प्रोजेक्टर से डिस्प्ले तक: भारत में बढ़ता Optoma का कारोबार
भारत में प्रोजेक्टर से आगे बढ़कर डिस्प्ले बाजार में विस्तार कर रही Optoma इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, प्रोफेशनल डिस्प्ले और एलईडी स्क्रीन पर फोकस बढ़ा रही है. Optoma India के एमडी विजय शर्मा से जानिए कंपनी की रणनीति, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग, बाजार के अवसर और अगले पांच वर्षों के लक्ष्य.
कभी प्रोजेक्टर का इस्तेमाल मुख्य रूप से क्लासरूम, कॉन्फ्रेंस रूम और ऑडिटोरियम तक सीमित था. लेकिन डिजिटल कंटेंट और काम करने के बदलते तरीकों ने स्क्रीन के बाजार को भी बदल दिया है. स्कूल स्मार्ट क्लासरूम अपना रहे हैं, कंपनियां हाइब्रिड वर्क के लिए इंटरैक्टिव स्क्रीन पर निवेश कर रही हैं और घरों में बड़ी स्क्रीन पर फिल्म, स्पोर्ट्स और गेमिंग का चलन बढ़ रहा है. रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टर में भी डिजिटल डिस्प्ले की मांग बढ़ रही है.
इस बदलाव के बीच ताइवान की विजुअल टेक्नोलॉजी कंपनी Optoma भारत में अपनी पहचान प्रोजेक्टर तक सीमित नहीं रखना चाहती. कंपनी प्रोजेक्टर के साथ इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले, प्रोफेशनल डिस्प्ले और डायरेक्ट व्यू एलईडी जैसे सेगमेंट में विस्तार कर रही है.
Optoma India के मैनेजिंग डायरेक्टर विजय शर्मा के सामने चुनौती दोहरी है. पहला, प्रोजेक्टर बाजार में कंपनी की मौजूदा स्थिति को मजबूत रखना और दूसरा, तेजी से प्रतिस्पर्धी हो रहे डिस्प्ले बाजार में जगह बनाना.
पुणे यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग में एमबीए करने वाले विजय शर्मा ने Toshiba India और BenQ जैसे ब्रांड्स के साथ काम किया है. करीब 15 वर्षों के दौरान अलग-अलग भूमिकाओं में उन्होंने ऑडियो विजुअल और डिस्प्ले टेक्नोलॉजी बाजार को करीब से देखा है.
Optoma में उनकी जिम्मेदारी भारत के साथ दक्षिण एशिया में कंपनी का कारोबार बढ़ाने की है. शर्मा के मुताबिक, टेक्नोलॉजी कारोबार में नए प्रोडक्ट लाने के साथ यह समझना भी जरूरी है कि ग्राहकों की जरूरत और उनके इस्तेमाल का तरीका किस दिशा में बदल रहा है.
YourStory से बात करते हुए विजय शर्मा कहते हैं, “Toshiba India और BenQ के साथ काम करते हुए मुझे ऑडियो विजुअल और डिस्प्ले टेक्नोलॉजी के बदलते बाजार को समझने का मौका मिला. अलग-अलग लीडरशिप भूमिकाओं ने बिजनेस स्ट्रैटेजी, ग्राहकों की जरूरत और टीम बनाने की अहमियत सिखाई. Optoma में हमारा फोकस भारत और दक्षिण एशिया में इसी समझ के साथ कारोबार को आगे बढ़ाने पर है.”
Optoma की स्थापना 2000 में हुई और इसका मुख्यालय ताइवान में है. भारत में कंपनी की पहचान मुख्य रूप से प्रोजेक्टर ब्रांड के तौर पर रही है और प्रोजेक्टर अभी भी उसके कारोबार का प्रमुख हिस्सा है.
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले, ऑल-इन-वन डायरेक्ट व्यू एलईडी और N Series Professional Displays जैसे प्रोडक्ट जोड़कर पोर्टफोलियो का विस्तार किया है. इसके पीछे रणनीति कॉरपोरेट, एजुकेशन, रिटेल और दूसरे कमर्शियल सेगमेंट में अलग-अलग स्क्रीन जरूरतों को पूरा करने की है.
शर्मा बताते हैं कि प्रोजेक्टर अभी कंपनी के लिए सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर है, जबकि डिस्प्ले कारोबार अपेक्षाकृत नया है. कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में कुल कारोबार में इसकी हिस्सेदारी बढ़ेगी.
यह बदलाव केवल Optoma तक सीमित नहीं है. प्रोफेशनल ऑडियो विजुअल इंडस्ट्री में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल सहयोग, डिजिटल साइनेज, सॉफ्टवेयर और इमर्सिव अनुभव की भूमिका बढ़ रही है. AVIXA की 2025 इंडस्ट्री आउटलुक एंड ट्रेंड्स एनालिसिस रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक प्रोफेशनल ऑडियो विजुअल इंडस्ट्री का रेवेन्यू 2025 में करीब 332 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 402 अरब डॉलर हो सकता है. रिपोर्ट में भारत को एशिया-प्रशांत के तेजी से बढ़ते ऑडियो विजुअल बाजारों में शामिल किया गया है.
भारत में क्यों बढ़ रहा अवसर
भारत में Optoma के लिए अवसर का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा क्षेत्र से आता है. स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में डिजिटल क्लासरूम की मांग ने प्रोजेक्टर के साथ इंटरैक्टिव डिस्प्ले के लिए भी बाजार तैयार किया है.
6Wresearch की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का एडटेक और स्मार्ट क्लासरूम बाजार 2025 में करीब 32.7 करोड़ डॉलर का था, जो 2032 तक 52.1 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है. हालांकि, बाजार के इन अनुमानों को वास्तविक सरकारी और निजी निवेश की रफ्तार, स्कूलों की डिजिटल क्षमता और बजट जैसे कारक प्रभावित करेंगे.
दूसरी तरफ कॉरपोरेट सेक्टर में हाइब्रिड मीटिंग, वायरलेस कंटेंट शेयरिंग और डिजिटल सहयोग के साधनों ने पारंपरिक मीटिंग रूम की जरूरतों को बदल दिया है. घरों में स्ट्रीमिंग, गेमिंग और 4K कंटेंट ने होम एंटरटेनमेंट को एक अलग बाजार के रूप में उभारा है.
यानी एक ही स्क्रीन टेक्नोलॉजी बाजार अब कई अलग-अलग उपयोगों में बंट रहा है. यही बदलाव Optoma जैसी कंपनियों को प्रोजेक्टर से आगे अपना पोर्टफोलियो बढ़ाने का कारण देता है.
प्रोफेशनल ऑडियो विजुअल बाजार में बढ़ी हिस्सेदारी
Optoma के हालिया प्रदर्शन में एंट्री प्रोफेशनल ऑडियो विजुअल प्रोजेक्टर सेगमेंट अहम रहा है.
PMA के इंडस्ट्री चैनल सेल्स डेटा के आधार पर कंपनी ने दावा किया है कि 2026 की पहली तिमाही में भारत के 6,000 से 10,000 ल्यूमेंस वाले एंट्री प्रोफेशनल ऑडियो विजुअल डीएलपी प्रोजेक्टर सेगमेंट में उसकी हिस्सेदारी 21.52 प्रतिशत रही. एक साल पहले इसी अवधि में यह 9.39 प्रतिशत थी. कंपनी की यूनिट शिपमेंट में सालाना आधार पर 165 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इसी डेटा के अनुसार, संबंधित सेगमेंट का कुल बिक्री वॉल्यूम 2025 की पहली तिमाही से 2026 की पहली तिमाही के बीच करीब 15 प्रतिशत बढ़ा. यानी Optoma की शिपमेंट ग्रोथ उस अवधि में पूरे सेगमेंट की वृद्धि से तेज रही.
हालांकि, 21.52 प्रतिशत हिस्सेदारी को पूरे भारतीय प्रोजेक्टर बाजार की हिस्सेदारी नहीं माना जाना चाहिए. यह एक खास ब्राइटनेस रेंज और डीएलपी टेक्नोलॉजी वाले एंट्री प्रोफेशनल ऑडियो विजुअल सेगमेंट का आंकड़ा है.
यह सेगमेंट ऑडिटोरियम, हॉस्पिटैलिटी, म्यूजियम, बड़े कॉरपोरेट स्पेस और दूसरे बड़े स्थानों में इस्तेमाल होने वाले हाई-ब्राइटनेस प्रोजेक्टर को कवर करता है.

Optoma India की टीम
स्मार्ट क्लासरूम से होम एंटरटेनमेंट तक
स्क्रीन बाजार में बदलाव केवल आकार या ब्राइटनेस तक सीमित नहीं है. ग्राहक अब बेहतर रेजोल्यूशन, लंबी प्रोडक्ट लाइफ, कम मेंटेनेंस और आसान कनेक्टिविटी जैसी खूबियों पर भी ध्यान दे रहे हैं.
Optoma इसी बदलाव के बीच लेजर प्रोजेक्शन और 4K प्रोडक्ट पर जोर दे रही है. एजुकेशन सेक्टर के लिए कंपनी ने Creative Touch 3 Series Interactive Flat Panel Displays पेश किए हैं, जिन्हें भारत में स्थानीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है.
लेकिन स्मार्ट क्लासरूम का बाजार केवल हार्डवेयर बेचने का अवसर नहीं है. स्कूलों के लिए लागत, शिक्षक प्रशिक्षण, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन, कनेक्टिविटी और बिक्री के बाद मिलने वाली सेवाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं. इसलिए इंटरैक्टिव डिस्प्ले कंपनियों के बीच मुकाबला आगे चलकर केवल स्क्रीन की तकनीकी खूबियों पर नहीं, बल्कि पूरे टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम पर होने की संभावना है.
होम एंटरटेनमेंट में चुनौती अलग है. बड़े और अपेक्षाकृत सस्ते टेलीविजन की उपलब्धता के बीच प्रोजेक्टर कंपनियों को बड़ी स्क्रीन, पोर्टेबिलिटी और इमर्सिव व्यूइंग जैसे उपयोगों के आधार पर अपनी जगह बनानी पड़ती है. गेमिंग और होम सिमुलेशन जैसे खास उपयोग इस बाजार को नए ग्राहक दे सकते हैं.
भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
भारत में कारोबार बढ़ाने के साथ Optoma स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर भी जोर दे रही है. कंपनी के मुताबिक Creative Touch Interactive Flat Panel Displays के बाद N Series Professional Displays को भी भारत में स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है.
यह रणनीति महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और डिस्प्ले बाजार में कीमत, सप्लाई चेन और बिक्री के बाद मिलने वाली सेवा प्रतिस्पर्धा के बड़े कारक हैं. स्थानीय उत्पादन कंपनियों को लागत और सप्लाई के लिहाज से फायदा दे सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर उत्पादन के स्तर और स्थानीय मूल्यवर्धन पर निर्भर करेगा.
Optoma का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में उन प्रमुख विजुअल डिस्प्ले कैटेगरी में शीर्ष दो ब्रांड्स में शामिल होना है, जिनमें वह कारोबार करती है. कंपनी शिक्षा और कॉरपोरेट के अलावा रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और दूसरे कमर्शियल सेगमेंट में भी संभावनाएं देख रही है.
शर्मा कहते हैं, “प्रोजेक्टर हमारी मुख्य ताकत बना रहेगा, लेकिन डिस्प्ले कारोबार में हमें बड़ा अवसर दिखाई देता है. हमारा फोकस भारत के लिए सही प्रोडक्ट तैयार करने, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और पार्टनर नेटवर्क को मजबूत करने पर है.”
Optoma की भारत रणनीति उस बड़े बदलाव का हिस्सा है जिसमें प्रोजेक्टर, इंटरैक्टिव पैनल, प्रोफेशनल डिस्प्ले और एलईडी स्क्रीन के बीच की सीमाएं कम हो रही हैं. ग्राहक अब किसी एक डिवाइस के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से विजुअल सॉल्यूशन तलाश रहे हैं.
Optoma के लिए प्रोजेक्टर बाजार में बनी पहचान शुरुआती बढ़त दे सकती है, लेकिन इंटरैक्टिव और प्रोफेशनल डिस्प्ले सेगमेंट में उसे स्थापित वैश्विक और घरेलू कंपनियों से मुकाबला करना होगा. ऐसे में अगले कुछ वर्षों में असली परीक्षा नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की नहीं, बल्कि यह साबित करने की होगी कि कंपनी प्रोजेक्टर में हासिल अपनी मौजूदगी को व्यापक डिस्प्ले कारोबार में कितनी मजबूती से बदल पाती है.



