कैसे स्टार्टअप Kiko Live भारत की किराना दुकानों को डिजिटल बना रहा है
कोविड लॉकडाउन के दौरान जन्मा Kiko Live आज हजारों किराना दुकानों को डिजिटल बना रहा है. ONDC इंटीग्रेशन, आसान ऑर्डर मैनेजमेंट और मजबूत रेवेन्यू मॉडल के साथ कैसे Kiko Live छोटे रिटेलर्स को ऑनलाइन दुनिया से जोड़ रहा है, जानिए इस स्टार्टअप की पूरी कहानी.
2020 का साल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए मुश्किलों से भरा था. कोविड लॉकडाउन के दौरान जब बड़े शहरों में भी रोजमर्रा की चीजें मिलना मुश्किल हो गया, तब सबसे ज्यादा असर पड़ा मोहल्ले की छोटी दुकानों और उनके ग्राहकों पर. दुकानों के खुलने का कोई तय समय नहीं था. फोन और व्हाट्सऐप पर ऑर्डर लेना एक बड़ा सिरदर्द बन चुका था.
इसी परेशानी के बीच एक आइडिया ने जन्म लिया, जिसने आज हजारों किराना दुकानों को डिजिटल दुनिया से जोड़ दिया.
यह कहानी है मुंबई और इंदौर स्थित स्टार्टअप Kiko Live की. आलोक चावला इसके को-फाउंडर और CEO (चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) हैं, जबकि नीता चावला को-फाउंडर और COO (चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर) हैंं. वहीं विरेंद्र कुमार Kiko Live के को-फाउंडर और CTO (चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफिसर) हैं.
हाल ही में आलोक चावला ने YourStory हिंदी से बात की. इस बातचीत में उन्होंने Kiko Live की शुरुआत, बिजनेस मॉडल, फंडिंग, रेवेन्यू मॉडल और भविष्य की योजनाओंं के बारे में बताया.
शुरुआत
आलोक चावला (को-फाउंडर) ने अपनी पढ़ाई NMIMS से MBA करके पूरी की. पढ़ाई के बाद उन्होंने P&G और Asian Paints जैसी बड़ी कंपनियों में काम किया. यह वही दौर था जब भारत में पहला डॉट कॉम बूम आ रहा था. इंटरनेट नई संभावनाएं खोल रहा था. इसी समय आलोक के मन में उद्यमिता का बीज पड़ा. उन्होंने अपनी पहली सर्विस कंपनी डॉट कॉम स्टार्टअप्स के लिए शुरू की.
2006 में उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ Zipcash की सह-स्थापना की. यह एक प्रीपेड मोबाइल वॉलेट था, जिसे स्क्रैच कार्ड से लोड कर ऑनलाइन पेमेंट किया जा सकता था. बाद में Zipcash का अधिग्रहण Ola ने कर लिया और आज यह Ola Money के रूप में काम कर रहा है. इस अनुभव ने आलोक को यह समझा दिया कि टेक्नोलॉजी कैसे आम लोगों की जिंदगी आसान बना सकती है.
पहले कोविड लॉकडाउन के दौरान आलोक ने एक सच्चाई को करीब से देखा. भारत की करोड़ों किराना दुकानें पूरी तरह ऑफलाइन थीं. ग्राहक ऑर्डर देने के लिए परेशान थे और दुकानदार ऑर्डर संभालने में उलझे हुए थे. कागज पर लिखे ऑर्डर, फोन में पड़े व्हाट्सऐप मैसेज और महीने के अंत में खाता को लेकर झगड़े आम बात हो गई थी.
यहीं से Kiko Live का आइडिया निकला. सोच साफ थी. अगर छोटे दुकानदारों को एक आसान डिजिटल सिस्टम मिल जाए, तो वे भी अपने ग्राहकों को ऑनलाइन ऑर्डर का अनुभव दे सकते हैं.
कैसे काम करता है Kiko Live
भारत में एक किराना दुकान की लगभग 15 प्रतिशत बिक्री होम डिलीवरी से आती है. पहले यह सब फोन और व्हाट्सऐप पर चलता था. Kiko Live दुकानदार की पूरी इन्वेंट्री को डिजिटल कर देता है. ग्राहक ऐप पर जाकर ऑर्डर कर सकता है. उसे ऑर्डर ट्रैक करने की सुविधा मिलती है. दुकानदार एक ही डैशबोर्ड पर सभी ऑर्डर देख सकता है.
कैश ऑन डिलीवरी और उधार खाते जैसी सुविधाएं भी चुने हुए ग्राहकों के लिए चालू की जा सकती हैं. इससे खाता साफ रहता है और विवाद खत्म हो जाते हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि दुकानदार का स्टोर ONDC (Open Network for Digital Commerce) नेटवर्क पर दिखने लगता है, जिससे वह कई खरीदार ऐप्स तक पहुंच बना पाता है.
ONDC मॉडल और छोटे रिटेलर्स को फायदा
ONDC ने छोटे दुकानदारों के लिए बड़ा रास्ता खोला है. अब वे सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं रहते. कई खरीदार ऐप्स पर उनकी दुकान दिखती है. कम लागत वाली हाइपरलोकल डिलीवरी भी मिलती है. आने वाले समय में जब बड़े बैंकिंग ऐप्स भी ONDC से जुड़ेंगे, तब छोटे दुकानदारों की पहुंच और बढ़ेगी.
आज Kiko Live के साथ 2000 से ज्यादा रिटेलर्स जुड़े हुए हैं. हर महीने 300 से ज्यादा नए दुकानदार प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं.
ऑनबोर्डिंग 25 प्रतिशत महीने दर महीने की रफ्तार से बढ़ रही है. कंपनी भारत के 30 से ज्यादा शहरों और कस्बों में मौजूद है और अब देशभर के रिटेलर्स के लिए प्लेटफॉर्म खुल चुका है.
रेवेन्यू मॉडल और फंडिंग
Kiko Live की कमाई सेटअप फीस, मंथली सब्सक्रिप्शन और ONDC ऑर्डर्स पर मिलने वाले कमीशन से होती है. को-फाउंडर आलोक चावला ने बताया कि कंपनी पहले दिन से रेवेन्यू जनरेट कर रही है. हाल ही में ऑनबोर्डिंग और मंथली फीस शुरू की गई है, क्योंकि ट्रेनिंग और सपोर्ट में काफी मेहनत लगती है.
अब तक प्लेटफॉर्म पर 10 लाख से ज्यादा ऑर्डर डिलीवर हो चुके हैं. रोजाना 3000 से 5000 ऑर्डर प्रोसेस होते हैं. हर नए रिटेलर से करीब 3000 रुपये की ऑनबोर्डिंग इनकम हो रही है.
Kiko Live अब तक 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुका है. इसमें Powerhouse Ventures, 9Unicorns, GSF, Venture Catalysts और Orbit Ventures जैसे निवेशक शामिल हैं. फंडिंग का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी, टीम और रिटेलर अधिग्रहण में किया जा रहा है.
कंपनी का लक्ष्य है कि हर महीने 1000 रिटेलर्स जोड़कर EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) प्रॉफिटेबिलिटी हासिल की जाए. 2026 की शुरुआत में नई फंडिंग राउंड की योजना भी है.
भविष्य की योजनाएं
आलोक मानते हैं कि Quick Commerce ने असर डाला है, लेकिन भारत का ग्रॉसरी बाजार लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का है. Quick Commerce अभी इसका बहुत छोटा हिस्सा है. छोटे शहरों और कस्बों में डार्क स्टोर मॉडल सफल नहीं होगा. यहां लोकल दुकानदार ही ऑनलाइन ऑर्डर का भविष्य हैं.
Kiko Live अब किराना के साथ-साथ रेस्टोरेंट्स को भी जोड़ रहा है. कंपनी ने Tabe नाम का फूड ऑर्डरिंग ऐप लॉन्च किया है. यह रेस्टोरेंट्स को कमीशन-फ्री ऑर्डर और AI-समर्थित रीमार्केटिंग टूल्स देता है. ग्राहक को खाना सस्ता मिलता है और रेस्टोरेंट को ज्यादा मुनाफा.
आलोक चावला का मानना है कि भारत के ऑफलाइन रिटेल को डिजिटल बनाना आसान नहीं है. इसमें सब्र, मेहनत और लंबे समय की सोच चाहिए. लेकिन बाजार बहुत बड़ा है और जो इसे समझ ले, उसके लिए मौके अनगिनत हैं. Kiko Live की कहानी यही दिखाती है कि सही समय पर सही समस्या को समझकर बनाई गई टेक्नोलॉजी, लाखों छोटे कारोबारियों की जिंदगी बदल सकती है.



