वह साल था जब Nautika की शुरुआत हुई. मकसद साफ था — तेज, सुरक्षित और आरामदायक समुद्री यात्रा.
यह सिर्फ बिजनेस का फैसला नहीं था. यह अंडमान के टूरिज्म अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश थी. अनूप मानते थे कि अगर कनेक्टिविटी सुधरेगी तो पूरे द्वीपसमूह को फायदा होगा.
Nautika का सफर
Nautika ने शुरुआत से ही प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस किया. ऑनलाइन टिकट बुकिंग, रियल टाइम सीट उपलब्धता और क्यूआर कोड के जरिए आसान बोर्डिंग. आधुनिक कैटामरैन, आरामदायक सीटें और निजी केबिन. हर चीज यात्रियों के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार की गई.
अनूप बताते हैं, “हम चाहते थे कि लोग सफर को मजबूरी नहीं, बल्कि यादगार अनुभव की तरह देखें. Nautika के जहाज आधुनिक तकनीक से लैस हैं. बेहतर हल डिजाइन, स्थिर यात्रा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन. समंदर की बदलती परिस्थितियों में भी यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि रखी जाती है.”
आज Nautika प्रीमियम हाई स्पीड फेरी सेगमेंट में करीब 35-40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है. सालाना लाखों यात्री इस सेवा का इस्तेमाल करते हैं. आने वाले समय में नए जहाजों के साथ क्षमता और बढ़ने वाली है.
Nautika ने फंडिंग जुटाई है लेकिन डायरेक्टर अनुप कुमार फिलहाल आंकड़े साझा नहीं करना चाहते.

Nautika की टीम
सिंगापुर से आया बदलाव
Nautika के लिए बड़ा कदम था सिंगापुर से हाई स्पीड वेसल का अधिग्रहण. सिंगापुर को दुनिया में तगड़ी मैरीटाइम इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है. वहां से जहाज खरीदने का मतलब था गुणवत्ता और भरोसे पर समझौता न करना.
अनूप बताते हैं, “यह आसान फैसला नहीं था. इसमें रिसर्च, निवेश और कई तरह की मंजूरियां शामिल थीं. लेकिन इससे Nautika की पहचान बदल गई.”
इस फैसले ने कंपनी को एक साधारण फेरी से प्रीमियम अनुभव देने वाले ब्रांड में बदल दिया.
अंडमान जैसे रिमोट एरिया में संचालन आसान नहीं. मौसम, रेगुलेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर हर कदम पर चुनौती बनते हैं. पार्ट्स की उपलब्धता से लेकर क्रू ट्रेनिंग तक हर चीज में समय और योजना लगती है.
अनूप मानते हैं कि इन चुनौतियों ने Nautika को और मजबूत बनाया. सुरक्षा, समय की पाबंदी और सेवा संस्कृति पर लगातार काम किया गया.
आगे का रास्ता
आने वाले दो सालों में Nautika का लक्ष्य प्रीमियम सेगमेंट में 60-70 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है. नए जहाज, बेहतर ऑनबोर्ड अनुभव और डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत किया जा रहा है.
हालांकि अनूप साफ कहते हैं कि अभी उनका फोकस अंडमान पर ही है. वे चाहते हैं कि जो भी यहां आए, उसका सफर द्वीपों जितना ही खूबसूरत हो.
Nautika की कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जो स्थानीय समस्याओं को समझकर समाधान ढूंढती है. अनूप कुमार ने अपने अनुभव, जड़ों और सपनों को जोड़कर अंडमान के समुद्री सफर को नया रूप दिया.
वे कहते हैं, “अगर आप अपने घर की ज़रूरतों को समझते हैं, तो वहीं से सबसे मजबूत बिजनेस आइडिया जन्म लेते हैं.”
समंदर के बीच चलती Nautika की फेरी आज सिर्फ लोगों को द्वीपों के बीच नहीं ले जाती, बल्कि यह दिखाती है कि सही नीयत और धैर्य से कैसे बदलाव लाया जा सकता है.



