कैसे Agentic AI के जरिए कस्टमर सर्विस को आसान बना रहा है स्टार्टअप Rezo.AI
स्टार्टअप Rezo.AI का Agentic AI प्लेटफॉर्म रोज 1.5 करोड़ से ज्यादा कस्टमर कॉल्स मैनेज करता है. कंपनी AI एजेंट्स के जरिए कस्टमर सर्विस को ऑटोमेट कर रही है. ये एजेंट सिर्फ जवाब नहीं देते. वे कस्टमर की समस्या समझते हैं. जरूरी कार्रवाई करते हैं. पूरे वर्कफ्लो को पूरा करने की कोशिश करते हैं.
भारत में कस्टमर सर्विस का अनुभव अक्सर एक जैसा होता है. ग्राहक फोन करता है, अपनी समस्या बताता है और फिर उसे कई सवालों के जवाब देने पड़ते हैं. कई बार कॉल बीच में कट जाती है. दोबारा फोन करने पर पूरी कहानी फिर से बतानी पड़ती है.
कस्टमर सर्विस की इसी समस्या को करीब से देखने के बाद डॉ. राशि गुप्ता ने इसे बदलने का फैसला किया. आज उनका स्टार्टअप Rezo.AI रोजाना 1.5 करोड़ से ज्यादा कॉल मैनेज करने का दावा करता है. कंपनी का कहना है कि उसने ग्रोथ के लिए लगातार फंडिंग पर निर्भर रहने के बजाय कारोबार से हुई कमाई को दोबारा बिजनेस में लगाया है.
साइंस से स्टार्टअप तक
डॉ. राशि गुप्ता का बचपन ऐसे परिवार में बीता जहां विज्ञान और रिसर्च रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा थे. उनके पिता ऐनिमल जेनेटिसिस्ट हैं और राष्ट्रीय स्तर पर कई रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) कार्यक्रमों का नेतृत्व कर चुके हैं. इस माहौल ने राशि में समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने की आदत विकसित की.
उन्होंने Lady Shri Ram College से मैथेमैटिक्स ऑनर्स किया. इसके बाद IIT दिल्ली से दो मास्टर्स डिग्रियां हासिल कीं और University of Helsinki से डेटा साइंस में PhD की. Rezo.AI शुरू करने से पहले वह JNU में पढ़ा चुकी थीं. उन्होंने AbsolutData में AI और मशीन लर्निंग (ML) की प्रैक्टिस की और WNS Innovation Lab में R&D का नेतृत्व किया.
WNS में काम करते हुए उन्होंने कस्टमर सर्विस की एक बड़ी समस्या देखी. एजेंट्स के पास ग्राहक की पूरी जानकारी एक जगह उपलब्ध नहीं होती थी. उन्हें अलग-अलग सिस्टम में जानकारी तलाशनी पड़ती थी. छोटी सी जरूरत भी लंबी बातचीत में बदल जाती थी.
यहीं से राशि को लगा कि इस प्रक्रिया के एक बड़े हिस्से को AI के जरिए बदला जा सकता है.
दो साल तक लॉन्च का इंतजार
नोएडा स्थित Rezo.AI का शुरुआती सफर आसान नहीं था. कंपनी ने करीब दो साल तक अपना प्रोडक्ट बाजार में नहीं उतारा. राशि चाहती थीं कि सिस्टम असली टेलीफोन कॉल पर काम करे, सिर्फ डेमो में अच्छा न दिखे.
चुनौती भी आसान नहीं थी. AI को भारतीय भाषाओं और अलग-अलग बोलियों को समझना था. साथ ही असली फोन नेटवर्क पर आवाज की गुणवत्ता हमेशा एक जैसी नहीं होती.
2018 में शुरू हुई कंपनी शुरुआत में राशि के अपार्टमेंट से चलती थी. कंपनी ने भी फंडिंग जुटाने की रफ्तार को प्राथमिकता नहीं दी. 2021 में उसे करीब 2 करोड़ रुपये की बाहरी फंडिंग मिली. इसके बाद कंपनी ने लगातार नए राउंड जुटाने के बजाय कारोबार से आए पैसे को प्रोडक्ट और कंपनी के विस्तार में लगाने पर जोर दिया.
YourStory से बात करते हुए Rezo.AI की को-फाउंडर डॉ. राशि गुप्ता बताती हैं, “हमने करीब दो साल तक प्रोडक्ट लॉन्च नहीं किया, क्योंकि मैं ऐसा सिस्टम नहीं बनाना चाहती थी जो सिर्फ प्रेजेंटेशन में अच्छा लगे. हमें असली फोन कॉल पर काम करने वाला समाधान चाहिए था.”

कैसे काम करता है Rezo.AI
आज Rezo.AI खुद को एजेंटिक AI प्रोडक्ट कंपनी के तौर पर देखती है. इसका प्लेटफॉर्म बड़े उद्यमों के लिए कस्टमर बातचीत को संभालने पर केंद्रित है. कंपनी की कमाई इस्तेमाल पर आधारित मॉडल से होती है. यानी कॉल की संख्या, AI के इस्तेमाल और काम की जटिलता के आधार पर कीमत तय होती है.
कंपनी के ग्राहक बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एनबीएफसी, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एनर्जी और टेलीकॉम सेक्टर्स में हैं. Maruti Suzuki, Livguard, L&T और Spinny इसके ग्राहकों में शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक उसके पास 24 से ज्यादा एंटरप्राइज क्लाइंट हैं.
राशि के मुताबिक एजेंटिक AI का मतलब सिर्फ ग्राहक के सवाल का जवाब देना नहीं है. AI को ग्राहक की जरूरत समझकर अगला कदम भी उठाना चाहिए. Rezo के एजेंट वॉइस, चैट और WhatsApp जैसे माध्यमों पर बातचीत के साथ जुड़े सिस्टम में जाकर संबंधित प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करते हैं.
राशि बताती हैं, “हम AI को सिर्फ बातचीत करने वाले सिस्टम की तरह नहीं देखते. हमारा एजेंट एक लक्ष्य लेता है और उसे पूरा करने की कोशिश करता है. वह ग्राहक की बात समझता है, अगला कदम तय करता है और संबंधित सिस्टम में कार्रवाई करता है.”
चुनौतियां
Rezo.AI के लिए सबसे बड़ी चुनौती AI मॉडल बनाना नहीं, बल्कि उसे भारत की अलग-अलग परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर चलाना रही.
अलग-अलग इलाकों की बोलियों और उच्चारण में अंतर है. शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में AI की सटीकता अपेक्षाकृत कम रही. कंपनी ने इसके लिए रियल टाइम कॉल डेटा का इस्तेमाल किया और अलग-अलग बोलियों के लिए मॉडल को बेहतर किया.
एक दूसरी चुनौती कंपनियों का भरोसा जीतना था. कई कंपनियों को आशंका थी कि AI लोगों की नौकरियां कम कर सकता है. Rezo.AI ने छोटे पायलट से शुरुआत कर परिणाम दिखाने की रणनीति अपनाई.
त्योहारों और बड़े कैंपेन के दौरान कॉल की संख्या अचानक बढ़ना भी एक चुनौती रही. इसके लिए कंपनी ने ऑटो स्केलिंग और लगातार निगरानी पर काम किया.
राशि के मुताबिक, “टेक्नोलॉजी बनाना और उसे स्वीकार करवाना दो अलग चीजें हैं. इसलिए हमने AI को लोगों की जगह लेने के बजाय उनके काम को बेहतर बनाने वाले टूल के तौर पर समझाया.”

Rezo.AI की टीम
रोजाना 1.5 करोड़ कॉल्स
Rezo.AI के मुताबिक उसका प्लेटफॉर्म रोजाना 1.5 करोड़ से ज्यादा कॉल संभालता है और 22 से अधिक भाषाओं में काम करता है. कंपनी का कहना है कि वह अब तक मुनाफे में रही है. उसे NASSCOM Emerge 50 और IDC की Gen AI इनोवेटर्स लिस्ट में भी पहचान मिली है.
हालांकि राशि के लिए उपलब्धियों का पैमाना सिर्फ पुरस्कार नहीं हैं. उनका जोर इस बात पर है कि AI ग्राहक का काम कितनी प्रभावी तरीके से पूरा कर पा रहा है.
कंपनी के मुताबिक Maruti Suzuki में Rezo के एजेंट सर्विस बुकिंग की प्रक्रिया संभालते हैं. यहां हर महीने करीब 7.5 लाख बुकिंग संभाले जाने का दावा है. एक इंश्योरेंस क्लाइंट के लिए क्लेम स्टेटस से जुड़ी बड़ी संख्या में कॉल भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के हल की जाती हैं.
कंपनी अब कलेक्शंस से जुड़े समाधान पर काम कर रही है. साथ ही DIY प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जा रहा है, जिसके जरिए किसी कंपनी की बिजनेस टीम कम समय में प्रोडक्शन-रेडी AI एजेंट तैयार कर सके.
आगे की राह
भारत अभी Rezo.AI का मुख्य बाजार है. कंपनी ने सिंगापुर में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और आगे दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की योजना है.
हालांकि राशि के लिए तेज विस्तार से ज्यादा महत्वपूर्ण टिकाऊ ग्रोथ है. उनका कहना है कि कंपनी आगे भी पहले समस्या को समझने, फिर समाधान बनाने और उसके बाद विस्तार करने की रणनीति पर काम करेगी.
AI की दुनिया में टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. ऐसे समय में राशि की कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि Rezo.AI ने शुरुआत में जल्दबाजी के बजाय प्रोडक्ट को तैयार करने पर जोर दिया.
उनकी ऑन्त्रप्रेन्योरशिप की बुनियाद किसी एक टेक्नोलॉजी से ज्यादा एक सवाल पर टिकी है: ग्राहक की असली समस्या क्या है और उसे बेहतर तरीके से कैसे हल किया जा सकता है?
टेक्नोलॉजी बदल सकती है, लेकिन किसी समस्या को सही तरीके से समझने की जरूरत हमेशा बनी रहेगी.



