दिल्ली-NCR में पुराने बस और ट्रक होंगे रिप्लेस, सरकार की 9,585 करोड़ रु की PARIVARTAN स्कीम में मिलेंगे ये फायदे
केंद्र सरकार की PARIVARTAN स्कीम के तहत दिल्ली-NCR में पुराने ट्रकों और बसों को हटाकर BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा दिया जाएगा. जानें 9,585 करोड़ रुपये की योजना में वाहन मालिकों को मिलने वाली टैक्स छूट, लोन ब्याज सहायता, OEM डिस्काउंट और अन्य फायदे.
हाइलाइट्स
PARIVARTAN स्कीम का बजट ₹9,585 करोड़ रखा गया है.
योजना में पुराने BS-IV और उससे पुराने वाहन पात्र हैं.
नई गाड़ी पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ.
वाहन लोन पर 5% ब्याज सहायता का लाभ मिलेगा.
नई गाड़ी पर कम से कम 8% का डिस्काउंट मिलेगा.
EV खरीदने पर ₹2.56 लाख तक एकमुश्त इंसेंटिव मिलेगा.
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है. सड़कों पर चलने वाले पुराने ट्रक और बस भी इस समस्या को बढ़ाते हैं. खासकर पुराने उत्सर्जन मानकों वाले कमर्शियल वाहन ज्यादा प्रदूषक छोड़ते हैं. इनमें पार्टिकुलेट मैटर (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) जैसे प्रदूषक शामिल हैं. बढ़ती माल ढुलाई और तेजी से बढ़ते शहरों के बीच पुराने कमर्शियल वाहनों को बदलना अब जरूरी माना जा रहा है.
इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR के लिए PARIVARTAN स्कीम शुरू की है. इसका मकसद पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को हटाकर उनकी जगह BS-VI मानक वाले और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देना है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून 2026 को इस योजना को मंजूरी दी थी. इस योजना के लिए कुल ₹9,585 करोड़ का बजट रखा गया है. इसमें केंद्र सरकार ₹5,041 करोड़ की वित्तीय मदद देगी.
क्या है PARIVARTAN स्कीम?
PARIVARTAN का पूरा नाम Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions है. आसान भाषा में इसका उद्देश्य पुराने कमर्शियल वाहनों को हटाकर उनकी जगह कम प्रदूषण फैलाने वाले नए वाहन लाना है.
यह स्कीम दिल्ली के साथ हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के NCR जिलों में लागू होगी. इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) करेगा. इसके लिए फंडिंग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के जरिए होगी. NCRPB, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत काम करता है.
यह केवल वाहन बदलने की योजना नहीं है. इसमें वाहन मालिकों को नई गाड़ी खरीदने के लिए आर्थिक मदद भी दी जाएगी. सरकार का प्रयास है कि पुरानी गाड़ी हटाने और नई गाड़ी खरीदने की प्रक्रिया वाहन मालिकों के लिए आसान और किफायती बने.
किन ट्रकों और बसों पर लागू होगी योजना?
PARIVARTAN स्कीम के तहत दिल्ली-NCR में रजिस्टर्ड BS-IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानक वाले ट्रक और बस पात्र होंगे. इनमें Pre-BS, BS-I, BS-II और BS-III वाहन भी शामिल हैं.
सरकार के अनुसार करीब 2.07 लाख वाहन इस स्कीम के दायरे में आ सकते हैं. इनमें लगभग 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं.
इसका मतलब है कि योजना का दायरा काफी बड़ा है. पुराने कमर्शियल वाहनों को धीरे-धीरे हटाकर आधुनिक और कम प्रदूषण वाले वाहनों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
नई गाड़ी खरीदने पर मिलेंगे 6 बड़े फायदे
PARIVARTAN स्कीम के तहत पात्र वाहन मालिकों को नई BS-VI या इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ी खरीदने पर कई तरह की आर्थिक राहत मिलेगी. इन सुविधाओं से नई गाड़ी खरीदने की शुरुआती लागत कम होने के साथ आगे के खर्च को संभालने में भी मदद मिल सकती है.
1. 100% रोड टैक्स में छूट: पात्र वाहन मालिकों को नई गाड़ी खरीदने पर मोटर व्हीकल टैक्स (रोड टैक्स) में 100 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी. यह छूट अधिकतम 10 साल तक उपलब्ध होगी.
2. 100% रजिस्ट्रेशन फीस माफ: पात्र नई BS-VI या इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ी खरीदने पर रजिस्ट्रेशन फीस नहीं देनी होगी. इससे वाहन खरीदने की शुरुआती लागत कम होगी.
3. 5% ब्याज अनुदान: नई गाड़ी खरीदने के लिए लिए गए व्हीकल लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज सहायता मिलेगी. इससे वाहन मालिकों के लिए लोन की कुल लागत कम करने में मदद मिलेगी.
4. एक्स-शोरूम कीमत पर 8% या उससे अधिक की छूट: स्कीम में शामिल वाहन कंपनियां पात्र ग्राहकों को नई गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8 प्रतिशत की छूट देंगी. इससे वाहन की खरीद कीमत कम होगी.
5. हर महीने ₹4,800 तक के फ्यूल वाउचर: पात्र BS-VI डीजल और सीएनजी वाहनों के मालिकों को वाहन की श्रेणी के अनुसार पांच साल तक हर महीने ₹1,200 से ₹4,800 तक के फ्यूल वाउचर मिलेंगे.
6. EV खरीदने पर ₹2.56 लाख तक एकमुश्त लाभ: इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को भविष्य के फ्यूल वाउचर के बराबर एकमुश्त आर्थिक सहायता मिलेगी. वाहन की श्रेणी के आधार पर यह इंसेंटिव ₹64,000 से ₹2.56 लाख तक हो सकता है.

पुरानी गाड़ी के साथ क्या करना होगा?
पुराने वाहन की स्थिति और उसके उत्सर्जन मानक के आधार पर अलग व्यवस्था रखी गई है.
BS-III या उससे पुराने वाहनों को रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) में स्क्रैप करना होगा. वहीं BS-IV वाहनों के मालिक उन्हें स्क्रैप कर सकते हैं या NCR से बाहर ऐसे शहरों में बेच सकते हैं जो नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत आने वाले शहर नहीं हैं.
वाहन मालिक के पास सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CoD) से जुड़ा विकल्प भी होगा. इसे ट्रेड करने की सुविधा का प्रावधान किया गया है. इससे उन लोगों को भी एक विकल्प मिलता है जो तुरंत नई गाड़ी नहीं खरीदना चाहते.
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों पर ज्यादा जोर
स्कीम में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को खास महत्व दिया गया है. इसका उद्देश्य दिल्ली-NCR में जीरो एमिशन मोबिलिटी को बढ़ावा देना है.
दिल्ली में स्कीम के तहत खरीदे जाने वाले लाइट गुड्स व्हीकल (LGVs) का इलेक्ट्रिक होना जरूरी होगा. बसों के लिए BS-VI CNG या इलेक्ट्रिक वाहन का विकल्प रखा गया है.
वहीं हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पात्र वाहन मालिक BS-VI वाहन या इलेक्ट्रिक वाहन में से अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं.
इस तरह अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों और कमर्शियल वाहनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई गई है.
दिल्ली NCR के चार राज्यों में लागू होगी योजना
PARIVARTAN Scheme को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखा गया है. इसका दायरा पूरे NCR क्षेत्र में रखा गया है.
दिल्ली के अलावा हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संबंधित NCR जिलों में यह योजना लागू है. इससे प्रदूषण को सिर्फ दिल्ली की सीमा के भीतर देखने के बजाय पूरे क्षेत्र की समस्या के रूप में संबोधित करने की कोशिश की जा रही है.
कमर्शियल वाहन एक राज्य से दूसरे राज्य और एक शहर से दूसरे शहर तक चलते हैं. इसलिए केवल दिल्ली में पुराने वाहनों को हटाना पर्याप्त नहीं होगा. NCR के बड़े क्षेत्र में एक साथ वाहन फ्लीट को आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी
PARIVARTAN स्कीम के लिए सरकार ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है. इसका नाम Parivahan PARIVARTAN पोर्टल है. इस पोर्टल के जरिए वाहन मालिक अपनी पात्रता देख सकेंगे. वे स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे और इंसेंटिव के लिए आवेदन भी कर सकेंगे. इसके अलावा आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी.
पोर्टल को VAHAN, V Scrapp, DigiELV, पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS), लोन देने वाले संस्थानों और फ्यूल वाउचर सिस्टम से जोड़ा गया है. इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और आसान बनाना है.
कई बड़ी ऑटो कंपनियां भी जुड़ीं
स्कीम को जमीन पर लागू करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी जोड़ा गया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रमुख ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के साथ MoU साइन किए हैं.
इनमें Ashok Leyland, Switch Mobility, Tata Motors, Mahindra & Mahindra, SML Mahindra, Daimler India Commercial Vehicles, Eicher Trucks and Buses, Force Motors, Pinnacle Mobility Solutions, Olectra Greentech Limited और Montra Electric शामिल हैं. इन कंपनियों के साथ हुए समझौतों का उद्देश्य पात्र ग्राहकों को योजना के तहत नई गाड़ी खरीदने पर निर्धारित छूट उपलब्ध कराना है.
सरकार के अनुसार शुरुआती 11 OEMs का संयुक्त बाजार हिस्सा देश के घरेलू ट्रक और बस बाजार का 95 प्रतिशत से अधिक था. अगस्त 2026 तक स्कीम में शामिल OEMs की संख्या बढ़कर 15 हो गई थी.
इन कंपनियों की भागीदारी से पात्र वाहन मालिकों के लिए स्कीम के तहत नए वाहनों के विकल्प बढ़ेंगे.
स्कीम ने पकड़ी रफ्तार
PARIVARTAN स्कीम को 14 जुलाई 2026 को लॉन्च किया गया था. 27 अगस्त 2026 तक 1,300 से अधिक लाभार्थी PARIVARTAN पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा चुके थे.
नई गाड़ी खरीदने के लिए वित्तीय मदद को आसान बनाने के लिए 42 बैंकों और NBFCs को भी स्कीम से जोड़ा गया था. अगस्त के अंत तक 15 ऑटो OEMs के साथ समझौते हो चुके थे.
स्कीम के तहत पहली नई गाड़ी खरीदने वाले लाभार्थी के तौर पर राजस्थान के अलवर के महेंद्र सिंह का नाम सामने आया. उन्होंने 19 अगस्त 2026 को PARIVARTAN स्कीम के तहत नई गाड़ी खरीदी.
कारोबार के लिए भी अहम है वाहन बदलना
कमर्शियल वाहन मालिकों के लिए ट्रक और बस सिर्फ परिवहन का साधन नहीं हैं. यही उनकी कमाई का जरिया भी होते हैं. ऐसे में कई साल पुरानी गाड़ी को बदलना उनके लिए बड़ा वित्तीय फैसला हो सकता है.
PARIVARTAN स्कीम इसी चुनौती को ध्यान में रखती है. टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन फीस में राहत, लोन पर ब्याज सहायता, वाहन खरीद पर OEM डिस्काउंट और फ्यूल या इलेक्ट्रिक वाहन इंसेंटिव मिलकर नई गाड़ी खरीदने का खर्च कम करने में मदद कर सकते हैं.
नई BS-VI और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है. इससे ईंधन की खपत और गाड़ी चलाने का खर्च कम हो सकता है. हालांकि, वास्तविक बचत गाड़ी के मॉडल, इस्तेमाल और चलाने की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी.
प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण कई अलग-अलग कारणों से जुड़ा है. ऐसे में केवल एक योजना से पूरी समस्या खत्म नहीं हो सकती. लेकिन पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों को हटाना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
PARIVARTAN स्कीम इसी बदलाव पर केंद्रित है. सरकार पुराने BS-IV और उससे पहले के ट्रकों और बसों को हटाकर BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना चाहती है. इसके लिए आर्थिक सहायता, ऑटो कंपनियों की छूट और डिजिटल प्रक्रिया को एक साथ जोड़ा गया है.
अगर बड़ी संख्या में पात्र वाहन मालिक इस योजना का लाभ उठाते हैं और पुराने वाहन वास्तव में सड़कों से हटते हैं, तो NCR के कमर्शियल ट्रांसपोर्ट फ्लीट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इसका वास्तविक पर्यावरणीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने पुराने वाहन हटते हैं, उनकी जगह कितने नए कम उत्सर्जन वाले वाहन आते हैं और इन वाहनों का इस्तेमाल किस तरह होता है.
दिल्ली-NCR की हवा को साफ करने की चुनौती लंबी है. PARIVARTAN स्कीम इस चुनौती के एक अहम हिस्से को संबोधित करती है. पुराने कमर्शियल वाहनों को आधुनिक BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने की यह पहल आने वाले वर्षों में क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बदल सकती है.
(feature image: AI generated)



